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पूर्व विधायक महेंद्र-शास्त्री का 95 साल की उम्र में निधन:1985 में मुंडावर से विधायक रहे थे, कांग्रेस के 'भीष्म पितामह' के रूप में थी पहचान




अलवर के दिग्गज नेता, कवि एवं साहित्यकार पूर्व विधायक महेंद्र शास्त्री का 95 वर्ष की उम्र में गुरुवार सुबह 4 बजे भूरा सिद्ध धाम में निधन हो गया। वह लंबे समय से अलवर के मोती डूंगरी स्थित निवास पर रह रहे थे। आज शाम 4 बजे भूरा सिद्ध में उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी। लंबे समय तक राजनीति में सक्रिय रहे महेंद्र शास्त्री ने 1985 लोकदल के टिकट पर मुंडावर विधानसभा सीट से चुनाव जीता था। इस दौरान उन्होंंने 25,520 मत प्राप्त कर कांग्रेस प्रत्याशी जसवंत सिंह को 2,224 मतों से हराया था। शास्त्री 80 साल की उम्र तक सक्रिय राजनीति में रहे और क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाई। वह अपने प्रखर वाक् कौशल और जनसंपर्क के लिए जाने जाते थे। शास्त्री का परिवार भी जनसेवा में सक्रिय रहा है। उनके बेटे लंबे समय तक अलवर सहकारिता क्षेत्र में अध्यक्ष पद पर रहे। राजनीति को लेकर उनकी पकड़ अच्छी रही है। कब कहां किसी पार्टी में बड़ा फेरबदल हो सकता है। यह शास्त्री अपने समय में अच्छे से समझ जाते थे। इस कारण दूसरे नेता भी उनसे मार्गदर्शन लेते रहे हैं। कांग्रेस के ‘भीष्म पितामह’ के रूप में थी पहचान महेंद्र शास्त्री की पहचान कांग्रेस के पुराने और गहरे जानकार नेताओं में होती थी। पार्टी के भीतर उन्हें वरिष्ठ मार्गदर्शक और ‘भीष्म पितामह’ के रूप में सम्मान मिलता था। शास्त्री अपने बेबाक और स्पष्ट अंदाज के लिए भी जाने जाते थे। उनके बारे में कहा जाता था कि उनकी बोली सटीक थी और जो बात बोल देते थे, उस पर कायम रहते थे। उन्होंने यादों की महक, चलते – चलते कहा आ गए, मानव मन अकथ कहानी सहित कई किताबें भी लिखी। सहकारिता के क्षेत्र में योगदान के चलते उन्हें सहकारितारत्न के सम्मान से भी नवाजा गया था।



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