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मानसून की भारी बारिश के बाद सतना से लगे मध्य प्रदेश-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित प्रसिद्ध शबरी जलप्रपात इन दिनों अपने रौद्र रूप में दिखाई दे रहा है। पहाड़ों और चट्टानों के बीच से बहता मटमैला पानी लगभग 40 फीट की ऊंचाई से दो स्तरों में नीचे गिर रहा है। झरने की तेज गर्जना और उठती फुहारें दूर तक महसूस की जा सकती हैं। बारिश के कारण ऊपरी चट्टानों से पानी का बहाव कई गुना बढ़ गया है। विशाल जलधारा पहले एक चट्टान से नीचे आती है और फिर दूसरे स्तर से छलांग लगाते हुए गिरती है। पानी की तेज रफ्तार के कारण गिरने वाले स्थान पर लगातार फुहारों का गुबार बन रहा है। आसपास की घनी हरी वनस्पतियों के बीच सफेद फुहारों और मटमैली जलधारा का यह दृश्य मनमोहक है। लगभग 40 फीट ऊंचा यह द्विस्तरीय जलप्रपात पयस्विनी नदी और स्थानीय नालों के पानी के मिलने से बनता है। सामान्य दिनों में शांत रहने वाला शबरी जलप्रपात बारिश के मौसम में पूरी तरह बदल जाता है। जलस्तर बढ़ने से इसकी धार चौड़ी और तेज हो जाती है, जिससे यहां प्रकृति का रौद्र रूप स्पष्ट दिखाई देता है। यहीं शबरी माता से मिले थे राम
इस जलप्रपात से जुड़ी एक पौराणिक मान्यता भी है। कहा जाता है कि भगवान राम वनवास के दौरान इस स्थान पर आए थे और यहीं उनकी मुलाकात शबरी माता से हुई थी। इसी कारण इस जलप्रपात का नाम शबरी पड़ा। उफनते झरने की विशाल धारा और चारों ओर फैली हरियाली पर्यटकों और स्थानीय लोगों को आकर्षित कर रही है। हालांकि, जलप्रपात के आसपास बारिश के कारण चट्टानें फिसलन भरी हो गई हैं। तेज बहाव के बीच सेल्फी लेने या पानी के बहुत नजदीक जाने की कोशिश जानलेवा साबित हो सकती है। प्रशासन ने दी दूरी बनाए रखने की सलाह
जलस्तर में लगातार वृद्धि और तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने पर्यटकों से जलप्रपात के किनारे से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। बारिश के मौसम में अचानक पानी बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते समय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।
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बारिश में शबरी जलप्रपात का रौद्र रूप:40 फीट ऊंचाई से गिर रही धार; मटमैली धार की गर्जना ने बढ़ाई खूबसूरती
