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PGI में हड्डियों की मजबूती जांचने वाली डेक्सा स्कैन (DEXA Scan) मशीन पिछले करीब एक महीने से खराब पड़ी है। इसके चलते ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों की कमजोरी से जूझ रहे मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। PGI में जिस जांच के लिए मरीजों को करीब 500 रुपए खर्च करने
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दूर-दराज से इलाज के लिए PGI पहुंचने वाले मरीजों के सामने अब दो विकल्प हैं। वे या तो मशीन के ठीक होने का इंतजार करें या फिर मजबूरी में निजी लैब से महंगी जांच करवाएं। मरीजों का कहना है कि PGI में कम खर्च में बेहतर इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन जांच की सुविधा बंद होने से उनकी परेशानी और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ गए हैं।
एंडोक्राइनोलॉजी और आर्थोपेडिक्स के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित
PGI के एंडोक्राइनोलॉजी और आर्थोपेडिक्स विभाग में रोजाना बड़ी संख्या में ऑस्टियोपोरोसिस और कमजोर हड्डियों से संबंधित मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे मरीजों में हड्डियों की मजबूती और बीमारी की स्थिति का पता लगाने के लिए DEXA स्कैन महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है।
मरीजों और तीमारदारों का कहना है कि PGI में कम खर्च में यह जांच उपलब्ध होने के कारण वे यहां आते हैं। मशीन खराब होने के बाद उन्हें निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है, जहां इसी जांच के लिए कई गुना अधिक रकम चुकानी पड़ रही है।
क्या है DEXA स्कैन?
DEXA यानी डुअल-एनर्जी एक्स-रे एब्जॉर्प्टियोमेट्री एक विशेष एक्स-रे जांच है, जिससे हड्डियों के घनत्व और उनमें मौजूद खनिज सामग्री को मापा जाता है। इसके जरिए यह पता लगाने में मदद मिलती है कि हड्डियां कितनी मजबूत या कमजोर हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कितना है।
इस जांच में खास तौर पर कूल्हे और रीढ़ की हड्डी की जांच की जाती है। इससे डॉक्टरों को बीमारी की गंभीरता समझने और इलाज तय करने में मदद मिलती है। समय पर जांच नहीं होने पर कमजोर हड्डियों वाले मरीजों में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है।
फिलहाल मरीजों ने PGI प्रशासन से DEXA स्कैन की सुविधा जल्द बहाल करने की मांग की है। मशीन खराब होने को लेकर PGI प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
