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Asim Munir Military Powers; Pakistan Army Chief Dictatorship Strategy Explained


पाकिस्तान में 5वीं बार सेना के जनरल ने ‘तख्तापलट’ कर दिया है। फर्क बस इतना है कि इस बार ये टैकों के जरिए नहीं, संसद के रास्ते हुआ है। नए कानून से फील्ड मार्शल आसिम मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स बन गए हैं।

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इससे जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब, आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: आसिम मुनीर को कौन-सी नई ताकतें मिल गई हैं? जवाब: नवंबर 2022 में आसिम मुनीर पाकिस्तान के 17वें आर्मी चीफ बने थे। उनका कार्यकाल खत्म होने से 6 महीने पहले, यानी मई 2025 में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च कर दिया। पाकिस्तान ने जीत का झूठा दावा किया और आसिम मुनीर को ‘हीरो’ बताया। इसके बाद आसिम मुनीर की ताकत बढ़ती चली गई…

20 मई 2025 को मुनीर फील्ड मार्शल बने। ये पाकिस्तानी सेना की सबसे ऊंची रैंक होती है। आम बोलचाल में इसे ‘फाइव स्टार जनरल’ कहते हैं। इससे पहले पाकिस्तान में सिर्फ जनरल अयूब खान इस रैंक तक पहुंचे थे।

नवंबर 2025 को पाकिस्तानी संविधान के आर्टिकल 243 में 27वां संशोधन करके सेना में नया चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज, CDF का पद बनाया गया। मुनीर देश के पहले CDF बने। वो 2030 तक इस पद पर रहेंगे। संशोधन के जरिए इसे बढ़ाया भी जा सकता है।

20 अगस्त 2026 को पाकिस्तानी संसद में 2 नए कानून पारित हुए, जिससे CDF को 5 बड़ी शक्तियां मिल गई हैं।

डिफेंस फोर्सेज ऑफ पाकिस्तान एक्ट, 2026 के तहत 3 ताकतें…

  1. CDF मुनीर की अगुवाई में एक ‘डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर’ बनेगा, जो तीनों सेनाओं के कामकाज और जंग से जुड़े फैसले लेगा।
  2. CDF के पास सेना प्रमुखों को छोड़कर तीनों सेनाओं के बाकी सारे ऑफिसर्स को रिटायर करने, हटाने, सर्विस खत्म करने या बनाए रखने या रिटायरमेंट में छूट देने का हक होगा।
  3. CDF नेशनल सिक्योरिटी और डिफेंस के मामलों में पीएम के प्रमुख सलाहकार होंगे। सरकार और CDF सेना से जुड़े कानूनों में बदलाव भी कर सकते हैं।

नेशनल कमांड अथॉरिटी एक्ट, 2026 के तहत 2 ताकतें…

  1. CDF मुनीर के पास परमाणु हथियारों का कंट्रोल बढ़ जाएगा। इससे पहले पाकिस्तानी आर्मी चीफ न्यूक्लियर हथियारों की नेशनल कमांड अथॉरिटी के मेंबर होते थे। इसकी अध्यक्षता पीएम के जिम्मे होती है।
  2. CDF को राष्ट्रपति के बराबर कानूनी सुरक्षा मिलेगी, यानी पूरी जिंदगी कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

यानी आसिम मुनीर तीनों सेनाओं के प्रमुख हैं, न्यूक्लियर हथियारों से जुड़े फैसले लेने की भी ताकत है। सैन्य अफसरों से जुड़ा हर फैसला भी निर्णायक रूप से वही लेंगे और सबसे बड़ी बात- मुनीर पर कोई मुकदमा नहीं चल सकता।

सवाल-2: मदरसे में पढ़े मुनीर पाकिस्तान के सबसे ताकतवर शख्स कैसे बन गए? जवाब: मुनीर के पिता सैयद सरवर मुनीर 1947 में पंजाब के जालंधर से पलायन कर पाकिस्तान पहुंचे थे। वो रावलपिंडी के मशहूर एफजी टेक्निकल स्कूल के हेडमास्टर बने। साथ ही मस्जिद में इमामत करते और इस्लामिक उपदेश देते। गहरे धार्मिक झुकाव वाले इस घर में 1968 में आसिम मुनीर का जन्म हुआ।

पाकिस्तानी जर्नलिस्ट एजाज सैयद के मुताबिक, घर वाले चाहते थे कि आसिम कुरआन हिफ्ज करे। मुनीर सातवीं तक मदरसे में पढ़े और कुरआन रटी। फिर कुछ दिन एफजी टेक्निकल स्कूल पढ़ने गए। इसके बाद रावलपिंडी के सर सैयद कॉलेज गए, जहां से पूर्व आर्मी चीफ कमर जावेद बाजवा ने पढ़ाई की थी।

