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रीवा में रक्षाबंधन पर शुक्रवार को रीवा केंद्रीय जेल में भावुक माहौल रहा। शाम तक करीब 6 हजार बहनें जेल में बंद अपने भाइयों को राखी बांधने पहुंचीं। लंबे समय बाद भाई से मुलाकात हुई तो कई बहनों की आंखों से खुशी और दर्द के आंसू छलक पड़े। बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और मिठाई खिलाई। भाइयों ने भी बहनों की रक्षा का वादा किया। जेल अधीक्षक एसके उपाध्याय ने बताया कि रक्षाबंधन को लेकर जेल में विशेष इंतजाम किए गए थे। सुबह से ही बहनों और माताओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। बड़ी संख्या में महिलाओं के आने को देखते हुए अलग-अलग जिलों के बंदियों के लिए अलग काउंटर बनाए गए थे, ताकि राखी बांधने की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न हो। चेकिंग के बाद जेल में दिया प्रवेश जेल में प्रवेश से पहले सभी माताओं और बहनों की जांच और तलाशी ली गई। इसके बाद ही उन्हें अंदर जाने की अनुमति दी गई। सुरक्षा व्यवस्था के लिए जेल स्टाफ के साथ बिछिया थाना पुलिस भी तैनात रही। पुलिस और जेल कर्मचारियों की निगरानी में पूरी व्यवस्था संचालित की गई। जेल के अंदर बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी और उन्हें मिठाई खिलाई। लंबे समय बाद आमने-सामने मुलाकात होने से कई भाई-बहन भावुक हो गए। राजकली साकेत ने बताया कि भाई को राखी बांधकर मन को सुकून मिला, लेकिन उससे दूर रहने का दुख भी है। रक्षाबंधन पर भाई के साथ कुछ पल बिताना उनके लिए भावुक अनुभव रहा। सुलोचना शुक्ला ने कहा कि भाई की कलाई पर राखी बांधते समय उनकी आंखों से आंसू निकल आए। उन्हें उम्मीद है कि अगली राखी भाई के साथ घर पर मनाने का मौका मिलेगा। अलग-अलग काउंटर से व्यवस्थित कराई मुलाकात जेल प्रशासन के मुताबिक, बड़ी संख्या में महिलाओं के पहुंचने के बावजूद अलग-अलग काउंटर और सुरक्षा व्यवस्था के कारण राखी बांधने की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी कराई गई। पूरे आयोजन के दौरान जेल स्टाफ और पुलिसकर्मी लगातार निगरानी करते रहे।
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6 हजार बहनों ने बंदी भाइयों को बांधी राखी:रीवा जेल में चेकिंग के बाद प्रवेश मिला; अलग-अलग जिलों के बंदियों के लिए बनाए काउंटर
