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चारभुजा के गुरुकुल में विधि-विधान से हुआ श्रावणी उपाकर्म:ब्राह्मणों ने लिया आत्मशुद्धि और परंपरा संरक्षण का संकल्प




राजसमंद में चारभुजा के पास कसार गांव में गुरुकुल में श्रावणी उपाकर्म का आयोजन किया गया जहां 55 ब्राह्मण पंडितों, बटुकों एवं संस्थान से जुड़े सदस्यों ने विधि विधान से श्रावणी उपाकर्म सम्पन्न किया। सनातन वैदिक शिक्षण संस्थान ट्रस्ट द्वारा इस बार आयोजन कसार गांव में किया गया। संस्थान से जुड़े ब्राह्मण पंडित पिछले 25 वर्षों से इस वैदिक परंपरा का निरंतर निर्वहन कर रहे हैं। संस्थान के महामंत्री पंडित जितेंद्र शर्मा के अनुसार संस्थान अध्यक्ष पंडित उमेश द्विवेदी के सानिध्य में दोपहर 12 बजे से 55 से अधिक ब्राह्मण पंडितों, बटुकों एवं संस्थान से जुड़े सदस्यों ने विधि-विधान से श्रावणी उपाकर्म संपन्न किया। कार्यक्रम में हेमाद्रि संकल्प, दसविध स्नान, भस्म स्नान, मृतिका स्नान, पंचगव्य, गौ रज, गोबर, फल, सर्वोषधि, कुशोदक एवं हिरण्य स्नान सहित धार्मिक अनुष्ठान किए गए। इसके बाद देव तर्पण, ऋषि तर्पण, मनुष्य तर्पण एवं पितृ तर्पण किया गया। नूतन यज्ञोपवीत का पूजन कर नवीन यज्ञोपवीत धारण किया गया। विष्णु पूजन, सप्तऋषि पूजन, गृहशांति एवं रक्षासूत्र पूजन के बाद सभी ने एक-दूसरे को रक्षासूत्र बांधा। इस दौरान वर्षभर में जाने-अनजाने हुए पाप कर्मों के प्रायश्चित एवं आत्मशुद्धि का संकल्प लिया गया। श्रावणी उपाकर्म को वेदाध्ययन की नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर ब्राह्मणों ने वैदिक परंपराओं के संरक्षण और उन्हें आगामी पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में देवप्रकाश पालीवाल, भरत पानेरी, प्रशांत व्यास, कांकरोली से सत्यनारायण तोषनीवाल, मुरलीधर सहित संस्थान से जुड़े सदस्य एवं ब्राह्मण उपस्थित रहे।



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