‘ईरान ने ट्रम्प की हत्या के लिए एक नया प्लान तैयार किया है।’ ये खुफिया इनपुट इजराइल ने अमेरिका को दिया है। इसके बाद ईरान को लेकर ट्रम्प के तेवर वापस सख्त हो गए। वो ईरानी नेताओं को ‘गंदा’ और ‘शैतान’ बताने लगे। अमेरिका ने 7-8 जुलाई की रात ईरान के 80 ठि
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क्या ईरान वाकई ट्रम्प की हत्या का प्लान बना रहा या सिर्फ इजराइल की चाल है, क्या इसी उकसावे में अमेरिका ने ईरान पर फिर हमला किया; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: इजराइल ने ट्रम्प की हत्या की साजिश से जुड़े क्या खुफिया इनपुट दिए?
जवाबः 9 जुलाई को सबसे पहले अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में एक रिपोर्ट छपी। इसमें कहा गया कि इजराइल ने अमेरिका को इनपुट दिया है कि ईरान ने ट्रम्प की हत्या की साजिश रची है। इसके बाद अमेरिकी मीडिया चैनल CNN ने बताया कि ये इनपुट इसी हफ्ते दिया गया। रिपोर्ट में दो सोर्सेज के हवाले से कहा गया…
- अमेरिका को हाल के हफ्तों में ट्रम्प की हत्या की संभावनाओं के बारे में लगातार खुफिया जानकारी मिल रही थी। हालांकि इस बार इजराइल ने ईरान की एक खास साजिश का अलर्ट दिया।
- अमेरिकी खुफिया ऑफिसर्स को चिंता है कि ईरान कई मौजूदा और पूर्व सीनियर ऑफिसर्स को निशाना बना सकता है। अब अमेरिकी खुफिया एजेंसियां ऐसे लोगों पर नजर रख रही हैं, जिन्होंने ट्रम्प पर किसी तरह के हमले का जिक्र किया है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है।
सवाल-2: क्या इसी खुफिया इनपुट से भड़के ट्रम्प ने ईरान पर दोबारा धावा बोला?
जवाबः सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता। लेकिन इसके 3 संकेत मिलते हैं…
1. ईरानी नेताओं को लेकर ट्रम्प के तेवर बदले
- 6 जुलाई को ईरान ने उसके तय रूट से अलग रास्ते से होर्मुज पार कर रहे 3 जहाजों पर हमला किया। 7 जुलाई को ट्रम्प तुर्किये में मौजूद थे। उन्होंने वहां पत्रकारों से कहा, ‘मेरे हिसाब से अब शांति समझौता खत्म हो गया है।’ उन्होंने ईरानी नेताओं के लिए ‘गंदे’ और ‘बीमार’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए।
- जबकि इससे पहले तक ट्रम्प उन्हें ‘समझदार’ और ‘मजबूत’ वार्ताकार कह रहे थे। हालांकि ये साफ नहीं है कि इस समय तक अमेरिका को इजराइली अलर्ट मिल चुका था या नहीं।
2. ट्रम्प ने खुद कहा- ‘उनकी ‘किल लिस्ट में सबसे ऊपर’, जहाज बदला
- बुधवार, 8 जुलाई की सुबह अमेरिका ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों पर बमबारी की। इसी दिन ट्रम्प को तुर्किये से वापस अमेरिका लौटना था। उन्होंने कतर से तोहफे में मिला एयर-फोर्स वन प्लेन छोड़कर अपने पुराने प्लेन से सफर किया। CNN के मुताबिक, ईरान से बढ़ते तनाव के चलते सुरक्षा कारणों से ऐसा किया गया।
- 8 जुलाई को ही ट्रम्प ने बड़ा बयान दिया, ‘वे अमेरिकी लीडर, यानी मुझे हटाना चाहते हैं। मैंने आज सुबह देखा कि मैं उनकी हर लिस्ट में हूं। मैं अब तक थोड़ा किस्मत वाला रहा हूं, लेकिन हो सकता है ऐसा बहुत देर तक न हो पाए। ये शैतान और बीमार लोग हैं। हमें ये कैंसर जड़ से खत्म करना होगा। आपको कैंसर को जल्दी काटकर बाहर निकालना होता है, यही मेरी राय है।’
- 9 जुलाई को ट्रम्प ने दोबारा कहा, ‘मुझे हाल ही में पता चला कि मैं हत्या की लिस्ट में टॉप पर हूं।’ इन बयानों से ये साफ नहीं हुआ कि क्या ट्रम्प इजराइल से मिले अलर्ट की बात कर रहे थे। हालांकि जब व्हाइट हाउस प्रशासन से पत्रकारों ने इजराइल के अलर्ट को लेकर सवाल किया, तो उसने ट्रम्प के इन्हीं बयानों का हवाला दिया। यानी व्हाइट हाउस ने संकेत दिया कि ट्रम्प के अचानक बदले तेवर और गुस्से के पीछे इजराइली इनपुट है।

