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नर्मदापुरम जिले की सबसे आखिरी और दुर्गम ग्राम पंचायत नांदिया के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। बरसात के दिनों में देनवा नदी उनके लिए सबसे बड़ी परेशानी बन जाती है। राशन लाने, इलाज कराने और गेहूं पिसवाने जैसे रोजमर्रा के कामों के लिए ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है। ग्रामीणों के मुताबिक, तीन साल पहले पुल निर्माण के लिए राशि स्वीकृत हुई थी। भूमिपूजन भी कराया गया, लेकिन वन विभाग की अनुमति नहीं मिलने के कारण आज तक निर्माण शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में बारिश के दिनों में ग्रामीणों की परेशानी जस की तस बनी हुई है। पिकअप नदी में बंद हुई, रस्सी से खींचकर निकाली
स्थानीय निवासी रामकिशन दर्शमा ने बताया कि तीन दिन पहले ग्रामीणों से भरी एक पिकअप नदी पार कर रही थी। बीच नदी में पहुंचते ही पिकअप बंद हो गई। इसके बाद दूसरी पिकअप की मदद से रस्सी बांधकर उसे नदी से बाहर निकाला गया। ग्रामीणों का कहना है कि जब देनवा नदी उफान पर होती है तो वे किनारे बैठकर पानी कम होने का इंतजार करते हैं। कई बार सिर पर सामान रखकर और कपड़े उतारकर नदी पार करनी पड़ती है। बाइक को बांस के सहारे दूसरी तरफ ले जाना पड़ता है। रामकिशन ने कहा कि हर साल बारिश के दौरान ग्रामीणों की जिंदगी इसी तरह जोखिम में रहती है। पुल निर्माण की प्रक्रिया और अनुमति की फाइलों के बीच उनकी समस्या का समाधान अब तक नहीं हो पाया है। 180 किमी दूर, छिंदवाड़ा होकर पहुंचना पड़ता है
नांदिया ग्राम पंचायत नर्मदापुरम जिला मुख्यालय से करीब 180 किलोमीटर दूर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित है। यह पंचायत पिपरिया ब्लॉक में आती है और इसमें छह गांव शामिल हैं। नांदिया पहुंचने के लिए छिंदवाड़ा जिले के देलाखारी और भूरा भगत होकर जाना पड़ता है। देनवा नदी नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा जिले की सीमा निर्धारित करती है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसे में जरूरी कामों के लिए भी उन्हें नदी पार करने का इंतजार करना पड़ता है। भूमिपूजन हुआ, उसी दिन वन विभाग ने रुकवा दिया काम
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सड़क और पुल की मांग को लेकर वोट बहिष्कार की चेतावनी दी थी। उस समय तत्कालीन कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने पुल निर्माण का आश्वासन दिया था। दिसंबर 2023 में पुल निर्माण को मंजूरी मिली। इसके बाद मार्च 2024 में 60.66 लाख रुपए की लागत से रपटा निर्माण का काम शुरू किया जाना था। भूमिपूजन के दिन ही सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के रेंजरों ने निर्माण कार्य रुकवा दिया। बताया गया कि निर्माण स्थल रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में आता है और यहां काम शुरू करने के लिए वन विभाग की अनुमति जरूरी है। इसके बाद से अनुमति की प्रक्रिया में फाइल अटकी हुई है। फॉरेस्ट और विभाग की टीम करेगी संयुक्त निरीक्षण
आरईएस की कार्यपालन यंत्री प्रियंका मेहरा ने बताया कि रपटा निर्माण के लिए वन विभाग से अनुमति मिलना बाकी है। उन्होंने बताया कि कुछ कमियों के कारण फाइल पहले वापस आ रही थी। अब इसे भोपाल फॉरेस्ट पोर्टल पर सबमिट कर दिया गया है। उनके अनुसार, जल्द ही वन विभाग और संबंधित विभाग के अधिकारियों की संयुक्त टीम मौके का निरीक्षण करेगी। अनुमति मिलने के बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा सकेगा।
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नर्मदापुरम में देनवा नदी पैदल पार करने को मजबूर ग्रामीण:पुल बनाने तीन साल बाद भी नहीं मिली फॉरेस्ट की परमिशन; 60.66 लाख स्वीकृत हो चुके
