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गुरुग्राम के जलभराव पर AI गानों से डिजिटल ट्रोलिंग:गुड़गांव तू तो डूब गया है…ओला-उबर भी रूठ गया, जिम्मेदारी जीएमडीए की, टारगेट पर नगर-निगम




साइबर सिटी और मिलेनियम सिटी जैसे हाईटेक नामों से मशहूर गुरुग्राम में मानसून की बारिश आते ही प्रशासनिक दावों की पोल खुल जाती है। हर साल की तरह इस बार भी बारिश के बाद शहर के जो हालात हुए हैं, उसने आम जनता को बेहाल कर दिया है। जलभराव से नाराज लोग अब सरकार, प्रशासन और लापरवाह अधिकारियों को घेरने के लिए डिजिटल ट्रोलिंग का सहारा ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर एक अनोखा ट्रेंड चल रहा है, जहां यूजर्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ऐप्स का इस्तेमाल करके मजेदार सॉन्ग बना रहे हैं। जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर जलभराव को लेकर बनाए गए एआई सॉन्ग्स तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन गानों के जरिए जिला प्रशासन, महानगर विकास प्राधिकरण और नगर निगम का मजाक बनाया जा रहा है। सिस्टम की नाकामियों पर सवाल: “गुड़गांव तू तो डूब गया है, ओला-उबर भी रूठ गया है,””सड़कें बनी हैं दरिया सारी, ये है मिलेनियम सिटी हमारी,””250 करोड़ के फ्लैट बिके जहां, बारिश आई तो नाव चाहिए वहां,””ये है गुड़गांव की हकीकत ऐसी, जिसे हर किसी को माननी पड़ेगी।” इस तरह के गाने सोशल मीडिया पर जमकर शेयर किए जा रहे हैं। लोग इन गानों के बैकग्राउंड में जलमग्न सड़कें, तैरती हुई चमचमाती कार और पानी के बीच फंसे ऑफिस जाने वाले आईटी प्रोफेशनल्स, स्कूली बच्चे और आम लोगों के वीडियो लगा रहे हैं। 250 करोड़ के फ्लैट और जमीनी हकीकत
ट्रोलिंग का सबसे बड़ा विषय लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट बना हुआ है। हाल ही में शहर के कुछ पॉश इलाकों में करोड़ों रुपये के महंगे अपार्टमेंट्स और विला की बिक्री की खबरें आई थीं। एआई गानों में इसी बात पर चुटकी ली जा रही है कि जिन सोसायटियों में लोग 250 करोड़ रुपये के फ्लैट खरीद रहे हैं, वहां पहली ही बारिश में बाहर निकलने के लिए लग्जरी कारों की जगह नाव की जरूरत पड़ रही है। यूजर्स लिख रहे हैं कि बिल्डर्स को अब फ्लैट के साथ एक लाइफ जैकेट और नाव मुफ्त देनी चाहिए। ओला-उबर का रूठना और जनता का दर्द
सड़कों पर पानी भरने की वजह से शहर की लाइफलाइन माने जाने वाले कैब और ऑटो ड्राइवर्स ने कुछ इलाकों में जाने से मना कर दिया है। ‘ओला-उबर भी रूठ गया है’ वाले बोल इसी जमीनी हकीकत को बयां करते हैं। ऑफिस जाने वाले लोग घंटों ऐप पर राइड ढूंढते रहते हैं, लेकिन भारी जाम और गहरे सिंकहोल्स के डर से कोई भी कैब चालक उस तरफ जाने को तैयार नहीं होता। प्रशासन की हो रही है किरकिरी
यह डिजिटल ट्रोलिंग इस बात का पता चलता है कि अब जनता खोखले दावों से थक चुकी है। हर साल करोड़ों रुपये ड्रेनेज सफाई के नाम पर खर्च होते हैं, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात रहता है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि सरकार कब तक इसे ‘कांग्रेस काल की गलती’ या बैंड-एड कहकर पल्ला झाड़ती रहेगी। फिलहाल, ये एआई गाने और मीम्स पूरे देश में गुरुग्राम की साख पर बट्टा लगा रहे हैं और प्रशासन के पास इसका कोई जवाब नहीं है। जिम्मेदारी जीएमडीए की, टारगेट पर नगर निगम
दरअसल इस बारिश में सबसे बुरा हाल जीएमडीए और एनएचएआई के अंतर्गत आने वाले इलाकों में ज्यादा जलभराव देखने को मिल रहा है। खासकर सोहना रोड, सुभाष चौक, सेक्टर-15 अंडरपास, राजीव चौक, बजघेड़ा अंडरपास आदि बड़े हॉटस्पॉट जीएमडीए और एनएचएआई के पास है। नगर निगम के अंतर्गत शहर के अंदरूनी हिस्से हैं, जहां अधिकतर जगहों पर बारिश के कुछ समय बाद पानी निकल जाता है, लेकिन नगर-निगम को सबसे ज्यादा ट्रोल किया जा रहा है।



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