NATO समिट के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने कहा था कि वो ईरान की किल लिस्ट में सबसे ऊपर हैं।
3. नेतन्याहू से नाराजगी के बीच फोन पर बात
- 9 जुलाई को नेतन्याहू ने ट्रम्प से फोन पर बात की है। जल्दी ही वे अमेरिका भी जाने वाले हैं। जबकि नेतन्याहू अब तक ईरान से बातचीत के पक्ष में नहीं रहे और इसे लेकर उनकी ट्रम्प से नाराजगी बन गई थी।
- कुछ अमेरिकी ऑफिसर्स ने CNN को ये भी बताया कि गुरूवार रात को भी ईरान पर बड़े हमले की तैयारी थी। अमेरिकी युद्धपोत ‘USS अब्राहम लिंकन’ पर तैनात फाइटर जेट्स में हथियार लोड कर लिए गए थे। पायलट्स ने एक्सरसाइज की। लेकिन ईरान से बातचीत जारी है, इसलिए ऐन मौके पर हमला टाल दिया गया।
सवाल-3: क्या इजराइल जानबूझकर ट्रम्प को भड़काने की कोशिश कर रहा?
जवाबः पिछले 2 साल में अमेरिका ने ईरान पर तीन हमले किए। हर हमले से पहले इजराइल ने अमेरिका को कोई-न-कोई खुफिया इनपुट दिया…
जून 2025, ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिका की स्ट्राइक
इजराइली खुफिया विभाग ने ट्रम्प को इनपुट दिया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की तैयारी में है। अमेरिकी अखबार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के मुताबिक ‘इजराइलियों ने ट्रम्प को यकीन दिलाया कि हमला करने से ईरान के साथ न्यूक्लियर डील आसान हो जाएगी।’

22 जून, 2025 को अमेरिका ने इस्फहान के न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी सेंटर पर हमला किया था।
फरवरी 2026, ईरान के खिलाफ जंग छेड़ना
28 फरवरी 2026 के हमले से पहले 11 फरवरी को नेतन्याहू व्हाइट हाउस ट्रम्प से मिलने गए थे। उन्होंने ट्रम्प को 1 घंटे का प्रेंजेंटेशन देकर बताया कि कैसे ईरान पर उनका हमला सफल होगा। लेकिन ट्रम्प हमले के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद नेतन्याहू ने ट्रम्प से कहा था कि खामेनेई को मारकर 2024 में उन पर हुए हमले का बदला लेने का सबसे अच्छा मौका है। दरअसल राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान एक हमलावर ने ट्रम्प पर गोली चलाई थी। अमेरिकी खुफिया विभाग के मुताबिक, इसमें ईरान का हाथ था।

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के घर पर हमले की सैटेलाइट तस्वीर।
जुलाई 2026, समझौते के बावजूद ईरान पर हमला
इसबार भी इजराइल ने ट्रम्प की हत्या की साजिश का खुफिया इनपुट दिया।
दरअसल, इजराइ, अमेरिका-ईरान समझौते से खुश नहीं था। नेतन्याहू ने तो ये तक कहा था कि वे इस डील को मानने के लिए बाध्य नहीं है।
CNN के मुताबिक, जिन सोर्सेज ने ये बताया कि इजराइल ने ट्रम्प पर हमले का अलर्ट दिया है, उन्हीं में से एक सोर्स ने ये भी कहा कि ये रिपोर्ट ट्रम्प के फैसले को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। क्योंकि इस समय ट्रम्प सोच रहे थे कि ईरान के खिलाफ मिलिट्री एक्शन तेज की जाए या नहीं।
CNN के मुताबिक, इजराइली रिपोर्ट के इनपुट भी स्पष्ट नहीं हैं। साथ ही अमेरिका ने न ही ऐसी किसी साजिश की खुद कोई जांच की है और न ही वह इस पर नजर रख रहा है। इसलिए ये इजराइल का उकसावा ज्यादा लग रहा है।
इजराइली अखबार ‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ में ये भी दावा किया गया है कि इजराइल दोबारा ईरान पर हमले में अमेरिका के साथ शामिल होना चाहता है। नेतन्याहू सिर्फ अमेरिका और ट्रम्प से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

अमेरिका ने 7-8 जुलाई की रात ईरान पर करीब 170 हमले किए हैं।
सवाल-4: इजराइल पर भरोसा करके अमेरिका को क्या कीमत चुकानी पड़ी?
