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पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) ने विधानसभा चुनाव के लिए बिसात बिछानी शुरू कर दी। पार्टी ने अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में हलका इंचार्ज नियुक्त करने शुरू कर दिए। पार्टी मई से लेकर अब तक 14 हलकों में नए हलका इंचार्ज नियुक्त कर चुकी है। सबसे रोचक बात यह है कि पार्टी ने पांच ऐसे हलकों में भी हलका इंचार्ज नियुक्त कर दिए हैं जिनमें पहले से आम आदमी पार्टी के ही विधायक हैं। अब सवाल यही उठता है कि पार्टी विधानसभा चुनाव 2027 में हलका इंचार्ज को टिकट देगी या फिर मौजूदा विधायक को। जो भी हो, लेकिन हलके के कार्यकर्ताओं और आम लोगों में भी असमंजस बन गया है कि वो आगे किसके साथ काम करें? पार्टी सूत्रों की मानें तो हाईकमान ने ऐसे हलकों की एक लिस्ट तैयार की है जहां पर विधायकों के साथ हलका इंचार्ज लगाए जाने हैं वहीं पॉलिटिकल एक्सपर्ट का मानना है कि पार्टी सिटिंग विधायक के होते हुए हलका इंचार्ज लगा रही है जिसका सीधा मतबल है कि सुप्रीमो विधायकों के कामकाज से संतुष्ट नहीं है। इन हलकों में सिटिंग MLA के साथ लगाए गए हलका इंचार्ज खरड़ विधानसभा क्षेत्र: यहां से आम आदमी पार्टी की सिटिंग विधायक अनमोल गगन मान हैं। अनमोल गगन मान सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं। इसके बावजूद पार्टी हाईकमान ने परमिंदर सिंह गोल्डी को खरड़ का नया हलका इंचार्ज नियुक्त कर दिया है। गोल्डी की नियुक्ति के बाद से ही क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में भारी हलचल है। चमकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र: इस सुरक्षित सीट से डॉ. चरणजीत सिंह चन्नी आम आदमी पार्टी के मौजूदा विधायक हैं। यहां पार्टी ने संगठन को पुनर्गठित करते हुए जसबीर सिंह गढ़ी को हलका इंचार्ज की कमान सौंपी है। जिम्मेदारी मिलने के बाद से क्षेत्र के प्रशासनिक कामकाज में भी उनकी सक्रियता बढ़ गई है। पट्टी विधानसभा क्षेत्र: सीमावर्ती हलके पट्टी से लालजीत सिंह भुल्लर विधायक हैं। पार्टी ने जसकंवर सिंह गिल (जस्सा गिल) को यहां का नया हलका इंचार्ज नियुक्त किया है। पूर्व मंत्री के हलके में नया इंचार्ज लगाया जाना पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए काफी चौंकाने वाला रहा है। बठिंडा रूरल विधानसभा क्षेत्र: यहां से अमित रतन कोटफत्ता आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। विवादों और राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बीच पार्टी ने यहां गोपाल सिंह को हलका इंचार्ज नियुक्त कर दिया है। गोपाल सिंह की नियुक्ति से साफ संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी इस क्षेत्र में नए सिरे से अपना जनाधार मजबूत करना चाहती है। अमृतसर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र: यहां से कुंवर विजय प्रताप आम आदमी पार्टी के विधायक हैं। आम आदमी पार्टी ने उन्हें अभी पार्टी से नहीं निकाला है। पार्टी ने वहां इंप्रूवमेंट में ट्रस्ट के चेयरमैन कर्मजीत सिंह रिंटू को हलका इंचार्ज लगाया है। अब वो ही अमृतसर नॉर्थ में विधायक के होते हुए सभी काम करवा रहे हैं। सिटिंग विधायक के रहते हलका इंचार्ज लगाने के मायने, एक्सपर्ट से जानिए… 1. टिकट कटने का सीधा संकेत: पॉलिटिकल एक्सपर्ट एवं सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद बातिश का कहना है कि पंजाब की राजनीति में हलका इंचार्ज नियुक्त करने का सीधा और स्पष्ट मतलब है कि अगले चुनाव की तैयारी में अभी से जुट जाओ। सिटिंग एमएलए के रहते हुए भी अगर पार्टी नए हलका इंचार्ज की नियुक्ति कर रही है, तो इसका सीधा संदेश यह है कि आगामी विधानसभा चुनाव में संबंधित विधायक की टिकट पर तलवार लटक गई है। जब पार्टी किसी दूसरे नेता को हलके की कमान सौंप देती है, तो वह नेता अपने स्तर पर कार्यकर्ताओं की फौज तैयार करने लगता है और जनता के बीच अपनी पैठ बनाता है। ऐसे में चुनाव आते-आते मौजूदा विधायक का प्रभाव कम हो जाता है और हलका इंचार्ज स्वाभाविक रूप से टिकट का सबसे प्रबल दावेदार बन जाता है। 