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उम्र को महज एक आंकड़ा मानते हुए जिले के दो बुजुर्ग धावक अब देश की सबसे चुनौतीपूर्ण मैराथनों में से एक, लद्दाख मैराथन की कठिन परीक्षा के लिए तैयार हैं। 58 वर्षीय संतोष साहू और 70 वर्षीय सेवानिवृत्त शिक्षक ज्वाला प्रसाद शर्मा अपनी उम्र को पीछे छोड़कर 13 सितंबर को लद्दाख की ऊंची, दुर्गम वादियों में फुल मैराथन दौड़ेंगे। दोनों धावक इस प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ और कोंडागांव का प्रतिनिधित्व करेंगे। पेशे से मैकेनिक संतोष साहू, जिन्हें लोग प्यार से संतु के नाम से जानते हैं, इससे पहले भी कई दौड़ प्रतियोगिताओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। अंडमान में आयोजित 10 किलोमीटर मैराथन में उन्होंने नंगे पैर समुद्र किनारे दौड़ लगाते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया था। अब उनकी नजर लद्दाख की चुनौती पर है। यहां सांस लेना भी चुनौती- लद्दाख मैराथन समुद्र तल से करीब 11,500 फीट से अधिक की ऊंचाई पर आयोजित होती है। यहां कम ऑक्सीजन, पथरीले रास्ते, ठंड, बदलता मौसम धावकों की शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक दृढ़ता की भी परीक्षा लेते हैं। ऐसे कठिन हालात में 42.195 किलोमीटर की फुल मैराथन पूरी करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि होगी। अपनी उम्र को लेकर संतोष साहू कहते हैं, इसी उम्र में ही तो करना है। उनका संदेश युवाओं के लिए भी स्पष्ट है—नशे से दूर रहें। उम्र को बहाना न बनाएं। रोज कम से कम एक किलोमीटर दौड़ने की आदत डालें। उनका कहना है कि शरीर भी एक इंजन की तरह है। इसे रोज चलाना जरूरी है। 4 सितंबर को रवाना होंगे संतोष- संतोष साहू ने बताया कि उनकी फुल मैराथन 13 सितंबर को होगी। इसके लिए वे 4 सितंबर को कोंडागांव से रवाना होंगे। लद्दाख पहुंचने के बाद करीब एक सप्ताह वहां रहेंगे। शरीर को ऊंचाई और वहां के मौसम के अनुकूल ढालेंगे। 70 वर्षीय ज्वाला प्रसाद शर्मा का जज्बा भी युवाओं के लिए मिसाल है।
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कोंडागांव के धावक:भाग मिल्खा भाग फिल्म देख दो बुजुर्ग लद्दाख मैराथन में दौड़ लगाने तैयार