जवाबः इजराइल पर भरोसा कर ईरान पर हमले करने से अमेरिका को आर्थिक और सैन्य नुकसान हुआ है, ट्रम्प को घरेलू आलोचना झेलनी पड़ रही है…
10 लाख करोड़ रुपए तबाह हो गए: अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, जंग के पहले 6 दिनों में ही अमेरिका ने 11.3 बिलियन डॉलर, यानी करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। जंग के दौरान अमेरिका में पेट्रोल के दाम 40% तक बढ़ गए थे।ईरान के साथ जंग में अमेरिका अबतक 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर चुका है।
42 जेट गंवाए, करोड़ों के रडार सिस्टम को नुकसान: पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, जंग के दौरान अमेरिका ने 42 जेट गंवाए हैं। इनमें करीब 282 करोड़ रुपए के चार F-15E फाइटर जेट और करीब 534 करोड़ रुपए के तीस MQ-9 रीपर ड्रोन भी शामिल हैं। कतर के अमेरिकी बेस पर तैनात FP132 रडार सिस्टम नुकसान पहुंचा है। ईरानी सेना ने अमेरिका के एडवांस डिफेंस सिस्टम THAAD और पैट्रियट को भी डैमेज किया है।
ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग 25% घटी: ईरान के साथ जंग छेड़ने से अमेरिकी जनता खुश नहीं है। जनवरी में जब ट्रम्प को दूसरी बार राष्ट्रपति बने 1 साल पूरे हुए थे, उनकी अप्रूवल रेटिंग 52% थी। अप्रूवल रेटिंग, यानी एक सर्वे के जरिए पता करना कि कितने प्रतिशत लोग किसी नेता, सरकार या नीति से खुश हैं। 10 जुलाई को ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग सिर्फ 39% रह गई है। अमेरिका के कई शहरों में उनके खिलाफ ‘नो किंग्स’ प्रोटेस्ट हो रहे हैं।
ट्रम्प ने जंग के 3 मुख्य टारगेट बताए थे- ईरान में सत्ता परिवर्तन, उसके न्यूक्लियर और बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर रोक, ईरानी नेवी का खात्मा। 4 महीने बाद भी इनमें से कोई टारगेट पूरा नहीं हो पाया है।
सवाल-5: क्या वाकई अभी ईरान ट्रम्प को मारने की कोई साजिश कर रहा है?