2. बाकी विधायकों को भी कड़ा मैसेज: पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रमोद बातिश का आगे कहना है कि आम आदमी पार्टी ने 10 ऐसे हलकों में भी इंचार्ज लगाए हैं जहां पर उनके विधायक नहीं हैं। उन हलकों में हलका इंचार्ज नियुक्त करके विकास कार्यों और जनता की समस्याओं को हल करवाने की पूरी जिम्मेदारी उनको ही सौंपी गई है। वे ही अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर विधायकों से संबंधित सभी काम करवा रहे हैं और उनकी सीधे पब्लिक से कनेक्टिविटी है। लेकिन जिन 5 हलकों में सिटिंग एमएलए हैं, वहां इंचार्ज लगाने का मकसद सिर्फ उन 5 हलकों तक सीमित नहीं है। इसके जरिए पार्टी हाईकमान ने पंजाब के बाकी सभी विधायकों को भी एक कड़ा और स्पष्ट मैसेज दे दिया है कि यदि उनके काम, जनता में छवि या ग्राउंड रिपोर्ट सही नहीं पाई गई, तो उनके हलकों में भी नया हलका इंचार्ज तैनात करने में देरी नहीं की जाएगी। 3. एमएलए के बावजूद हलका इंचार्ज अटपटा फैसला: पॉलिटिकल एक्सपर्ट व सीनियर जर्नलिस्ट वैवस्वत वैंकट का कहना है कि सिटिंग एमएलए होने पर अकसर राजनीतिक पार्टियां अलग से हलका इंचार्ज नहीं लगाती हैं। उन्होंने विश्लेषण करते हुए कहा कि यदि किसी विधायक की परफॉर्मेंस ठीक नहीं भी होती, तब भी पार्टियां सार्वजनिक तौर पर हलका इंचार्ज नियुक्त करने से बचती हैं। आम तौर पर ऐसी स्थितियों में पार्टी अंदरखाने किसी एक भरोसेमंद नेता को गतिविधियां तेज करने और कैडर को संभालने को कह देती है, ताकि जनता के बीच असंतोष या गुटबाजी का संदेश न जाए। वैंकट मानते हैं कि खुले तौर पर विधायक के होते हुए इंचार्ज तैनात करना एक अटपटा और जोखिम भरा फैसला है। 4. आप की इलेक्शन स्ट्रैटेजी और इंटरनल सर्वे का असर: पॉलिटिकल एक्सपर्ट वैवस्वत वैंकट का कहना है कि AAP राजनीति और चुनावों में नए-नए प्रयोग करने के लिए जानी जाती है। उनके मुताबिक, सिटिंग विधायक के रहते हुए अलग से हलका इंचार्ज लगाना भी AAP की एक सोची-समझी इलेक्शन स्ट्रैटेजी का ही हिस्सा है। आप हाईकमान लगातार गुप्त एजेंसियों और अपनी अंदरूनी टीमों के जरिए विधानसभा क्षेत्रों का इंटरनल सर्वे कराता रहता है। इस आंतरिक सर्वेक्षण के हिसाब से जहां-जहां पार्टी को विधायकों के प्रति जनता में नाराजगी, निष्क्रियता या अन्य कमजोरियां दिखीं, उन्होंने तुरंत उसका तोड़ निकालने के लिए नए हलका इंचार्ज लगाने शुरू कर दिए। जाहिर सी बात है कि जब सरकार और संगठन की ओर से सभी पावर और निर्णय लेने के अधिकार हलका इंचार्ज को स्थानांतरित कर दिए जाएंगे, तो मौजूदा विधायक खुद ही बैकफुट पर चले जाएंगे। इससे पार्टी को चुनाव के वक्त ऐन मौके पर टिकट काटने में कोई बड़ा राजनीतिक नुकसान या बगावत झेलनी नहीं पड़ेगी, क्योंकि तब तक हलका इंचार्ज अपनी जमीन पूरी तरह तैयार कर चुका होगा। 4. हलकों में हलका इंचार्ज का पब्लिक कनेक्ट: पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि अभी तक हलका इंचार्ज का कल्चर सिर्फ उन हलकों में देखने को मिलता था जहां किसी अन्य विरोधी पार्टी का विधायक चुनकर आया था। वहां सत्ताधारी पार्टी अपना हलका इंचार्ज बनाकर विकास कार्य और प्रशासनिक चैनल चलाती थी। परंतु, आम आदमी पार्टी ने अब सिटिंग एमएलए के साथ जो हलका इंचार्ज लगाए हैं, अब उन हलकों में भी विधायक का कामकाज वही देखेंगे। पब्लिक, स्थानीय नेताओं और जिला प्रशासन के साथ उनकी सीधी डीलिंग रहेगी। अधिकारियों को भी अब स्पष्ट निर्देश होंगे कि वे हलका इंचार्ज की सिफारिशों को प्राथमिकता दें। 6. कार्यकर्ताओं के सामने असमंजस की स्थिति: पवनदीप शर्मा का कहना है कि पार्टी के इस नए मॉडल से भले ही हाईकमान को अपनी रणनीति मजबूत दिख रही हो, लेकिन धरातल पर स्थानीय नेताओं, आम कार्यकर्ताओं और आम जनता के सामने अजीब स्थिति पैदा हो गई है। ग्राउंड लेवल के कार्यकर्ता इस बात को लेकर परेशान हैं कि वे अपनी अर्जियों, विकास कार्यों और सिफारिशों के लिए सिटिंग विधायक के पास जाएं या फिर पार्टी द्वारा आधिकारिक तौर पर बनाए गए नए हलका इंचार्ज के पास। विधायक के पास जाने पर इंचार्ज गुट की नाराजगी का डर रहता है और इंचार्ज के पास जाने पर विधायक समर्थक नाराज हो सकते हैं।
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AAP के MLA-इंचार्ज में से टिकट किसको?:5 हलकों में विधायकों के साथ नियुक्त किए; पॉलिटिकल एक्सपर्ट से जानिए क्या हैं मायने
