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राजस्थान में अब जेन-जी और जेन-अल्फा के प्रदर्शनों में लाठीचार्ज नहीं होगा। उनकी समस्या और मांग को मौके पर ही सुनकर समाधान निकाला जाएगा। इसके लिए संबंधित विभाग के अफसर मौके पर जाएंगे। बच्चों से संवाद करेंगे। दरअसल, सरकार जेन-जी आंदोलन के बाद बेहद सतर्क है। हाल ही में बुनियादी सुविधाओं और बदहाल स्कूलों को लेकर कई जगह बच्चे सड़कों पर उतर आए थे। इसलिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने जा रही है। मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए- जेन-जी आंदोलनों से निपटने के लिए किस तरह की SOP बनाई जाएगी? आखिर SOP तैयार करने के पीछे सरकार का मकसद क्या है? गृह विभाग के अधिकारी SOP तैयार करने में जुटे गृह विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया- बीते दिनों अलवर के थानागाजी, जोधपुर के लूणी और भरतपुर में स्कूली बच्चों के प्रदर्शन हुए। ज्यादातर प्रदर्शन बुनियादी सुविधाओं और बदहाल स्कूलों को सुधारने जैसी मांग को लेकर थे। ऐसी घटनाओं के मद्देनजर राज्य सरकार के निर्देश पर गृह विभाग में एसओपी तैयार की जा रही है। इसके तहत जेन-जी या जेन-अल्फा के प्रदर्शन होने पर पुलिस ज्यादा से ज्यादा संवाद करेगी। SOP में क्या होगा खास, आइए जानते हैं… एसओपी तैयार करने के पीछे ये हैं 3 बड़ी वजहें 1. चुनाव में नुकसान का डर : एक्सपर्ट का कहना है कि निकाय और पंचायत चुनावों के मद्देनजर सरकार किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती कि विपक्षी दल मुद्दे को भुनाए। बता दें, कांग्रेस नेताओं ने जयपुर में एक मूक-बधिर स्कूल को लेकर 20 अगस्त को जोरदार प्रदर्शन किया था। 2. लाठीचार्ज का मैसेज गलत न जाए : युवाओं और स्कूली बच्चों से पुलिस मारपीट करती है तो पब्लिक में गलत संदेश जाता है। सरकार यह बिल्कुल भी नहीं चाहती है। सीएम भजनलाल शर्मा मीटिंग में पुलिस अधिकारियों से कह चुके हैं कि पुलिस संवाद करे। नरमी के साथ मामले सुलझाए। 3. सोशल मीडिया पर ट्रेंड न हो कोई विवाद : आंदोलन करने वाले छात्रों को सोशल मीडिया पर सपोर्ट मिलता है। इस बीच स्टूडेंट्स बनाम पुलिस प्रशासन या लाठीचार्ज होने पर सोशल मीडिया पर ट्रेंड बनता है। इसका असर प्रदेश के अन्य शहरों तक भी पहुंचता है। कानून-व्यवस्था के लिए गृह विभाग तैयार करता है SOP दरअसल, लॉ एंड ऑर्डर से जुड़े मामलों का प्रशासनिक नियंत्रण गृह विभाग ही देखता है। प्रदेश में दंगे, आंदोलन, फायरिंग, गंभीर घटनाओं जैसे मुद्दों पर गृह विभाग समय-समय पर SOP जारी करता है। एसओपी में किसी विशिष्ट स्थिति, आपातकाल या प्रशासनिक कार्य को सही और सुरक्षित तरीके से पूरा करने के लिए चरण-दर-चरण नियम तय होते हैं। जैसे- गृह विभाग ने 21 मार्च, 2025 में डॉक्टरों की गिरफ्तारी को लेकर एक एसओपी जारी की थी। गृह विभाग के तत्कालीन अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद कुमार की ओर से जारी एसओपी में कहा गया था- यदि किसी डॉक्टर को इलाज में घोर लापरवाही के चलते गिरफ्तार किया जाना जरूरी है तो संबंधित थाने को पुलिस अधीक्षक और पुलिस उपायुक्त से मंजूरी लेनी जरूरी होगी। सड़कों पर क्यों उतरने लगे बच्चे? स्कूली बच्चे छोटे-छोटे मुद्दों को लेकर सड़क पर उतर रहे हैं। जैसे- स्कूल तक सड़क नहीं है। शिक्षकों की कमी है। मेस का खाना ठीक नहीं है। जर्जर भवन। 