क्रिकेट के शौकीन मुनीर कॉलेज के दिनों में तेज गेंदबाज थे। स्कूल के बाद मुनीर ने जापान के फूजी स्कूल, क्वेटा के कमांड एंड स्टाफ कॉलेज और मलेशिया के आर्म्ड फोर्सेज कॉलेज से पढ़ाई की।

उसके बाद इस्लामाबाद की नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी से पब्लिक पॉलिसी और स्ट्रेटेजिक सिक्योरिटी मैनेजमेंट में मास्टर्स किया।

ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल के दिनों आसिम मुनीर की तस्वीर।

ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल के दिनों आसिम मुनीर की तस्वीर।

1986 में मिलिट्री करियर शुरू हुआ, सऊदी में दोबारा कुरआन रटी

25 अप्रैल 1986 को मुनीर को पाकिस्तान आर्मी में के फ्रंटियर फोर्स रेजिमेंट की 23वीं बटालियन में पहली तैनाती मिली।

जब मुनीर लेफ्टिनेंट कर्नल बने, तो उन्हें सऊदी अरब में पाकिस्तानी दूतावास में तैनाती मिली। वहां मुनीर को महसूस हुआ कि वे कुरआन भूल रहे हैं। ऐसे में लगातार 3 साल वह छुट्टियों में घर नहीं गए और इस दौरान दोबारा कुरआन रटी। इसके बाद आसिम सियाचिन ग्लेशियर में भी रहे।

आसिम का काफी वक्त पाकिस्तान के कब्जाए कश्मीर यानी PoK में भी गुजरा। फिर 2014 में मेजर जनरल, 2016 में पाकिस्तान के मिलिट्री इंटेलिजेंस के डायरेक्टर जनरल और सितंबर 2018 में लेफ्टिनेंट जनरल की पोस्ट तक पहुंचे।

PoK में सीमा के पास सिंगल बैरल रॉकेट लॉन्चर का इंस्पेक्शन करते आर्मी चीफ मुनीर (दाएं)।

PoK में सीमा के पास सिंगल बैरल रॉकेट लॉन्चर का इंस्पेक्शन करते आर्मी चीफ मुनीर (दाएं)।

सिर्फ 8 महीने ISI चीफ रहे मुनीर, पीएम इमरान से झगड़ा भारी पड़ा

25 अक्टूबर 2018 को मुनीर ISI के डीजी बने। 8 ही महीने बाद जून 2019 में उन्हें हटाकर लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद को नया ISI डीजी बनाया गया। इसकी वजह थी- मुनीर का इमरान खान से झगड़ा।

मुनीर ने इमरान खान की पत्नी बुशरा बीबी के करप्शन के एक मामले को उजागर कर दिया था। इसलिए इमरान खान के कहने पर तब के आर्मी चीफ बाजवा ने मुनीर को ISI से बाहर का रास्ता दिखाया था।

30 अगस्त 2018 को मुनीर से हाथ मिलाते तब के पाक पीएम इमरान खान।

30 अगस्त 2018 को मुनीर से हाथ मिलाते तब के पाक पीएम इमरान खान।

इमरान पीएम पद से हटाए गए, तो मुनीर नए आर्मी चीफ बने

मुनीर नवंबर 2022 तक करीब एक साल क्वार्टरमास्टर जनरल रहे। ये भी ISI चीफ के मुकाबले काफी छोटा पद होता है।

हालांकि 2022 की शुरुआत में इस्लामाबाद का सियासी माहौल बदलने लगा। 10 अप्रैल को इमरान अविश्वास प्रस्ताव लाकर पीएम पद से हटाए गए। अगले ही दिन नवाज शरीफ के गुट वाली मुस्लिम लीग के नेता और नवाज के छोटे भाई शहबाज शरीफ पीएम बन गए। मुनीर शहबाज के करीबी थे। माना जाता है कि इमरान को सत्ता से हटाने के हथकंडों में मुनीर ने अंदरखाने साथ दिया।

मुनीर को भी इसका ‘रिटर्न गिफ्ट’ मिला। 29 नवंबर को बाजवा को हटाकर मुनीर को नया आर्मी चीफ बना दिया गया। मुनीर पहले आर्मी चीफ बने, जो पाकिस्तान की दोनों खुफिया एजेंसियों- ISI और मिलिट्री इंटेलिजेंस के चीफ रहे थे।

