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सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को:रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण, लेकिन भारत में नहीं दिखेगा; जानिए सावन पूर्णिमा पर कौन-कौन से शुभ काम करें




सावन पूर्णिमा यानी रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त को है। श्रावण पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त सुबह करीब 9.10 बजे शुरू होगी और 28 अगस्त सुबह करीब 9.49 बजे तक रहेगी। 28 अगस्त को सूर्योदय पूर्णिमा तिथि में होने से स्नान-दान और रक्षाबंधन इसी दिन मान्य रहेगा। इस दिन चंद्र ग्रहण भी होगा, लेकिन यह ग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, इस कारण इसका सूतक भी नहीं रहेगा। पूरे दिन सभी धर्म-कर्म बिना किसी बाधा के किए जा सकेंगे। सावन पूर्णिमा पर सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। घर के मंदिर की सफाई करें। दीपक जलाएं। भगवान शिव, माता पार्वती और अपने इष्ट देव की पूजा करें। शिवलिंग पर स्वच्छ जल और दूध अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं। सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल, धन, जूते-चप्पल का दान करें। भगवान शिव को जल अर्पित करते समय मन को शांत रखें पूजा में ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करें। शिव चालीसा या रुद्राष्टक का पाठ भी कर सकते हैं। रक्षाबंधन पर परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर पूजा करेंगे तो बहुत शुभ रहेगा। पूजा के बाद घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना चाहिए। परिवार के सदस्यों को रक्षा सूत्र बांधें। अपने इष्टदेव को भी रक्षा सूत्र अर्पित करें। राखी बांधने की पारंपरिक विधि में भाई को आसन पर बैठाकर उसके माथे पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाया जाता है। इसके बाद अक्षत यानी चावल लगाए जाते हैं, आरती उतारी जाती है और दाएं हाथ की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है। अंत में मिठाई खिलाकर भाई-बहन एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं। भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके प्रति स्नेह व्यक्त करता है। इस बार 28 अगस्त की सुबह सूर्योदय से पहले भद्रा समाप्त हो चुकी होगी। इसलिए पूरे दिन रक्षाबंधन मनाया जा सकेगा। रक्षाबंधन से जुड़ी कई पौराणिक मान्यताएं प्रचलित हैं। इनमें भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा सबसे अधिक प्रसिद्ध है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपने वस्त्र का एक हिस्सा फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। इसे भाई-बहन के स्नेह और रक्षा के भाव से जोड़ा जाता है। एक अन्य प्रसिद्ध कथा राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु राजा बलि को दिए वचन के कारण उनके साथ रहने लगे थे। तब माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षा सूत्र बांधकर भाई बनाया और उपहार में भगवान विष्णु को अपने साथ ले जाने की इच्छा व्यक्त की। राजा बलि ने उनकी बात स्वीकार कर ली। इसके बाद भगवान विष्णु माता लक्ष्मी के साथ अपने धाम वैकुंठ लौट आए। 28 अगस्त को आंशिक चंद्र ग्रहण भी लगेगा, लेकिन यह भारत में दिखाई नहीं देगा। चंद्र ग्रहण का उपच्छाया चरण भारतीय समयानुसार सुबह करीब 6.53 बजे शुरू होगा, जबकि आंशिक चरण करीब 8.04 बजे शुरू होकर लगभग 11:22 बजे तक रहेगा। ग्रहण के दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहेगा, इसलिए इसे देश से प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा जा सकेगा। ग्रहण यूरोप, पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तर और दक्षिण अमेरिका सहित दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। खगोलीय गणना के अनुसार पृथ्वी की गहरी छाया चंद्रमा के बड़े हिस्से पर पड़ेगी, इसलिए जिन क्षेत्रों में यह दिखाई देगा वहां ग्रहण काफी स्पष्ट नजर आ सकता है। धार्मिक परंपराओं में सूतक की मान्यता आमतौर पर दिखाई देने वाले ग्रहण से जोड़ी जाती है। चूंकि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। इसका मतलब है कि रक्षाबंधन के दिन पूजा-पाठ, स्नान-दान और अन्य धार्मिक कार्य सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।



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