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सहरसा के बनगांव और देवनवनगोपाल मौजा की कृषि भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के लिए अधिग्रहित करने के प्रस्ताव का स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने कड़ा विरोध किया है। शुक्रवार शाम बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी (डीएम) को ज्ञापन सौंपकर भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि बनगांव (थाना संख्या-137) और देवनवनगोपाल (थाना संख्या-141 एवं 142) की उपजाऊ कृषि भूमि को औद्योगिक क्षेत्र के लिए दोबारा चिह्नित किया गया है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो हजारों किसानों, मत्स्यपालकों, पशुपालकों और कृषि पर निर्भर परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट उत्पन्न हो जाएगा। ग्रामीणों के विरोध पर पहले भी रोका गया भूमि अधिग्रहण ग्रामीणों का कहना है कि इसी क्षेत्र में पहले भी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि, स्थानीय लोगों के व्यापक विरोध और सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (एसआईए) की रिपोर्ट के बाद इसे रोक दिया गया था। ऐसे में उसी भूमि को फिर से अधिग्रहण के लिए चिह्नित करना ग्रामीणों की भावनाओं के विपरीत है। ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि यह क्षेत्र केवल धान, गेहूं और अन्य फसलों की खेती तक सीमित नहीं है। यह मत्स्य पालन और मखाना उत्पादन का भी एक प्रमुख केंद्र है। लगभग 100 एकड़ क्षेत्र में निजी तालाबों के माध्यम से बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन होता है, जिससे स्थानीय बाजारों में मछली की आपूर्ति होती है और सैकड़ों परिवारों को रोजगार मिलता है। मखाना की खेती कर आजीविका चला रहे किसान इसके अतिरिक्त, यह इलाका मखाना उत्पादन के लिए भी उपयुक्त माना जाता है, जहां बड़ी संख्या में किसान और युवा वर्षों से मखाना की खेती कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जनभावनाओं का सम्मान करते हुए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और किसानों व ग्रामीणों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
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सहरसा के बनगांव-देवनवनगोपाल में भूमि अधिग्रहण का विरोध:ग्रामीणों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन,मत्स्य पालन और मखाना उत्पादन पर संकट की आशंका
