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मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान में 6.57 लाख लोगों की स्क्रीनिंग:कोंडागांव में गांव-गांव और घर-घर पहुंची स्वास्थ्य टीमें,1,678 डायबिटीज, 1,951 BP के नए मरीज मिले




कोंडागांव जिले में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से संचालित मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत व्यापक स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर 6 लाख 57 हजार 801 लोगों की स्क्रीनिंग की। इस दौरान मधुमेह, उच्च रक्तचाप, टीबी, कुष्ठ, कैंसर, मलेरिया और मोतियाबिंद जैसी बीमारियों की शुरुआती पहचान कर जरूरतमंद मरीजों को आगे की जांच और उपचार से जोड़ा गया। अभियान कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना के निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में संचालित किया गया। 1,678 नए डायबिटीज और 1,951 BP मरीज मिले गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग के दौरान 1,678 नए मधुमेह और 1,951 नए उच्च रक्तचाप के मरीज चिन्हांकित किए गए। स्वास्थ्य विभाग ने इन मरीजों को आवश्यक परामर्श, जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई। 345 संदिग्ध मोतियाबिंद मरीज, 56 के ऑपरेशन अभियान के दौरान 345 संदिग्ध मोतियाबिंद मरीजों की पहचान हुई। आगे की जांच में इनमें से 125 मामलों की पुष्टि हुई, जबकि 56 मरीजों के ऑपरेशन कराए गए। ब्लॉकवार आंकड़ों के अनुसार कोंडागांव में 105 संदिग्ध मरीजों में 42 की पुष्टि हुई और 11 ऑपरेशन किए गए। केशकाल में 96 में से 22 की पुष्टि और 12 ऑपरेशन, माकड़ी में 46 में से 19 की पुष्टि और 9 ऑपरेशन तथा फरसगांव में 40 संदिग्ध मरीजों में 31 की पुष्टि और 23 ऑपरेशन हुए। विश्रामपुरी में 58 संदिग्ध मामलों में से 11 की पुष्टि हुई। 136 कफ संदिग्धों की जांच, 5 में TB की पुष्टि एनटीईपी रिपोर्ट के अनुसार, 13 अप्रैल से 31 मई 2026 के बीच 136 कफ संदिग्ध मरीजों की ट्रूनेट, सीबीनाट और माइक्रोस्कोपी से जांच की गई। इनमें 5 मरीजों में टीबी की पुष्टि हुई और उनका उपचार शुरू कर दिया गया। कुष्ठ के 55 संदिग्ध मरीज मिले कुष्ठ रोग की स्क्रीनिंग के दौरान 55 संदिग्ध मरीज मिले। इनमें बड़ेराजपुर से 20, कोंडागांव से 23, माकड़ी से 6 और फरसगांव से 5 मामले शामिल हैं। इन मरीजों की आगे जांच कराई जा रही है। 42 मलेरिया संदिग्ध, 5 पॉजिटिव मलेरिया जांच के दौरान 42 संदिग्ध मामले सामने आए। जांच के बाद इनमें से 5 मरीजों में मलेरिया की पुष्टि हुई और उपचार शुरू किया गया। वहीं फाइलेरिया के 12 संदिग्ध मामलों की उच्च स्तरीय जांच कराई गई, जिसमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अभियान का उद्देश्य बीमारियों की पहचान शुरुआती स्तर पर कर मरीजों को समय पर उपचार से जोड़ना है, ताकि गंभीर स्थिति बनने से पहले उनका इलाज शुरू किया जा सके।



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