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रोहतक कोर्ट ने दो बार विधायक रहे बलवीर सिंह उर्फ बाली पहलवान को मर्डर केस में कठोर उम्रकैद की सजा सुनाई है। बाली समेत 7 लोगों को एक दिन पहले ही कोर्ट ने दोषी ठहराया था। यह फैसला मई 2011 को कलानौर अनाज मंडी में आढ़ती विष्णु निगाना मर्डर केस में आया है। बाली इस केस में सात साल तक जेल में भी रहा। लंच टाइम के बाद अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एएसजे) कपिल राठी की कोर्ट ने सजा सुनाई। बुधवार को बाली के अलावा कोर्ट ने सुनील, पवन, सुनील उर्फ सोलर, राजेश, दिनेश उर्फ काला और मुकेश को भी दोषी ठहराया था। जबकि दिनेश, राजेंद्र, सत्येंद्र, फूल कुमार, कुलदीप, परमजीत, सतीश और रविंद्र को सबूतों के अभाव में बरी किया गया। बता दें कि साल 2011 में पूर्व विधायक की गिरफ्तारी रोकने के लिए हजारों समर्थक जुट गए थे। कई दिन तक पुलिस हिम्मत नहीं जुटा पाई थी। महिलाओं ने बंदूकें तक उठा ली थी। तीन सप्ताह बाद बाली भारी भीड़ के साथ सरेंडर करने पहुंचा था। बाली 1996 में महम हलके से समता पार्टी और 2000 में इनेलो के टिकट पर दो बार विधायक रहा है। जानिए वो केस…जिसमें बाली को उम्रकैद हुई कलानौर अनाज मंडी में 6 मई को मर्डर: पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 6 मई 2011 को कलानौर की अनाज मंडी में दो पक्षों के बीच विवाद हुआ। इस दौरान निगाना निवासी विष्णु की गोली लगने से मौत हुई थी। विष्णु के रिश्तेदार एवं बसाना के पूर्व सरपंच सीताराम राठी की शिकायत पर FIR दर्ज हुई। इसमें पूर्व विधायक बाली पहलवान समेत 18 लोगों को नामजद किया गया। विवाद की 2 वजह सामने आई थी: जिस विवाद में मर्डर हुआ, उसको लेकर दो तरह की रिपोर्ट सामने आईं थी। पहली ये कि बाली पहलवान के कुछ साथी मंडी में पशु चारा लेने/चंदा मांगने पहुंचे थे। वहां उनकी बसाना के तत्कालीन सरपंच और आढ़ती सीताराम राठी से कहासुनी हो गई।दूसरी रिपोर्ट कहती है कि बाली के साथियों पर सीताराम राठी से 5 लाख रुपए की कथित प्रोटेक्शन मनी मांगने का आरोप लगा था। विरोध करने पर सीताराम और उनके साले विनोद से हाथापाई हुई। इसके बाद फायरिंग शुरू हो गई। गोलीबारी में सीताराम के साले निगाना निवासी विष्णु की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। बाली को पकड़ना चुनौती थीः उस वक्त हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी। यह पूरा मामला रोहतक से ही जुड़ा था। विष्णु हत्याकांड में नामजद होने के बाद बाली पहलवान की गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बन गई थी। बाली के समर्थन में ग्रामीणों ने मोर्चा संभाल लिया था और मोखरा स्थित उनके घर पर 100 से ज्यादा लोग पहरा दे रहे थे। महिलाएं भी बंदूकें थामी नजर आती थी। 3 सप्ताह बाद खुद सरेंडर कियाः करीब तीन हफ्ते बाद बाली ने 27 मई को कोर्ट में सरेंडर किया। उस दिन भी बाली के साथ काफी भीड़ आई थी। गाड़ी की छत पर खड़े होकर बाली ने भाषण दिया और खुद को निर्दोष बताया। हालांकि बाद में करीब 7 साल बाद जमानत मिली थी। जेल से छूटने के बाद समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया था।
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मर्डर केस में पूर्व MLA को उम्रकैद की सजा:रोहतक कोर्ट का 15 साल पुराने केस में फैसला; मंडी में आढ़ती को गोली मारी थी
