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देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू का मामला तेजी से बढ़ रहा है। केवल दिल्ली में 3 हजार से ऊपर मामले सामने आ चुके हैं। इसे देखते हुए झारखंड में भी स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। एच1एन1 व एच3एन2 को लेकर विभाग ने एडवाइजरी जारी कर मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों में 10-10 बेड रिजर्व रखने, एन95 मास्क, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर व जरुरी दवाएं उपलब्ध रखने का निर्देश दिया है। प्राइवेट व सरकारी लैब की मानें तो 25 से ज्यादा संक्रमितों की अबतक पहचान हो चुकी है। इनमें रिम्स के 11 व एमजीएम जमशेदपुर के 3 केस शामिल हैं। दैनिक भास्कर ने जब विभागीय निर्देश व तैयारियों का जायजा लिया तो रिम्स में ही इसकी पोल खुल गई। रिम्स प्रबंधन ने आइसोलेशन वार्ड के अलावा कॉटेज में 10 बेड रिजर्व किए हैं। लेकिन कॉटेज की स्थिति ऐसी है कि वहां बीमार तो दूर सामान्य व्यक्ति का भी रहना ठीक नहीं है। अधिकांश कमरों की दीवारों में सीपेज और काई जमी हुई है। छत से पानी टपक रहा है। बाथरूम बदतर है। सीपेज के कारण प्लास्टर तक झड़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों की हालत सुधरेगी या और बिगड़ेगी, समझा जा सकता है। रिम्स में 3 नए मामले की पुष्टि रिम्स माइक्रोबायोलॉजी लैब के हेड डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि पहले से रिम्स में 8 संक्रमितों की पहचान हुई थी। इसके बाद मंगलवार को 4 सैंपलों की जांच की गई जिसमें 3 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। ऐसे में रिम्स में जांचें गए सैंपलों में अबतक 11 मामलों की पुष्टि हुई है। ठीक होने के बजाय इंफेक्शन फैलने का खतरा स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों के लिए सीपेज और नमी वाले कमरे रिकवरी के बजाय बीमारी को और गंभीर बना सकते हैं। गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। फफूंद और बैक्टीरिया का डर लगातार नमी और सीपेज वाली जगहों पर फफूंद और अन्य खतरनाक सूक्ष्मजीव तेजी से पनपते हैं।
सांस की तकलीफ बढ़ सकती है। स्वाइन फ्लू के मरीज पहले से ही सांस में तकलीफ से जूझ रहे होते हैं किसे सबसे ज्यादा खतरा कमजोर प्रतिरोधक क्षमता : जिन मरीजों की इम्युनिटी कमजोर है, उनके लिए सीलन घातक साबित हो सकता है।
बुजुर्ग और बच्चे : फंगस के संपर्क में आने से इन्हें निमोनिया या अन्य बैक्टीरियल इंफेक्शन हो सकता है। नमी वाले वातावरण में मरीजों को संक्रमण का खतरा कमरों में लगातार सीपेज रहने से नमी बनी रहती है। नमी वाली दीवारों और छतों पर काई व फफूंद विकसित हो सकती है। ऐसे वातावरण में रहने से सांस संबंधी परेशानियां, एलर्जी और अन्य संक्रमणों का खतरा बढ़ सकता है। विशेषकर सांस की बीमारी, अस्थमा या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों के लिए ऐसे स्थान परेशानी बढ़ा सकते हैं। स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीज पहले ही श्वसन संबंधी लक्षणों से परेशान रहते हैं। ऐसे में अस्पताल के रिजर्व वार्ड या कॉटेज की स्वच्छता और रखरखाव संक्रमण नियंत्रण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। डॉ. संजय कुमार सिंह, फिजिशियन पहले आइसोलेशन वार्ड में रखे जाएंगे संदिग्ध व संक्रमित मरीज स्वाइन फ्लू के संदिग्ध व संक्रमितों के लिए आइसोलेशन वार्ड और कॉटेज में जगह चिह्नित की गई है। कॉटेज की स्थिति ठीक कराई जाएगी। हालांकि, पहले आइसोलेशन वार्ड में मरीज रखे जाएंगे। मरीजों की संख्या बढ़ने पर कॉटेज में भर्ती किया जाएगा। – डॉ. शिशिर कुमार, जनसंपर्क अधिकारी, रिम्स।
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बदहाल कमरों में रिजर्व किए गए बेड:रिम्स के जिस कॉटेज में नमी, काई और फफूंद, उसी को बना दिया स्वाइन फ्लू वार्ड
