झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच करेगी।
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सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिका में परीक्षा रद्द कर नए सिरे से प्रारंभिक परीक्षा आयोजित कराने की मांग की गई है।
बता दें झारखंड हाईकोर्ट ने पहले ही JPSC परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है। गुरुवार को सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से 15 सितंबर तक जवाब मांगा है।
याचिका में CBI जांच की है मांग
याचिकाकर्ता ने पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच CBI से कराने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि अगर CBI जांच नहीं होती है, तो झारखंड से बाहर के किसी हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच कमेटी बनाई जाए और पूरे मामले की जांच कराई जाए।
याचिकाकर्ता ने परीक्षा के संचालन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, OMR शीट की कस्टडी और मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परीक्षा जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता जरूरी है। अगर किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की आशंका है, तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।

OMR कार्बन कॉपी वायरल होने से बढ़ा विवाद
याचिका में परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद सामने आए एक मामले को भी आधार बनाया गया है। दावा किया गया है कि एक सफल अभ्यर्थी की OMR कार्बन कॉपी वायरल हुई थी।
इसमें पहले पेपर में अभ्यर्थी ने 100 में से सिर्फ 48 सवालों के जवाब दिए थे। इसके बावजूद उसे परीक्षा में सफल घोषित किया गया।
याचिकाकर्ता ने इसी मामले के आधार पर पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि OMR शीट के रखरखाव और मूल्यांकन में गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसलिए उन्होंने परीक्षा के रिजल्ट और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

अन्य परीक्षाओं का मामला भी कोर्ट जाएगा
राज्य सरकार ने 22 नियुक्ति परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। वहीं, 23 परीक्षाओं की जांच CID को सौंपने की अधिसूचना जारी की थी। इसके खिलाफ अब अभ्यर्थी कोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
CDPO समेत अन्य परीक्षाओं के अभ्यर्थी भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। उच्च शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन और आंदोलन करना सभी का अधिकार है।
सरकार ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ कभी सख्ती नहीं की। अब JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थी भी धरने पर बैठे हैं, लेकिन उनके खिलाफ भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी।

छात्रों की 5 मांगें, सरकार को अल्टीमेटम
26 दिन तक चले आंदोलन के बाद छात्रों ने सरकार के सामने 5 प्रमुख मांगें रखीं और सरकार को 2 महीने का अल्टीमेटम दिया है। छात्रों ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
- उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के फिजिकल टेस्ट के दौरान मृत अभ्यर्थियों के परिजनों को एक-एक करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग।
- विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों पर दर्ज किए गए केस वापस लिए जाएं।
- परीक्षा सुधार को लेकर अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में गठित कमेटी में छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
- जेएसएससी पीजीटी, नगर पालिका, माध्यमिक आचार्य, लैब असिस्टेंट और एक्साइज कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द कर नए सिरे से कराया जाए।
- सीआईडी जांच के मामले में सरकार से जल्द याचिका दायर कर कोर्ट में मजबूती से पक्ष रखे।