मुनीर के आर्मी चीफ बनने के बाद इमरान ने पाक सेना पर उनकी सरकार गिराने का आरोप लगाया था। ट्रक पर मुनीर की ये तस्वीर अगस्त 2023 की है, जब इमरान को जेल भेज दिया गया था।

मुनीर के आर्मी चीफ बनने के बाद इमरान ने पाक सेना पर उनकी सरकार गिराने का आरोप लगाया था। ट्रक पर मुनीर की ये तस्वीर अगस्त 2023 की है, जब इमरान को जेल भेज दिया गया था।

अब मुनीर पहले ऐसे आर्मी चीफ हैं, जिनके पास एक साथ 3 पद हैं- आर्मी चीफ के अलावा फील्ड मार्शल का मिलिट्री ओहदा और नया नवेला सबसे ताकतवर पद- CDF।

सवाल-3: आसिम मुनीर आखिर हासिल क्या करना चाहते हैं? जवाब: आसिम मुनीर खुद को ऐसे शासक के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं, जिसके लिए कोई खतरा या चुनौती न पैदा हो सके। मुनीर ने अपने लिए ये शील्ड 3 तरह से बनाई है….

1. मुनीर के आगे बेबस मौजूदा सरकार

  • सेंटर ऑफ पीस स्टडीज और ब्रिटेन के चैथम हाउस जैसे थिंक टैंक कहते हैं कि पाकिस्तान में सेना-सरकार वाला ‘हाइब्रिड लोकतंत्र’ खत्म कर दिया गया है। सत्ता मुनीर के हाथों में चली गई है। अब वही पाकिस्तान के ‘De-Facto Ruler’, यानी असली शासक हैं।
  • चैथम हाउस के एशिया-पेसिफिक प्रोग्राम की एसोसिएट फेलो फरजाना शेख कहती हैं, ‘पाकिस्तान में पार्टियां फायदे के लिए सेना का समर्थन करती रही हैं, लेकिन अभी दोनों प्रमुख सत्ताधारी दल PPP और PML-N जिस तरह झुक गए हैं, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। लोकतंत्र दूर की बात, ये संवैधानिक संशोधन मुनीर को मनमानी की छूट देते हैं, जो बेहद खतरनाक है।’
  • इसका सबूत तब मिला, जब पाकिस्तानी कैबिनेट ने डिफेंस फोर्सेज एक्ट को मंजूरी दी और इसे पास करवाने के लिए नेशनल असेंबली में ले गई। PPP ने दिखावे में इसका विरोध किया, लेकिन फौरन समर्थन में वोट दे दिया। महज 30 मिनट में बिल पास हो गया।
  • रिपोर्ट्स में कहा गया कि राष्ट्रपति जरदारी ने तुरंत इस पर साइन कर दिए, क्योंकि पाकिस्तान में मुनीर को कोई इंतजार नहीं कराता।

2. चुनाव के जरिए आसिम को हटाना मुश्किल

  • मुख्य विपक्षी पार्टी, यानी जेल में बंद पूर्व पीएम इमरान की अगुवाई वाली PTI आने वाले चुनाव जीत जाए, तो भी मुनीर कानूनी तौर पर सुरक्षित हैं। उनको CDF के पद से हटाने के लिए संविधान संशोधन करना होगा। इसके लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत चाहिए।
  • विपक्षी दलों के गठबंधन, यानी TTAP के अध्यक्ष महमूद खान अचकजई कहते हैं, ‘पाकिस्तान में अब कोई संविधान, कोई न्यायपालिका नहीं है। एक शख्स को किंग बना दिया गया है। ये संविधान संशोधन देश के खिलाफ एक जुर्म है।’
3 साल से जेल में बंद इमरान खान इमरान मई 2024 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हुए थे। तब से उन्हें किसी ने नहीं देखा है।

3 साल से जेल में बंद इमरान खान इमरान मई 2024 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश हुए थे। तब से उन्हें किसी ने नहीं देखा है।

3. सरकार के जरिए कोर्ट पर भी सेना कंट्रोल

  • 27वें संशोधन के तहत पाकिस्तान की न्यायपालिका का स्ट्रक्चर भी बदलेगा। अब सरकार एक संवैधानिक कोर्ट बनाएगी, जो संवैधानिक मामलों पर सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट भी इसके अधीन है।
  • इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के दो सीनियर जज- मंसूर अली शाह और अतहर मिनल्लाह ने इस्तीफा दिया है। शाह ने कहा- ‘सरकार और सेना पर अकेले सुप्रीम कोर्ट का ही कंट्रोल था, जिसे अब खत्म कर दिया गया है।’

सवाल-4: पाकिस्तान के पुराने सैन्य तानाशाहों के साथ क्या हुआ था? जवाब: पिछले सैन्य तानाशाहों ने इस्तीफा दिया, गिरफ्तार हुए या सबकुछ छोड़कर भागना पड़ा….

1. जनरल अयूब खान: 27 अक्टूबर 1958 को राष्ट्रपति इस्कंदर मिर्जा का तख्तापलट किया। मिर्जा को इंग्लैंड भागना पड़ा और अयूब खुद राष्ट्रपति बने। 1965 की जंग में भारत से हार के बाद अयूब खान के बुरे दिन शुरू हो गए। मार्च 1969 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा।

2. जनरल याह्या खान: जनरल याह्या खान मार्शल लॉ लगाकर राष्ट्रपति बने। 1971 में भारत-पाकिस्तान जंग में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश का जन्म हुआ। भारी बेइज्जती के बाद दिसंबर 1971 में याह्या को इस्तीफा देना पड़ा। नई सरकार ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया। 1980 में उनकी गुमनाम मौत हुई।

3. जनरल जिया-उल-हक: सेना प्रमुख जिया ने साल 1977 में पीएम जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट किया। बाद में भुट्टो पर एक मर्डर केस चलाकर 1979 में उन्हें फांसी दे दी। जिया ने पाकिस्तान में सबसे लंबे समय तक राज किया। 17 अगस्त 1988 को एक प्लेन क्रैश में उनकी मौत हो गई।

4. जनरल परवेज मुशर्रफ: 12 अक्टूबर 1999 को मुशर्रफ, पीएम नवाज शरीफ का तख्तापलट कर राष्ट्रपति बन बैठे। नवाज को जेल में डाल दिया। बाद में वे सऊदी अरब भाग गए। मुशर्रफ के खिलाफ विरोध हुए, उन्होंने इमरजेंसी भी लगाई, आखिरकार अगस्त 2008 में उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। वे दुबई और फिर लंदन भाग गए। 2019 में उन्हें देशद्रोह के मामले में फांसी की सजा मिली। फरवरी 2023 में दुबई में उनकी मौत हो गई।

मुशर्रफ 20 जून 2001 से 18 अगस्त 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे थे। कहा जा रहा है कि मुशर्रफ के अंजाम से सबक लेकर ही मुनीर ने संवैधानिक तरीके से तख्तापलट किया है।

मुशर्रफ 20 जून 2001 से 18 अगस्त 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे थे। कहा जा रहा है कि मुशर्रफ के अंजाम से सबक लेकर ही मुनीर ने संवैधानिक तरीके से तख्तापलट किया है।

सवाल-5: क्या मुनीर की सत्ता कायम होने से भारत को कोई खतरा है? जवाब: मुनीर का रुख पूरी तरह एंटी इंडिया है…

  • 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले से हफ्ते भर पहले मुनीर ने कहा था, ‘हम हिंदुओं से हर मायने में अलग हैं। हमारा धर्म, संस्कृति, रीति-रिवाज, विचार, महत्वाकांक्षा सब अलग हैं। इसी के चलते टू-नेशन थ्योरी बनी। हम दो अलग देश हैं।’
  • 15 अप्रैल 2025 को उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तान की जगलर वेन यानी गले की नस करार दिया और कहा- हम इसे कभी नहीं भूलेंगे। माना जाता है कि इसी भाषण के बाद मुनीर के उकसाने पर भारत में पहलगाम हमला हुआ था।
  • ऑपरेशन सिंदूर के बाद मुनीर ने कहा था, ‘पाकिस्तान एक न्यूक्लियर देश है। अगर हम गिरेंगे तो आधी दुनिया को भी अपने साथ लेकर गिरेंगे। अगर भारत सिंधु नदी पर डैम बनाने की कोशिश करता है, तो हम हर हालत में अपने पानी की हिफाजत करेंगे।’
  • 5 फरवरी 2025 को उन्होंने कहा- पाकिस्तान कश्मीर के लिए तीन जंग लड़ चुका है और अगर जरूरत पड़ी तो 10 और जंग लड़ेगा।

7 अगस्त 2026 को पाकिस्तान, सऊदी और तुर्किये में एक डिफेंस डील हुई। इसके तहत किसी एक देश पर हमला, तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। पाकिस्तान को इस पैक्ट का पहला जनरल सेक्रेटरी जनरल बनाया गया है। ताकतें बढ़ने से आसिम मुनीर को अपने एंटी इंडिया एजेंडे पर काम करना आसान हो जाएगा। ये भारत के लिए चिंता का सबब हो सकता है।

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