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ब्लैकबोर्ड-पापा की चिता कब तक जलेगी, हमें खाना खाना है:अंतिम संस्कार के 5 हजार रुपए भेज दिए हैं, अस्थि विसर्जन भी किसी से करवा लेना




तारीख- 4 अगस्त 2026। हरियाणा के सोनीपत का श्मशान घाट। दोपहर के करीब एक बजे का वक्त। एक चिता धधक रही थी। चारों तरफ भीड़ तो थी, लेकिन कोई अपना नहीं था। एक शख्स वीडियो कॉल पर था। बार-बार वह अपना फोन जलती चिता के नजदीक ले जाकर दिखा रहा था। दूसरी तरफ स्क्रीन पर एक औरत थी। गले में तुलसी की माला। माथे पर चंदन का टीका। वो बार-बार एक ही बात पूछ रही थी- चिता जलने में और कितना टाइम लगेगा, हम लोगों को नहाकर खाना भी खाना है। काफी देर हो गई है। मोबाइल थामे हुए शख्स बोला- ‘मैं ये कैसे बताऊं, ये तो चिता ही बता सकती है, कितना समय लगेगा।’ थोड़ी देर बाद उस शख्स को एक और वीडियो कॉल आया। फोन उठाते ही एक औरत बोली- 5,100 रुपए भेज दिए हैं। अंतिम संस्कार अच्छे से कर देना। हम लोग नहीं आएंगे। वो शख्स बोला- ‘पैसे की जरूरत नहीं है, यहां लोगों ने सब कर दिया है। आना हो तो अस्थि विसर्जन में आ जाना।’ वो कुछ रुककर बोली- ‘मैं तो नहीं आ पाऊंगी। घरवाले मना कर रहे हैं। अस्थि विसर्जन भी आप ही कर देना या किसी और से करवा देना।’ चिता में जो लाश जल रही थी वो एक पिता की थी। फोन पर जो बार-बार कह रही थी नहीं आ पाएंगे वो थीं, उनकी बेटियां। ब्लैकबोर्ड में इसबार स्याह कहानी एक ऐसे पिता की जिसका अंतिम संस्कार गैरों ने किया, बेटियां फोन पर पूछती रहीं लाश जलने में कितना वक्त लगेगा… मरने वाले शख्स का नाम था- शिवचरण गुप्ता। शिवचरण गुप्ता हरियाणा के ककरौली गांव के रहने वाले थे। सालों पहले मुंबई चले गए थे। वहीं कपड़ों का बिजनेस करते थे। मुंबई से कपड़े नेपाल सप्लाई करते थे। उनकी पत्नी और तीन बेटियां भी उनके साथ किराए के मकान में रहती थीं। शिवचरण का एक भाई है। कुछ बातों की वजह से उनकी आपस में बातचीत बंद थी। उनकी पूरी दुनिया पत्नी और बेटियों के इर्द-गिर्द ही सिमटी हुई थी। बेटियां बड़ी हुई और धीरे-धीरे तीनों की शादी हो गई। बड़ी बेटी नीता की शादी नेपाल में हुई। मझली बेटी प्रिया की मुंबई में और सबसे छोटी बेटी चारू की उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ में। बेटियों की शादी के बाद घर में केवल शिवचरण और उनकी पत्नी ही रह गए थे। काम के सिलसिले में उनका नेपाल आना-जाना लगा रहता। जब बेटियों की शादी हो गई तो पत्नी को भी अपने साथ नेपाल ले जाते थे। धीरे-धीरे दोनों की तबीयत खराब रहने लगी। एकबार शिवचरण की पत्नी को तेज बुखार हुआ और बीपी भी बढ़ गया। वो चक्कर खाकर गिर पड़ीं। शिवचरण उन्हें डॉक्टर के पास लेकर गए तो उसने दवाई देकर रेस्ट करने को कहा। शिवचरण ने घर आते ही बेटियों को फोन किया। उनसे कहा- ‘मां की तबीयत खराब है। डॉक्टर ने बेड रेस्ट कहा है। हो सके तो कुछ दिन के लिए घर आ जाओ। मां की देखभाल करने के लिए।’ बेटियों ने अपने बच्चों के स्कूल का हवाला देकर बात टाल दी। ऐसा एक नहीं कई बार हुआ। शिवचरण काम छोड़कर घर बैठ जाते और पत्नी की देखभाल करते। धीरे-धीरे पैसों की दिक्कत होने लगी। घर का किराया देने में भी परेशानी होने लगी। एकबार शिवचरण तीन महीने तक घर का किराया नहीं दे सके। मकान मालिक ने कहा- देखो शिवचरण, मैं तुम्हारी दिक्कतों को समझता हूं, लेकिन तीन महीने हो चुके हैं। तुम लोग अपने रहने का बंदोबस्त कहीं और कर लो। उस दिन शिवचरण ने पत्नी से कहा- ‘क्यों न हम लोग वृद्धाश्रम चलें।’ पत्नी ने उनकी परेशानियों के देखते हुए तुरंत हामी भर दी। आखिर उन्हें मुंबई छोड़ना पड़ा और वो हरियाणा आ गए। यहीं उन्होंने एक वृद्धाश्रम के बारे में पता किया और पत्नी के साथ रहने लगे। बेटियों को भी इस बात से कोई परेशानी नहीं थी। बेटियां अक्सर वीडियो कॉल पर बात करती रहती। साल 2024 का नवंबर महीना था। शिवचरण की पत्नी की तबीयत बहुत ज्यादा खराब हुई और उनकी मौत हो गई। उस वक्त मां के अंतिम संस्कार में भी तीनों बेटियां नहीं आईं। पत्नी की मौत के बाद शिवचरण अकेले हो गए। करीब एक साल तक वो उसी वृद्धाश्रम में रहे। फिर वो दूसरे वृद्धाश्रम आ गए। इस वृद्धाश्रम के रसोइया शिव बताते हैं कि आखिरी रात में गुप्ता जी बेचैन थे। मैंने दलिया-खिचड़ी बनाई, लेकिन उन्होंने खाने से मना कर दिया। कई बार पूछने पर बोले- अनार और आलू बुखारा ले आओ। मैं फौरन बाजार गया और ले आया। काटकर उनके बिस्तर के बगल वाली टेबल पर रख दिया। वो धीरे-धीरे खाने लगे। तभी उनकी एक बेटी का वीडियो कॉल आया। शायद वह नेपाल वाली थी। उधर से आवाज आई- पापा, क्या खा रहे हो? ठीक हो? गुप्ताजी बोल रहे थे- ‘हां, हां बिटिया राजा, मैं बिल्कुल ठीक हूं। फल खा रहा हूं। तुम लोग परेशान मत हो। चलो, मुझे नींद आ रही है। मैं सोने जा रहा हूं। तुम लोग भी खाना खालो।’ इतना कहकर उन्होंने फोन काट दिया और लेट गए। वो बेटी को प्यार से बिटिया राजा ही कहते थे। अगली सुबह के तीन बजे एक बूढ़ी महिला चीखती हुई आई। बोली- शिव भइया, गुप्ता जी बाथरूम में बेसुध पड़े हैं। बदन पर कपड़े भी नहीं हैं। सुनते ही मैं अपने एक साथी के साथ बाथरूम की ओर भागा। देखा- गुप्ता जी फर्श पर पड़े थे। उन्हें झटके आ रहे थे। शरीर कांप रहा था। मैंने सबसे पहले उन्हें एक चादर में लपेटा। पूरी ताकत से उनकी छाती दबाने लगा, लेकिन कुछ देर में उनका शरीर एकदम शांत पड़ गया। नब्ज टटोली तो पता चला उनकी मौत हो गई है। मैंने अपने साथी की मदद से शव को बेड पर उठाकर रखा। तुरंत आश्रम के संचालक आनंद जी को फोन किया। उन्होंने कहा- ‘गुप्ता जी की बेटियों को फोन करता हूं। शायद वो आ जाएं। फिर सुबह होते ही अंतिम संस्कार कर देंगे।’ शिव कहते हैं, ‘पिछले कई दिनों से गुप्ता जी की तबीयत खराब थी। मैंंने आश्रम के संचालक से कहकर उनकी बेटियों को फोन भी करवाया था कि पिता के अंतिम दर्शन करने आ जाओ। अब उनकी तबीयत ठीक नहीं है। बेटियों ने एकबार भी नहीं कहा कि वो मिलने आएंगी।’ इससे आगे की कहानी आश्रम संचालक आनंद बताते हैं- ‘जिस दिन गुप्ता जी का देहांत हुआ मैंने नेपाल वाली बेटी नीता को फोन किया। बताया कि आपके पिताजी अब इस दुनिया में नहीं रहे। आप कब तक आएंगी? पहले तो वो कुछ देर तक चुप रही, फिर बोली- मैं तो बहुत दूर हूं। आप मुंबई वाली बहन प्रिया से पूछ लो। शायद वो आ जाए।’ ये कहकर उसने फोन रख दिया। मैंने तुरंत प्रिया को फोन किया। वो कहने लगी- ‘इतनी जल्दी कैसे आऊंगी। ट्रेन में रिजर्वेशन ही नहीं मिलेगा। वैसे भी हम लोगों को आकर करना ही क्या है। आप लोग ही अंतिम संस्कार कर दीजिए। हम लोगों को जलती चिता का वीडियो बनाकर भेज दीजिएगा। हो सके तो वीडियो कॉल पर भी दिखा दीजिएगा।’ बेटियों की बातें सुनकर मैं परेशान हो गया। सोचने लगा कि जिस आदमी ने पूरी जिंदगी इन बेटियों को पालने में लगा दी, वो अंतिम संस्कार में भी आने को तैयार नहीं हैं। अगर वो कहती कि एक-दो दिन में आ जाएंगी, तो मैं शव को बर्फ की सिल्लियों पर रख देता। लेकिन तीन बेटियों में से कोई भी आने को तैयार नहीं हुई। हालांकि, किसी के अंतिम संस्कार पर बेटे न आएं ये हमारे लिए कोई नई बात नहीं है। कई बेटे तो ऐसे थे जिन्हें मां-बाप के बीमार होने की खबर दी गई तो बोले- ‘जब तक बुड्ढा-बुड्ढी मर न जाएं, हमें फोन मत करना।’ बेटों की ये बातें सुनकर मां-बाप कह देते हैं- ‘बाबूजी, कोई ऐसा इंजेक्शन लगवा दो, जिससे की अभी ही प्राण निकल जाएं।’ लेकिन किसी की बेटियां ऐसा कर सकती हैं, ये हमने भी पहली बार देखा था। खैर, हम सब गुप्ता जी के अंतिम संस्कार की तैयारी में लग गए। उनकी आंखें दान करवाईं, फिर श्मशान ले गए। कुछ लोगों ने कफन से लेकर लकड़ी तक, सभी चीजें खरीदकर श्मशान घाट पर रखवा दी थीं। जब चिता जलने लगी तब बेटियों को वीडियो कॉल किया गया। उसके बाद जो हुआ उसके वीडियो तो सभी ने देखे। वो वीडियो वायरल होने के बाद शिवचरण गुप्ता के भाई महेंद्र गुप्ता का फोन आया। बोले- ‘मैं अपने भाई का अस्थि विसर्जन करने के लिए हरिद्वार आऊंगा। बस ये बता दीजिए कब आना है।’ मैंने उन्हें तारीख बता दी। तय तारीख पर मैं अस्थियां लेकर हरिद्वार पहुंचा। महेंद्र गुप्ता वहीं मिले। वो अहमदाबाद से आए थे। हम दोनों ने मिलकर अस्थियां विसर्जित कीं। जब उनसे शिवचरण गुप्ता के बारे में पूछा, तो वो फूट-फूटकर रोने लगे। कहने लगे- श्मशान का वीडियो देखकर पता चला कि भाई अब तक जिंदा था और वृद्धाश्रम में रहता था। मुझे तो यही पता था कि 2015 के नेपाल भूकंप में भाई-भाभी की मौत हो गई थी। हमारी तो तीनों बेटियों से भी बात नहीं होती थी।’ आनंद कहते हैं, ‘जब श्मशान का वीडियो वायरल हुआ तब कुछ मीडिया वालों ने बेटियों को फोन कर दिया। तब आजमगढ़ वाली बेटी ने मुझे फोन किया और भद्दी गालियां देते हुए बोली- ‘आपकी हिम्मत कैसे हुई किसी को मेरा नंबर देने की। आपकी वजह से हमलोगों की बदनामी हो रही है।’ वृद्धाश्रम में शिवचरण के साथी हरवंश लाल कहते हैं, ‘गुप्ता जी दिनभर मोबाइल में भजन सुनते रहते थे। ज्यादा बातचीत नहीं करते थे। दिन में दो-तीन बार बेटियों का फोन आ जाता था। वो हमेशा कहते- बिटिया राजा, मैं यहां बिल्कुल ठीक हूं। मेरी चिंता मत करो। एक बार मैंने कहा कि जब बेटियों से इतना प्यार करते हो, तो उनके साथ क्यों नहीं रहते। वो कहने लगे- ‘मैं किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता। बेटियों के घर का पानी भी नहीं पीना चाहिए। उनके यहां रहने से अच्छा, परलोक चला जाऊं।’ शिवचरण गुप्ता की दो बेटियों- नीता और प्रिया को भास्कर रिपोर्टर नीरज झा ने कई बार फोन किया, उनसे बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। नेपाल में रह रही बड़ी बेटी नीता को वॉट्सएप पर मैसेज भी किए, लेकिन उनका कोई रिस्पॉन्स नहीं आया। वहीं, मुंबई वाली बेटी प्रिया ने पहली बार फोन उठाया, लेकिन पहचान जानते ही नंबर ब्लॉक कर दिया। शिवचरण गुप्ता के बड़े भाई महेंद्र गुप्ता से भी कई बार बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई रिप्लाई नहीं किया। उन्होंने भी नंबर ब्लॉक कर दिया।
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