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TCS Employee Monitoring Controversy | Laptop System Performance Tracking


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मुंबई40 मिनट पहले

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कर्मचारियों की मॉनिटरिंग को लेकर देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) विवादों में आ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी अपने कर्मचारियों के लैपटॉप और वर्कस्टेशन पर मॉनिटरिंग टूल्स का इस्तेमाल कर रही है।

हालांकि, टीसीएस का कहना है कि इन टूल्स का मकसद किसी कर्मचारी की व्यक्तिगत गतिविधियों पर नजर रखना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क की ओवरऑल परफॉर्मेंस और सिस्टम सिक्योरिटी को बेहतर बनाना है।

विवाद की मुख्य वजह: व्यक्तिगत एक्टिविटी की ट्रैकिंग

  • विवाद तब शुरू होता है जब ये टूल्स सिस्टम-लेवल की जानकारी से आगे बढ़कर किसी कर्मचारी के निजी काम और एक्टिविटी का डिटेल्ड रिकॉर्ड रखना शुरू कर देते हैं।
  • मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि टीसीएस के टूल्स को एप्लिकेशन-लेवल तक की विजिबिलिटी हासिल है।
  • वहीं दूसरी तरफ टीसीएस ने अपने आधिकारिक बयान में साफ किया है कि उनकी निगरानी सिर्फ मैक्रो-लेवल पर नेटवर्क परफॉर्मेंस तक ही सीमित है और वे व्यक्तिगत कर्मचारी की गतिविधियों को ट्रैक नहीं करते हैं।

मेटा भी झेल चुकी है कर्मचारी मॉनिटरिंग पर आलोचना

कार्यस्थल पर कर्मचारियों की निगरानी यानी वर्कप्लेस मॉनिटरिंग का यह मुद्दा केवल टीसीएस तक सीमित नहीं है। ग्लोबल टेक इंडस्ट्री में पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। दिग्गज टेक कंपनी मेटा को भी अपने एक AI-संबंधित प्रोजेक्ट के दौरान आलोचना का सामना करना पड़ा था।

मेटा ने एक ऐसा सिस्टम पेश किया था जो कर्मचारियों के की-स्ट्रोक्स और माउस एक्टिविटी का डेटा कलेक्ट कर सकता था। बाद में भारी विरोध के चलते मेटा को कर्मचारियों के लिए डेटा कलेक्शन रोकने और छूट मांगने का विकल्प देना पड़ा था।

कानूनी नियम और भविष्य की स्थिति

कर्मचारियों की मॉनिटरिंग का यह मुद्दा अलग-अलग देशों में कानूनी जांच के दायरे में भी आ चुका है। अलग-अलग क्षेत्राधिकारों और देशों में एम्प्लॉई मॉनिटरिंग को लेकर नियम और कड़े कानून काफी अलग-अलग हैं।

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा मुद्दा यही बना हुआ है कि टीसीएस के टूल्स तकनीकी रूप से किस-किस जानकारी तक पहुंच सकते हैं और वास्तविक रूप में उस डेटा का उपयोग किस तरह किया जा रहा है।

मैक्रो-लेवल और एम्प्लॉई-लेवल मॉनिटरिंग में क्या अंतर है?

  • मैक्रो-लेवल मॉनिटरिंग: इसमें सिर्फ यह देखा जाता है कि नेटवर्क पर कितना लोड है, इंटरनेट स्पीड कैसी मिल रही है और कोई साइबर अटैक या तकनीकी खराबी तो नहीं है। इसमें किसी व्यक्ति की निजी फाइल या एक्टिविटी से कोई मतलब नहीं होता।
  • एम्प्लॉई-लेवल मॉनिटरिंग: इसमें कर्मचारी ने कौन सी वेबसाइट खोली, कीबोर्ड पर क्या टाइप किया (कीस्ट्रोक्स), माउस कितनी बार हिलाया और किस एप्लिकेशन पर कितना समय बिताया, इसकी डिटेल ट्रैकिंग की जाती है।

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