Headlines

दुर्ग में कोटवारी जमीन बेचने वालों पर कलेक्टर की सख्ती:51 गांवों में 107 खसरों की जांच, रजिस्ट्री रद्द कराने दायर किए गए 73 केस




दुर्ग जिले में कोटवारी भूमि बेचने वाले कोटवारों पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर इन जमीनों की बिक्री निरस्त कराने और संबंधित कोटवारों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। यह भूमि ग्राम सेवक के रूप में सेवा करने की शर्त पर आवंटित की जाती है। प्रारंभिक जांच में जिले की छह तहसीलों के 51 गांवों में कोटवारी भूमि का अवैध विक्रय पाया गया है। कुल 107 खसरों की लगभग 115.71 एकड़ (46.827 हेक्टेयर) भूमि बिक्री की जद में आई है। इन जमीनों की बिक्री को नियम विरुद्ध मानते हुए प्रशासन ने रजिस्ट्री शून्य कराने के लिए 73 सिविल वाद दायर किए हैं। दुर्ग जिले में कोटवारी जमीन की बिक्री का मामला जांच के दौरान दुर्ग तहसील के 16 गांवों में 13.997 हेक्टेयर, धमधा के 5 गांवों में 5.760 हेक्टेयर, पाटन के 17 गांवों में 10.73 हेक्टेयर, भिलाई-3 के 3 गांवों में 5.610 हेक्टेयर, बोरी के एक गांव में 0.280 हेक्टेयर और अहिवारा के 9 गांवों में 10.450 हेक्टेयर कोटवारी भूमि के विक्रय के मामले सामने आए हैं। कोटवारी जमीन बेचने वाले 29 कोटवारों पर कार्रवाई जमीन बेचने वाले 29 कोटवार अभी भी अपने पद पर हैं। इनके खिलाफ संबंधित राजस्व न्यायालयों में अनुशासनात्मक मामले दर्ज किए गए हैं। सभी को कारण बताओ नोटिस जारी कर सुनवाई शुरू कर दी गई है। सुनवाई पूरी होने के बाद नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने भविष्य में ऐसी भूमि की अवैध बिक्री रोकने के लिए भी कदम उठाए हैं। वर्तमान में कोटवारों को आवंटित सभी सेवा भूमि के खसरा नंबरों को पंजीयन विभाग के सॉफ्टवेयर में ब्लॉक कर दिया गया है। इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी भूमि की रजिस्ट्री को रोकना है। कानून में बिक्री पर स्पष्ट रोक छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 की धारा 183 में ग्राम सेवक की सेवा भूमि के संबंध में स्पष्ट प्रावधान है। इसके तहत सेवा भूमि में अपने हित को विक्रय, दान, बंधक या अन्य तरीके से निर्धारित अवधि से परे हस्तांतरित करने का प्रयास किया जाता है तो ऐसा संव्यवहार शून्य माना जाता है। कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशों के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह ने इन मामलों की लगातार समीक्षा की। उन्होंने संबंधित तहसीलदारों को बिक्री निरस्त कराने के लिए सिविल वाद दायर करने और भूमि बेचने वाले कोटवारों के खिलाफ नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रशासन अब लंबित मामलों में सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *