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राजस्थान में निकाय चुनाव में पार्षद पदों के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी के साथ प्रत्याशियों की नजर चुनाव चिह्न पर टिक गई है। भाजपा-कांग्रेस जैसी पार्टी के उम्मीदवारों को तो कमल और हाथ जैसे पहचान वाले सिंबल मिलेंगे। लेकिन निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए चिमटा, चारपाई, चक्की, केतली, ट्रक, पानी की टंकी, हरी मिर्च, जुराबें, ईंट जैसे पहले से तय सिंबल में से ही आवंटित होंगे। क्या निर्दलीय उम्मीदवार अपनी पसंद का चुनाव चिह्न ले सकता है? एक ही सिंबल की कई प्रत्याशी मांग करें तो आयोग कैसे तय करता है? आखिर चुनाव चिह्न ‘पतंग’ को लेकर क्यों हाईकोर्ट पहुंची असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी? आज के राजस्थान एक्सप्लेनर में जानेंगे ऐसे ही सवालों के जवाब… सवाल 1: राजस्थान के निकाय चुनाव में चुनाव चिह्न कब और कैसे मिलेंगे? जवाबः राजस्थान में 309 नगरीय निकायों के चुनाव के लिए 27 अगस्त से नामांकन शुरू हो गए हैं। नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न आवंटित करेगा। 4 सितंबर को उम्मीदवारों को सिंबल मिलने हैं। चुनाव चिह्न दो तरह के होते हैं- रिजर्व और फ्री। रिजर्व चुनाव चिह्न : किसी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के लिए तय होता है। जैसे- BJP का कमल, कांग्रेस का हाथ और आम आदमी पार्टी का झाड़ू। ऐसे दल के अधिकृत प्रत्याशी को वही पार्टी सिंबल मिलता है। कोई निर्दलीय उम्मीदवार उस चुनाव चिह्न की मांग करके उसे नहीं ले सकता। मुक्त यानी फ्री सिंबल : ये किसी एक पार्टी के लिए आरक्षित नहीं होते। इन्हीं में से निर्दलीय प्रत्याशियों को चुनाव चिह्न दिए जाते हैं। राजस्थान नगरपालिका चुनाव नियमों के मुताबिक आयोग चुनाव चिह्नों की सूची तय करता है। प्रत्याशी अपनी पसंद बताते हैं और रिटर्निंग ऑफिसर उपलब्धता के आधार पर सिंबल आवंटित करते हैं। सवाल-2 : इस बार निर्दलीय उम्मीदवारों के लिए कौन-कौन से रोचक सिंबल हैं? जवाबः आयोग ने नगर निकाय प्रमुख और पार्षदों के 40-40 सिंबल की लिस्ट जारी की है। जैसे- नगरपालिका अध्यक्ष पद के लिए प्रेस, कटहल, केतली, कुंडी, लेटर बॉक्स, माचिस की डिब्बी जैसे सिंबल शामिल हैं। इसी तरह वार्ड पार्षद के चुनाव में भी चक्की, चारपाई, चप्पल, जूता, कैंची, सिलाई मशीन, हारमोनियम जैसे 40 सिंबल शामिल हैं। यही चुनाव चिह्न स्थानीय चुनावों को विधानसभा और लोकसभा चुनाव से अलग भी बनाते हैं। सवाल-3 : आखिर चुनाव चिह्न में चिमटा, चप्पल, चक्की जैसी चीजें ही क्यों रखी जाती हैं? जवाबः इसकी सबसे बड़ी वजह है- आसानी से पहचान में आना। स्थानीय चुनावों में प्रत्याशियों की संख्या कई बार ज्यादा होती है। एक ही वार्ड में कई निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में उतर सकते हैं। ऐसे में हर उम्मीदवार को अलग और आसानी से पहचाने जाने वाला चिह्न देना जरूरी है। चुनाव चिह्न का मकसद ही मतदाता को उम्मीदवार की पहचान आसान बनाना है। इसलिए ऐसे प्रतीक चुने जाते हैं, जिन्हें लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में देखते हैं। चिमटा, चक्की, चारपाई, केतली, जूता, ट्रक या पानी की टंकी- इनकी तस्वीर देखते ही मतदाता पहचान सकता है कि किस उम्मीदवार का निशान क्या है। इसी वजह से चुनाव आयोग के सिंबल में रोजमर्रा की वस्तुओं के साथ फल, सब्जियां, औजार और दूसरी आसानी से पहचानी जाने वाली चीजें भी दिखाई देती हैं। सवाल 4: अगर दो उम्मीदवारों को एक ही चुनाव चिह्न चाहिए तो किसे मिलेगा? जवाबः नियम के मुताबिक ऐसे मामलों में लॉटरी या कंप्यूटरीकृत ड्रॉ से तय किया जा सकता है कि वह सिंबल किस प्रत्याशी को मिलेगा। मान लीजिए किसी वार्ड में तीन निर्दलीय प्रत्याशियों ने ‘चारपाई’ को पहली पसंद बताया…तो चारपाई चिह्न तीनों को नहीं मिल सकता। राजस्थान नगरपालिका चुनाव नियमों के मुताबिक रिटर्निंग ऑफिसर प्रत्याशियों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग चुनाव चिह्न आवंटित करते हैं। अगर एक ही सिंबल के लिए एक से ज्यादा उम्मीदवार दावा करें तो लॉटरी/कंप्यूटरीकृत ड्रॉ से तय किया जा सकता है कि सिंबल किसे मिलेगा। मतलब…अंतिम फैसला चुनाव अधिकारी का ही होता है। दरअसल, स्थानीय चुनावों में निर्दलीयों के लिए सिंबल पहचान बनाने का एक जरिया होता है। इसकी जरूरत तब सबसे ज्यादा होती है जब उम्मीदवार नया हो, बागी हो, वार्ड में कई निर्दलीय खड़े हों या वोटर उसे व्यक्तिगत रूप से न पहचानते हों। ऐसी स्थिति में उम्मीदवार का नाम याद रखने के बजाय उसका चुनाव चिह्न याद रखना कहीं ज्यादा आसान हो जाता है। यही वजह है कि सिंबल मिलते ही ‘मुझे वोट दीजिए’ की जगह उन्हें मिले चुनाव चिह्न पर वोट देने की अपीलें होने लगती हैं। सवाल 5: क्या निर्दलीय उम्मीदवार कमल, हाथ या झाड़ू जैसे पार्टी सिंबल मांग सकता है? जवाबः नहीं, मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के लिए आरक्षित सिंबल सिर्फ उसी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी को मिलता है। सवाल 6 : सिंबल को लेकर हाईकोर्ट क्यों पहुंची असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी? जवाब: निकाय चुनावों के बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। AIMIM के प्रदेश अध्यक्ष जमील खान ने रिट याचिका दायर कर पार्टी को उसका निर्धारित ‘पतंग’ चुनाव चिह्न आवंटित करने की मांग की है। मामले में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई हुई। कोर्ट ने अगली सुनवाई और फैसला सुनाने के लिए 31 अगस्त की तारीख तय की है। अब 31 अगस्त का फैसला इसलिए अहम है, क्योंकि इसके बाद साफ होगा कि निकाय चुनाव में AIMIM अपने ‘पतंग’ सिंबल के साथ मैदान में उतरेगी या उसके उम्मीदवारों को दूसरे चुनाव चिह्नों पर चुनाव लड़ना पड़ेगा। सवाल 7: निकाय चुनाव में इस बार चुनाव चिह्न की अहमियत पहले से ज्यादा क्यों है? जवाबः इस बार मुकाबला एक साथ 309 नगरीय निकायों में हो रहा है। कुल 10 हजार 245 पार्षद पदों पर चुनाव होना है। दूसरी तरफ निर्दलीय उम्मीदवारों में चिमटा बनाम चारपाई, केतली बनाम ट्रक, चक्की बनाम जूता और पानी की टंकी बनाम माइक जैसी चुनावी टक्कर देखने को मिल सकती है।
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‘पतंग’ के लिए हाईकोर्ट पहुंची ओवैसी की पार्टी:निर्दलीयों की नजर ‘चिमटे-चक्की-जुराब’ पर; निकाय चुनाव में किसे-कैसे मिलते हैं ‘अजीबो-गरीब’ सिंबल?
