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बिजनौर में किशोरी से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो कोर्ट की विशेष न्यायाधीश कल्पना पांडे ने दोषी जुबैद को 25 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 65 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। हालांकि, कोर्ट ने जुबैद को एससी/एसटी एक्ट के आरोप से बरी कर दिया। विशेष लोक अभियोजक योगेंद्र कुमार के अनुसार, यह घटना 22 जुलाई 2025 को नूरपुर थाना क्षेत्र में हुई थी। पीड़ित के पिता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उनकी नाबालिग बेटी दोपहर करीब दो बजे कोल्ड ड्रिंक लेने दुकान पर गई थी, लेकिन काफी देर तक घर नहीं लौटी। बेटी को ढूंढते हुए पिता गांव में एक खाली पड़े मकान के पास पहुंचे, जहां से उन्हें अपनी बेटी के रोने की आवाज सुनाई दी। घर लौटने पर किशोरी ने बताया कि दुकान पर जुबैद पहले से मौजूद था। उसने उसे बहला-फुसलाकर खाली घर में ले जाकर दुष्कर्म किया और उसके कपड़े फाड़ दिए। किशोरी के चिल्लाने पर आरोपी जुबैद वहां से भागते समय उसे जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि जुबैद ने जातिसूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की थी। पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया, जिसमें दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इसके बाद आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई और विवेचना के उपरांत पुलिस ने जुबैद के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में पेश किया। इस मामले में सुनवाई के बाद न्यायाधीश कल्पना पांडे ने आरोपी जुबैद को दोषी पाया और उसे 25 वर्ष के कठोर कारावास तथा 65 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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दुष्कर्म मामले में दोषी को 25 साल की सजा:बिजनौर कोर्ट ने 65 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया
