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सीएम मान के OSD ने मजीठिया को भेजा मानहानि नोटिस:कहा-अकाली नेता माफी मांगें; 24 घंटे में पोस्ट-वीडियो हटाने को कहा




पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के OSD राजबीर सिंह घुम्मन ने शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। नोटिस में मजीठिया की ओर से लगाए गए आरोपों को झूठा, निराधार और मानहानिकारक बताया गया है। नोटिस के मुताबिक, राजबीर सिंह घुम्मन ने बिक्रम मजीठिया से मांग की है कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों से संबंधित सभी सोशल मीडिया पोस्ट, वीडियो और अन्य सामग्री को 24 घंटे के भीतर हटाया जाए। इसके साथ ही मजीठिया से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की गई है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि मजीठिया भविष्य में इस तरह के आरोप नहीं लगाएंगे, इसकी लिखित गारंटी दें। घुम्मन ने चेतावनी दी है कि अगर मजीठिया निर्धारित समय में माफी नहीं मांगते और संबंधित सामग्री नहीं हटाते हैं, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नोटिस में कार्रवाई के लिए मजीठिया को जिम्मेदार ठहराने की बात कही गई है। मजीठिया के गंभीर आरोप
बिक्रम सिंह मजीठिया ने सोशल मीडिया पर एक कथित ईडी पत्र साझा करते हुए आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन कुछ बिचौलियों के साथ मिलकर राज्य में अधिकारियों के तबादले, हथियारों के लाइसेंस और सरकारी मंजूरियां दिलाने का एक बड़ा सिंडिकेट चला रहे हैं। मजीठिया ने इस मामले में सीधे मुख्यमंत्री भगवंत मान की संलिप्तता का भी दावा किया है। घुम्मन की खुली चुनौती
मुख्यमंत्री के ओएसडी राजबीर सिंह घुम्मन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए मजीठिया को चुनौती दी है कि यदि उनके पास वॉट्सएप चैट या पैसे के लेनदेन का कोई भी पुख्ता सबूत है, तो उसे सार्वजनिक करें। मानहानि के मुकदमे की चेतावनी
घुमन ने स्पष्ट किया है कि यदि मजीठिया अपने आरोपों को साबित करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी होगी, अन्यथा उनके खिलाफ कानूनी तौर पर मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा। तबादलों पर भी दी सफाई
सरकारी नियुक्तियों में हस्तक्षेप के आरोपों पर सफाई देते हुए घुमन ने कहा कि ओएसडी होने के नाते विधायकों और अधिकारियों के अनुरोधों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाना उनका कर्तव्य है, लेकिन तबादलों पर अंतिम फैसला पूरी तरह से मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार होता है। इस राजनीतिक घमासान के बीच विपक्षी दलों (अकाली दल और भाजपा) ने मामले की केंद्रीय एजेंसियों से उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है, जबकि सत्ताधारी आम आदमी पार्टी ने इसे सरकार की छवि धूमिल करने की एक नाकाम कोशिश करार दिया है।



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