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Chillupar Assembly Seat: BSP Names Asmita Chand; Election 2027 Strategy


2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा ने गोरखपुर-बस्ती मंडल की 41 विधानसभा सीटों में पहली सीट पर अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। गोरखपुर की चिल्लूपार विधानसभा सीट से अस्मिता चंद को प्रभारी और प्रत्याशी बनाया गया है।

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चंद परिवार की बहू अस्मिता के बसपा में आने से चिल्लूपार की सियासत में नए समीकरण बनने लगे हैं। लंबे समय से भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहीं अस्मिता अब भाजपा के खिलाफ बसपा के टिकट पर मैदान में उतरेंगी।

अस्मिता चंद को टिकट मिलने के बाद बसपा कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है।

अस्मिता चंद को टिकट मिलने के बाद बसपा कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह है।

दो दशक से क्षेत्र में सक्रिय, भाजपा में नहीं मिला टिकट

अस्मिता चंद पिछले दो दशक से अधिक समय से चिल्लूपार क्षेत्र में सक्रिय हैं। लंबे समय से भाजपा से टिकट की दावेदारी करती रही हैं। उनके समर्थकों के मुताबिक 2022 के चुनाव में उन्हें टिकट को लेकर आश्वासन भी मिला था, लेकिन इस बार भी उम्मीद पूरी नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया।

बसपा ने उन्हें 2027 के लिए प्रत्याशी घोषित कर दिया है। उनके दो पुत्र और एक पुत्री हैं।

चंद परिवार का चिल्लूपार में प्रभाव, समझिए

अस्मिता चंद का चंद परिवार चिल्लूपार क्षेत्र में प्रभावशाली माना जाता है। उनके ससुर स्व. राजनारायण चंद ब्लॉक प्रमुख रहे हैं। उनके ससुर के बड़े भाई मारकंडेय चंद प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। जेठ रणविजय चंद जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन रहे हैं।

मारकंडेय चंद के बेटे सीपी चंद लगातार दूसरी बार गोरखपुर-महराजगंज स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी हैं। हालांकि, अब परिवार की राजनीतिक राहें अलग-अलग हैं। सीपी चंद भाजपा के साथ हैं, जबकि अस्मिता चंद बसपा में हैं।

बसपा के सभी मोर्चों के नेता भी अपना समर्थन जताने वहां पहुंचे थे।

बसपा के सभी मोर्चों के नेता भी अपना समर्थन जताने वहां पहुंचे थे।

2007 में ससुर के खिलाफ निर्दल लड़ी थीं चुनाव

2007 में चंद परिवार के प्रभाव वाला क्षेत्र धुरियापार विधानसभा में आता था। उस समय अस्मिता चंद ने भाजपा टिकट के लिए दावेदारी की थी, लेकिन टिकट उनके ससुर मारकंडेय चंद को मिला। इसके बाद अस्मिता निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतर गई थीं।

उस चुनाव में सपा के राजेंद्र सिंह उर्फ पहलवान सिंह विजयी हुए थे। बसपा के लाल अमीन खान उर्फ लाल शाही दूसरे स्थान पर रहे। मारकंडेय चंद तीसरे और अस्मिता चंद चौथे स्थान पर थीं। मारकंडेय चंद को 27,686 और अस्मिता चंद को 7,723 वोट मिले थे।

चंद परिवार में पहले भी दिखा राजनीतिक बंटवारा

चंद परिवार की राजनीतिक राहें पहले भी अलग-अलग रही हैं। 2012 में सीपी चंद चिल्लूपार से सपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़े थे, जबकि अस्मिता भाजपा में थीं। सीपी चंद को 25.23% वोट मिले और वह दूसरे स्थान पर रहे थे। राजेश त्रिपाठी बसपा के टिकट पर 30.81% वोट के साथ चुनाव जीते थे।

2016 में सीपी चंद पहली बार सपा के टिकट पर एमएलसी चुने गए। बाद में वह भाजपा में शामिल हुए और वर्तमान में भाजपा के एमएलसी हैं। वहीं, अस्मिता चंद भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश उपाध्यक्ष तक रहीं।

तिवारी परिवार अभी भी सबसे बड़ी चुनौती

चिल्लूपार विधानसभा सीट लंबे समय तक पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के प्रभाव वाली रही है। वह यहां से पांच बार विधायक रहे। उनके छोटे बेटे विनय शंकर तिवारी भी 2017 में बसपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे।

2022 में विनय शंकर तिवारी सपा के टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। इस बार भी उनकी दावेदारी मानी जा रही है। ऐसे में अस्मिता चंद के बसपा प्रत्याशी बनने के बाद तिवारी परिवार के सामने चुनौती बढ़ सकती है।

भाजपा से अलग होने के बाद अस्मिता चंद ने क्षेत्र में अपना दौरा बढ़ा दिया है।

भाजपा से अलग होने के बाद अस्मिता चंद ने क्षेत्र में अपना दौरा बढ़ा दिया है।

अस्मिता के मैदान में आने से त्रिकोणीय मुकाबले के आसार

अस्मिता चंद के चुनाव मैदान में आने से चिल्लूपार में मुकाबला त्रिकोणीय होने के आसार हैं। क्षेत्र में बसपा का अपना वोट बैंक है। दलित मतदाताओं की संख्या भी करीब एक लाख बताई जा रही है। इसके अलावा क्षेत्र में क्षत्रिय मतदाताओं की संख्या भी अच्छी है।

अस्मिता की लंबे समय से क्षेत्र में सक्रियता और चंद परिवार के प्रभाव को बसपा अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश करेगी। दूसरी ओर भाजपा से लंबे समय तक जुड़ी रहीं अस्मिता के अब बसपा के टिकट पर मैदान में उतरने से भाजपा के समीकरण भी प्रभावित हो सकते हैं।

लंबे समय तक भाजपा में रहने के बाद भी टिकट न मिलने को अस्मिता चंद वादा खिलाफी बता रही हैं और इस बात से सहानुभूति पाने की कोशिश भी कर रही हैं।

लंबे समय तक भाजपा में रहने के बाद भी टिकट न मिलने को अस्मिता चंद वादा खिलाफी बता रही हैं और इस बात से सहानुभूति पाने की कोशिश भी कर रही हैं।

भाजपा और सपा को बदलनी पड़ सकती है रणनीति

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक अस्मिता चंद के आने से बसपा को एक सक्रिय और चर्चित चेहरा मिल गया है। इससे भाजपा और सपा दोनों के लिए चुनावी रणनीति को नए सिरे से तैयार करने की जरूरत पड़ सकती है।

वरिष्ठ पत्रकार आलोक दूबे के मुताबिक गोला के कार्यकर्ता सम्मेलन में अस्मिता चंद की ओर से जुटाई गई भीड़ ने संकेत दिया है कि चिल्लूपार में इस बार मुकाबला कड़ा हो सकता है। क्षेत्र में भाजपा विधायक से नाराज खेमा भी अस्मिता की ताकत बढ़ा सकता है।

कुल मिलाकर चिल्लूपार में बसपा के नए चेहरे के साथ चुनावी समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं। अब भाजपा, सपा और बसपा तीनों के संभावित उम्मीदवारों के बीच मुकाबला किस दिशा में जाता है, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा।



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