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श्रेयस तलपदे और काजल अग्रवाल स्टारर ‘द इंडिया स्टोरी: स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस’ 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। निर्देशक चेतन डीके और राइटर-प्रोड्यूसर सागर शिंदे की यह फिल्म मिलावटी खान-पान, पेस्टिसाइड्स और कैंसर के बढ़ते खतरे जैसे गंभीर मुद्दों को सस्पेंस, ड्रामा और क्राइम के साथ पेश करेगी। निर्देशक का दावा है कि फिल्म में दर्शकों को ओरिजिनल क्राउड और रियल लोकेशंस दिखाई देंगी, क्योंकि उनका उद्देश्य कहानी को अधिकतम वास्तविकता के साथ परदे पर उतारना था। एक बच्ची की मौत की खबर से कहानी की प्रेरणा आई निर्देशक चेतन डीके बताते हैं कि ‘मैं पहले किसी भारतीय क्रांतिकारी पर फिल्म बनाना चाहता था, लेकिन इसी दौरान सागर शिंदे के करीबी दोस्त की छह-सात साल की बेटी की पेस्टिसाइड्स से जुड़े कैंसर के कारण मौत हो गई। इस घटना ने पूरी टीम को झकझोर दिया।’ रिचर्स के दौरान ही एक ‘कैंसर ट्रेन’ के बारे में भी पता चला फिल्म के लिए की गई रिसर्च में लगभग ढाई से तीन साल लगे। रिसर्च के दौरान ही पता चला कि पंजाब के भटिंडा में एक ट्रेन को लोग ‘कैंसर ट्रेन’ के नाम से जानते हैं, क्योंकि वहां प्रदूषण और रसायनों के असर से लोग कैंसर का शिकार हो गए। हमारी फिल्म ऐसे ही गंभीर मुद्दों के इर्द-गिर्द है। बॉम्बे हाईकोर्ट के सीन्स के लिए नायगांव में विशेष सेट बना फिल्म की शूटिंग कोल्हापुर, पुणे, मुंबई, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, बिहार, गुजरात, कोलकाता, हैदराबाद और अन्य स्थानों पर की गई। चेतन डीके का कहना है कि ‘मैंने अधिकांश सीन्स को वास्तविक लोकेशंस पर शूट किया और केवल कुछ सीन्स में ही क्रोमा का उपयोग किया। कुल मिलाकर फिल्म की शूटिंग 60 से 65 दिनों में पूरी हुई, जबकि पूरा शूटिंग शेड्यूल लगभग आठ से नौ महीने तक चला। बॉम्बे हाईकोर्ट के सीन्स के लिए नायगांव में विशेष सेट तैयार किया गया, जहां 12 दिनों तक कोर्टरूम सीक्वेंस फिल्माए गए। यह पूरे इंडिया की फिल्म है, इसलिए हमने टाइटल ‘द इंडियन स्टोरी’ रखा है। इसका टैगलाइन ‘स्लो पॉइजन इन प्रोग्रेस’ है।’ कम्प्यूटर जनरेटेड नहीं, असली क्राउड के साथ हुई पूरी शूटिंग निर्देशक के अनुसार ‘फिल्म में छोटे-बड़े मिलाकर कुल 80 कैरेक्टर हैं। कुछ क्राउड सीन 2-3 तीन हजार लोगों के साथ शूट किए गए हैं। कुल 8 से 10 हजार असल क्राउड हायर हुआ था। क्राउड को कोर्ट, ट्रेन के सीन से लेकर पंजाब, हिमाचल, हैदराबाद, कोलकाता गुजरात, केरला आदि में दिखाया गया है। क्लाइमैक्स की शूटिंग में 10-12 दिन लगे हैं। इसकी शूटिंग कोल्हापुर में हुई है।’ मध्य प्रदेश से लेकर साउथ तक जाकर की गई रिसर्च निर्देशक चेतन के मुताबिक…‘ मध्य प्रदेश से लेकर केरल के कासरगोड गांव और तमिलनाडु तक कई जगहों के मामलों का अध्ययन किया गया। कुछ इलाकों में वर्षों से केमिकल छिड़काव के कारण बच्चों के जन्म से ही विकलांग होने और कैंसर के मामलों में वृद्धि भी देखने को मिली। जब हमें पता चला कि बाजार में ऐसे उत्पाद भी बिक रहे हैं, जिनमें असली दूध की मात्रा नगण्य है, तब लगा कि यह विषय सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि सामाजिक चेतावनी है।’ सैनिक के रोल में दिखेंगे श्रेयस, काजल बनी हैं वकील फिल्म की कहानी एक ऐसे सैनिक की है, जिसकी बेटी पेस्टिसाइड्स से जुड़े कैंसर के कारण मर जाती है। इसके बाद वह किसान, कंपनियों और सिस्टम के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ता है। श्रेयस इसमें सैनिक बने हैं, वहीं काजल अग्रवाल उस वकील का किरदार निभा रही हैं, जो अदालत में उनका साथ देती है। मुरली शर्मा एक ईमानदार अधिकारी और मनीष वाधवा विपक्षी वकील बने हैं।’
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‘द इंडिया स्टोरी’ में दिखेगा थाली का जहर:कैंसर की ट्रेन से कोर्टरूम तक असल घटनाओं से प्रेरित है फिल्म
