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नाथद्वारा स्थित पुष्टिमार्ग की प्रधान पीठ श्रीनाथजी मंदिर में श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के अवसर पर रक्षाबंधन और गौस्वामी दामोदर महाराज का प्राकट्योत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। उत्सव के दौरान श्रीजी प्रभु के अलौकिक दर्शनों के लिए बड़ी संख्या में वैष्णव श्रद्धालु पहुंचे। रक्षाबंधन के शुभमुहूर्त में सुबह 7.45 बजे श्रृंगार समय झालर-घंटों की मंगल ध्वनि और शंखनाद के बीच श्रीजी प्रभु को तिलक एवं अक्षत कर दोनों श्रीहस्तों तथा दोनों बाजूबंद के स्थान पर राखी धारण कराई गई। इसके बाद श्रीजी को विशेष उत्सव भोग अरोगया गया। हीरे, मोती और माणक से सजाया गया उत्सव पर श्रीजी प्रभु को लाल मलमल का पिछोड़ा एवं श्री मस्तक पर छज्जेदार चिल्ला वाली पाग के ऊपर मोरपंख की चन्द्रिका का मनोरम श्रृंगार धराया गया। श्रीजी को वनमाला से सुसज्जित भारी श्रृंगार के साथ हीरे, मोती, माणक, पन्ना एवं जड़ाऊ स्वर्ण के आवरणों से सजाया गया। विशेष उत्सव भोग में गुल-पापड़ी, केशरयुक्त बासोंदी, घी में तले बीज-चालनी के सूखे मेवे, विविध संदाना और फल अरोगाए गए। गोपीवल्लभ भोग में केशरयुक्त जलेबी के टूक एवं बासोंदी तथा राजभोग में अनस-खड़ी में दाख का रायता विशेष रूप से अरोगाया गया। बताया गया कि गुल-पापड़ी श्रीजी को आज के दिन के अतिरिक्त केवल घर के छप्पनभोग के अवसर पर ही अरोगाई जाती है। हिंडोलने में झूलते हुए दर्शन दिए रक्षाबंधन के भाव को दर्शाते हुए श्री मदनमोहनजी के कांच के हिंडोलने का मनोरम उत्सव भी हुआ। संध्या आरती की झांकी में श्री मदनमोहन लालजी एवं श्री नवनीतप्रियाजी कांच के हिंडोलने में झूलते हुए दर्शन दिए। अनोसर में श्रीजी के सम्मुख अत्तरदान, मिठाई का थाल, चोपड़ा, चार बीड़ा और आरसी धराए गए।
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श्रीनाथजी मंदिर में रक्षाबंधन पर हुए विशेष श्रृंगार:रक्षाबंधन पर श्रीजी को दोनों श्रीहस्तों और बाजूबंद स्थान पर राखी धारण कराई