जवाबः कुछ अमेरिकी रिपोर्ट्स के अलावा अभी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है कि ईरान ने ट्रम्प को मारने के लिए कोई नया प्लान बनाया है। हालांकि 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी टॉप जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद कई बार ट्रम्प को मारने की धमकी दी गई, कुछ साजिशें हुईं और एक बार ट्रम्प पर हमला भी हुआ…
- जनवरी 2022 में, खामेनेई की ऑफिशियल वेबसाइट पर एक वीडियो में ट्रम्प को गोल्फ खेलते दिखाया दिखाया गया था, जबकि एक पहिए वाला रोबोट और एक ड्रोन उन्हें निशाना बनाते हुए दिखाए गए थे। इस वीडियो पर एक मैसेज लिखा था- ‘सुलेमानी के हत्यारे को इसकी कीमत चुकानी होगी।’
- 13 जुलाई 2024 को अमेरिका के पेन्सिलवेनिया प्रांत में चुनावी रैली के दौरान ट्रम्प पर 20 साल के हमलावर थॉमस मैथ्यू क्रूक्स ने असॉल्ट राइफल AR-15 से 8 राउंड फायर किए। एक गोली कान को छूकर निकल गई, जिससे ट्रम्प घायल हो गए थे। हालांकि आज तक इसका खुलासा नहीं हो पाया है कि थॉमस ट्रम्प को मारना क्यों चाहता था।
- जुलाई 2024 में कथित रूप से ईरानी सेना से जुड़ा एक एजेंट आसिफ मर्चेंट अमेरिका में पकड़ा गया। कोर्ट में उसने कहा कि ईरानी सेना ने उसे राजनीतिक हत्याएं करने और कुछ डाक्यूमेंट्स चुराने भेजा था।
- इसके बाद नवंबर 2024 में ईरानी नागरिक फरहाद शकेरी और दो अमेरिकियों को पकड़ा गया। IRGC ने उसे ट्रम्प की निगरानी और जल्द से जल्द हत्या करने का काम सौंपा था।
- 15 फरवरी, 17 फरवरी और फिर 2 मार्च 2025 को फ्लोरिडा बेस्ड ट्रम्प के मार-ए-लागो रिजॉर्ट के एयरस्पेस में कई नागरिक विमान घुस गए थे। तब अमेरिका के F-16 लड़ाकू विमानों ने इन यात्री विमानों को रोक लिया था।
- जून 2025 में ईरान के दो सीनियर मौलवी अयातुल्ला नासर मकारम शिराजी और अयातुल्ला हुसैन नूरी हमदानी ने ट्रम्प और नेतन्याहू की हत्या के लिए फतवे जारी करके ट्रम्प और नेतन्याहू को ‘काफिर लड़ाका’ कहा।
- 9 जुलाई 2025 को खामेनेई के करीबी सलाहकार रहे मोहम्मद जवाद लारिजानी ने एक इंटरव्यू में कासिम की हत्या का जिक्र करते हुए कहा, ‘ट्रम्प ने ऐसा कुछ किया है, कि अब वह ‘मार-ए-लागो’ में धूप नहीं सेंक सकते हैं। जब वह सूरज की तरफ अपना पेट करके लेटे होंगे, तो एक छोटा ड्रोन उनकी नाभि पर हमला कर सकता है। यह काम बहुत आसान है।’
- जुलाई 2025 में ही ईरान में Thaar।ir नाम की एक वेबसाइट ने ‘अहद-ए-खून’ यानी ब्लड पैक्ट के तहत 100 मिलियन डॉलर की रकम जुटाने का लक्ष्य रखा। वेबसाइट पर लिखा गया, ‘हम यह अहद (शपथ) लेते हैं कि अल्लाह के दुश्मनों और खामेनेई की जान के लिए खतरा बनने वालों की हत्या करने वाले को हम ईनाम देंगे।’
- इस कैंपेन के तहत सैकड़ों करोड़ रुपए जुटाए गए। ईरानी सेना से जुड़ी न्यूज एजेंसी फार्स ने भी इस ब्लड पैक्ट का समर्थन किया। हालांकि ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने सरकार को इस पैक्ट से दूर रखा था।
- ईरान के पड़ोसी देश अजरबैजान के एक मौलवी मंसूर इमामी ने कहा था, ‘जो भी ट्रम्प का सिर लाएगा। हम उसे 100 अरब तोमन यानी 1.14 मिलियन डॉलर देंगे।’
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5 जुलाई को इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा- अमेरिका ही नहीं, बल्कि हमारे कुछ और दोस्त भी हैं। जैसे- 1.4 अरब आबादी वाला भारत। नेतन्याहू का ये बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जवाब था। वेंस ने पिछले महीने कहा था कि ट्रम्प दुनिया के इकलौते ताकतवर देश के नेता हैं, जो इजराइल से सहानुभूति रखते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
