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जबलपुर में रानीताल स्थित बीएसएनएल टेलीग्राफ फैक्ट्री में बुधवार को जर्जर दीवार गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई। हादसे के बाद प्रशासन ने फैक्ट्री सील कर दी है और उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक, फैक्ट्री से स्क्रैप निकालने का ठेका था, लेकिन मौके पर दीवार तोड़ने का काम किया जा रहा था। हादसे के बाद ठेकेदार अब्दुल बशीर का मोबाइल बंद है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।फैक्ट्री के अंदर जर्जर बिल्डिंग तोड़ने का काम चल रहा था। पश्चिम बंगाल निवासी अब्दुल वशीर और जबलपुर निवासी मोहम्मद अकबर अपने अन्य 10 साथियों के साथ काम कर रहे थे। आचानक ही भर-भराकर दीवार गिरी, जिसमें दोनों दब गए। घटना के बाद मौके पर साथी कर्मचारियों ने जैसे-तैसे दोनों को मलबे से बाहर निकाला, पर तब, तक उनकी मौत हो गई थी। बारिश के बीच गिरी जर्जर दीवार बुधवार दोपहर बारिश के दौरान फैक्ट्री परिसर में जर्जर निर्माण तोड़ने का काम चल रहा था। पश्चिम बंगाल निवासी अब्दुल वशीर और जबलपुर निवासी मोहम्मद अकबर अपने 10 अन्य साथियों के साथ काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक जर्जर दीवार भरभराकर गिर गई। दोनों मजदूर मलबे में दब गए। साथी कर्मचारियों ने उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी। सूचना मिलते ही मदनमहल थाना पुलिस और टेलीग्राफ फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर जांच शुरू की और परिवारों को सूचना दी। 1.40 करोड़ में मिला था ठेका फैक्ट्री परिसर में मौजूद शेड को हटाने के लिए 3 महीने पहले जयपुर, राजस्थान की एएस कंपनी को 1 करोड़ 40 लाख रुपए में टेंडर दिया गया था। कंपनी ने अब्दुल बशीर को ठेका दिया था और उसे मौके पर मौजूद रहना था। हादसे के समय ठेकेदार मौके पर नहीं था। हादसे के बाद उसने जल्द जबलपुर आने की बात कही, लेकिन कुछ समय बाद मोबाइल बंद कर लिया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है। स्क्रैप के ठेके पर उठे सवाल पुलिस जांच में सामने आया कि कंपनी को टेलीग्राफ फैक्ट्री से स्क्रैप निकालने का ठेका मिला था। इसके बावजूद मौके पर फर्श की टाइल्स और ईंटें उखाड़ी जा रही थीं और दीवार तोड़ने का काम चल रहा था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब ठेका स्क्रैप निकालने का था, तो दीवार तोड़ने का काम क्यों किया जा रहा था। इसी दौरान दीवार गिरने से दो मजदूरों की मौत हो गई। मजदूरों को नहीं मिल रहा था PF हादसे के बाद गुरुवार को ईपीएफओ के अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच की। इसमें सामने आया कि वहां काम कर रहे मजदूरों को पीएफ का लाभ नहीं मिल रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, मजदूर अकुशल श्रमिकों की श्रेणी में थे, जो पीएफ के अंतर्गत नहीं आते हैं। मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मृतक अकबर के परिवार की स्थिति खराब मृतक मोहम्मद अकबर परिवार की जिम्मेदारी संभालते थे। उनके परिवार में पत्नी नीला बानो, दो बेटे मोहम्मद अशरफ और अमान अंसारी तथा एक बेटी अनादिया बानो हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब है और अकबर ही परिवार की जिम्मेदारी संभालते थे। दोनों मृतक मजदूरों के नाम श्रमिक संबल योजना में पंजीकृत हैं। उनके परिवारों को जल्द सरकारी सहायता दी जाएगी। स्थानीय लोगों ने दोनों परिवारों को 1-1 करोड़ रुपए मुआवजा देने की मांग की है।
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जबलपुर में बीएसएनएल टेलीग्राफ फैक्ट्री हुई सील:दीवार गिरने से 2 मजदूरों की मौत; कंपनी की लापरवाही पर सवाल, स्क्रैप का ठेका फिर भी दीवार तोड़ी
