सुकमा | बस्तर के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए ग्राम सभाएं अब सामूहिक फैसले लेने लगी हैं। कोंटा ब्लॉक की पोलमपल्ली पंचायत में विशेष ग्राम सभा बुलाई गई। इसमें धर्मांतरण, धार्मिक प्रचार से जुड़े मुद्दों पर प्रस्ताव पारित हुआ। इसके बाद गांव में सार्वजनिक सूचना और चेतावनी बोर्ड लगाया गया। बोर्ड में लिखा है कि ग्राम सभा की पूर्व अनुमति के बिना धार्मिक सभा, प्रचार-प्रसार, धर्मांतरण जैसी गतिविधियां नहीं होंगी। पादरी, पास्टर, मिशनरी संस्थाओं, अन्य धर्म प्रचारकों को गांव में प्रवेश से पहले सूचना देनी होगी। घर-घर प्रचार के लिए भी अनुमति लेना जरूरी होगा। विशेष ग्राम सभा में आदिवासी समाज की पारंपरिक आस्था, रीति-रिवाज, संस्कृति, सामाजिक पहचान को सुरक्षित रखने पर चर्चा हुई। ग्रामीणों ने कहा कि बाहरी धार्मिक प्रचार, गतिविधियों से पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
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धर्म प्रचार करने ग्राम सभा से मंजूरी जरूरी