1. अलवर के थानागाजी में स्टूडेंट्स का प्रदर्शन अलवर जिले की थानागाजी तहसील में 14 अगस्त, 2026 को राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जोधावास में जर्जर भवन हटाने और शिक्षकों के खाली पदों को भरने समेत विभिन्न मांगों को लेकर छात्र-छात्राओं ने स्कूल गेट पर तालाबंदी कर प्रदर्शन किया था। स्टूडेंट्स कहना था कि स्कूल के दो भवन लंबे समय से जर्जर घोषित हैं, लेकिन ध्वस्त नहीं किए गए। उनकी जान को खतरा है। सूचना पर मौके पर पहुंचे सीडीओ तथा सीबीईओ शकुंतला यादव ने समझाइश की। इसके बाद स्टूडेंट्स शांत हुए। बाद में जर्जर भवन को हटा दिया गया था। 2. जोधपुर में स्टूडेंट्स ने स्कूल गेट पर ताला लगा दिया 6 अगस्त, 2026 को जोधपुर जिले के लूणी विधानसभा क्षेत्र के अरणी नाडी मंगल नगर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल में स्टूडेंट्स ने तालाबंदी कर दी। क्योंकि स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नहीं थे। नाराज स्टूडेंट्स ने स्कूल के मुख्य प्रवेश द्वार पर ताला लगा दिया था। स्कूल के गेट के बाहर दरी बिछाकर धरने पर बैठ गए थे। सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक और संसदीय कार्य एवं विधि मंत्री जोगाराम पटेल ने तत्काल संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों, स्कूल प्रशासन, ग्रामीणों और स्टूडेंट्स के बीच शांतिपूर्ण वार्ता हुई। अधिकारियों ने स्टूडेंट्स की मांगों को सुना और खाली पदों पर जल्द प्रतिनियुक्ति के आधार पर सब्जेक्ट टीचर की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया। 3. भरतपुर में धरना-प्रदर्शन 5 अगस्त, 2026 को भरतपुर जिले के उच्चैन क्षेत्र के सैदपुरा गांव स्थित सरकारी वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी को लेकर स्टूडेंट्स ने स्कूल के मुख्य गेट पर ताला लगा दिया और धरना-प्रदर्शन किया। स्टूडेंट्स का कहना था कि स्कूल में करीब 700 स्टूडेंट्स हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण नियमित पढ़ाई नहीं हो पा रही है। स्कूल में प्रिंसिपल सहित 12 टीचर के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। अधिकारियों के जल्द शिक्षकों की नियुक्ति के आश्वासन के बाद मामला शांत हुआ। एक्सपर्ट बोले- संवाद सबसे बेहतर रास्ता रिटायर्ड आईजी सत्यवीर सिंह का कहना है- लोकतंत्र में किसी तरह का आंदोलन हो, समस्या के समाधान के लिए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए। संवादहीनता पर चीजें बिगड़ती हैं। सरकारों और पुलिस को युवा वर्ग से जुड़ने के लिए उनके बातचीत के तौर-तरीकों को समझना होगा। मौके की स्थिति के अनुसार पुलिस निर्णय लेती है, लेकिन कई बार पुलिस को बेवजह पक्षकार बना दिया जाता है। वरिष्ठ पत्रकार महेश चंद्र शर्मा का कहना है- स्कूली बच्चों के प्रदर्शनों का कोई चेहरा नहीं था। लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का अधिकार है। स्कूली बच्चे सिर्फ इतना ही चाहते हैं कि उनकी बुनियादी सुविधाएं जैसे- पर्याप्त स्टाफ, पक्के भवन और साफ-सफाई पूरी हो। सरकारों को इस पर ध्यान देना चाहिए। सरकारी स्कूलों में सिर्फ निम्न आय वर्ग के बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में सरकारों को ज्यादा ध्यान देना चाहिए। संवाद का रास्ता कभी बंद नहीं करना चाहिए।
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राजस्थान में जेन-जी और जेन-अल्फा पर लाठीचार्ज नहीं:आंदोलन-प्रदर्शनों में मौके पर जाकर बातचीत करेंगे अफसर, गृह विभाग तैयार कर रहा SOP
