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आज का एक्सप्लेनर:‘हम निशु के बाप का सिर फाड़े, फिर भी थाने नहीं गए’- कौन है डींग हांकने वाला स्वतंत्र भारद्वाज, हिरासत के बाद आगे क्या होगा




मैंने निशु के बाप का सर फोड़ा, मैं जेल तक नहीं गया। हम लोग रात भर घूम रहे थे। कपिल मिश्रा, चिराग पासवान, मोदी जी बड़े भैया हैं।’ एक पॉडकास्ट में ये बयान देकर स्वतंत्र भारद्वाज चर्चा में आ गया। वीडियो वायरल हुआ, तो विपक्षी नेताओं ने बीजेपी को निशाने पर लिया। कॉकरोच पार्टी ने संसद मार्ग थाने का घेराव किया और आरोप लगाया कि पुलिस ने दबाव में आकर स्वतंत्र पर हत्या की कोशिश के बजाय हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और उसको छोड़ दिया। अब पुलिस ने स्वतंत्र को बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया गया है। आखिर ये स्वतंत्र भारद्वाज है कौन, किस वारदात की डींगें हांक रहा और गिरफ्तारी के बाद आगे क्या होगा, पूरी कहानी आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कौन है स्वतंत्र और अभी चर्चा में क्यों है? जवाब: 21 साल का स्वतंत्र भारद्वाज पटना के कंकरबाग का रहने वाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वतंत्र UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली आया था। स्वतंत्र के मुताबिक, उसने 2022 में दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। इसके बाद सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों से जुड़े प्रदर्शनों में शामिल होने लगा। स्वतंत्र सोशल मीडिया पर अक्सर विवादित और राजनीतिक मुद्दों से जुड़े वीडियो डालता है। आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात भी करता है। उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर 1.8 लाख फॉलोअर्स हैं। खुद को बीजेपी का समर्थक बताता है। बायो में लिखा है- ‘स्वतंत्र सनातनी योद्धा।’ 2 अगस्त को एक यूट्यूब चैनल पर उसका करीब 1 घंटे का पॉडकास्ट रिलीज हुआ। इसमें उसने बेहद विवादित भाषा में खास तौर पर मुस्लिम, आरक्षण और कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर कई बयान दिए। स्वतंत्र ने जंतर-मंतर पर CJP के प्रोटेस्ट के दौरान की घटना का जिक्र करते हुए खुद ही दावा किया कि उस पर हत्या की कोशिश का मामला चलना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। स्वतंत्र कहता है, ‘निशु के बाप का हम सिर फाड़े। इसमें हाफ मर्डर की धारा 307 लगती है। सर पर 60 टांका लगा हुआ था, बंदा मरने की स्थिति में एम्बुलेंस में जा रहा था। उसकी बेटी थाने के बाहर कह रही थी कि अगर मेरे पिता को इंसाफ नहीं मिला, तो हम जहर खाकर जान दे देंगे। स्वतंत्र अगले दिन बाहर। पूरी दुनिया को पता होना चाहिए कि हम जेल भी नहीं गए, रात भर घूम रहे थे।’ स्वतंत्र आगे कहता है कि वो इसलिए बचा, क्योंकि उस पर हनुमान की कृपा है और कपिल मिश्र, चिराग पासवान उसके बड़े भैया हैं। पीएम मोदी बड़े भैया हैं।’ स्वतंत्र एक तस्वीर में पुलिस का प्लास्टिक वाला बेंत पकड़े है। इस पर स्वतंत्र ने कहा, ‘आप मेरा जूता देख सकते हैं? ये जूता दिल्ली पुलिस का है। मैंने कोई फॉर्म नहीं भरा, लेकिन मैं दिल्ली पुलिस की तरह घूमता हूं।’ CJP का भी आरोप है कि प्रोटेस्ट के दौरान सादे कपड़ों में कई अज्ञात लोग लाठियां लहराते और प्रदर्शनकारियों पर हमला करते देखे गए थे। स्वतंत्र की क्लिप वायरल होने के बाद राहुल गांधी, सांसद चंद्रशेखर आजाद और आम आदमी पार्टी के विपक्षी नेताओं ने बीजेपी और केंद्र सरकार को निशाने पर लिया। कॉकरोच जनता पार्टी ने भी स्वतंत्र की गिरफ्तारी की मांग की। सवाल-2: आखिर CJP प्रोटेस्ट के दौरान स्वतंत्र ने किया क्या था? जवाब: इस मामले में दर्ज FIR के मुताबिक, 23 जून की शाम करीब 5:30 बजे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट में शामिल एक स्टूडेंट निशु आजाद के पिता गाजियाबाद के 38 साल के संजय कुमार पर हमला हुआ। उन्होंने बताया कि वह अपने फोन से प्रोटेस्ट की रिकॉर्डिंग कर रहे थे। तभी एक लड़के उनसे बहस करने लगा। संजय ने उससे कहा कि वह उसकी रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे। बहस बढ़ी, तो 2-3 लोग और पहुंचे और संजय पर हमला कर दिया। उनके सिर पर कई घूंसे मारे। लोहे के कड़े जैसी किसी चीज से हमला किया गया। इसके बाद पुलिस स्वतंत्र भारद्वाज और उनके साथी सूरज कुमार (24) को गिरफ्तार करके ले गई। जबकि संजय को दिल्ली के RML हॉस्पिटल ले जाया गया और मेडिकल रिपोर्ट में दर्ज किया गया कि उनके सिर पर दो गहरे घाव हैं। हालांकि निशु ने 24 जून को अपने ट्विटर अकाउंट से दो वीडियो पोस्ट किए थे। एक में वो रोते हुए बता रही हैं कि थोड़ी देर पहले कुछ लोगों ने उनके पिता पर हमला किया है। दूसरे वीडियो के कैप्शन में निशु ने लिखा- ‘इन्हीं लोगों ने पापा पर हमला किया है। दिल्ली पुलिस से रिक्वेस्ट है कि इनको गिरफ्तार करके निष्पक्ष जांच के बाद सख्त सजा दी जाए।’ वीडियो में नीली शर्ट और हाथ में कड़ा पहने स्वतंत्र भारद्वाज मौजूद है। 3 सितंबर को CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाया, ‘संजय की खोपड़ी बुरी तरह फटी थी। हत्या की कोशिश का मामला बनता, लेकिन दिल्ली के DCP सचिन शर्मा और ACP अजय शर्मा ने FIR में इसकी धारा जोड़ने से इनकार कर दिया, क्योंकि इससे स्वतंत्र भारद्वाज को गिरफ्तार करना पड़ता। हमसे कहा गया- जाओ कोर्ट से ऑर्डर लेकर आओ।’ निशु ने आरोप लगाया, ‘घटना के तुरंत बाद FIR दर्ज करवाई, लेकिन डेढ़ महीने से पुलिस कुछ नहीं कर रही। हमें मेडिकल के नाम पर घुमा रही है।’ सवाल-3: दिल्ली पुलिस का इस मामले में क्या रख है? जवाब: पुलिस ने इस मामले में BNS की सामान्य मारपीट की धारा (115) (2), 126(2), यानी जबरन किसी को रोकना और 3(5), यानी एक से ज्यादा लोगों का एकसाथ किसी अपराध के लिए एकजुट होना, में FIR दर्ज की थी। 3 सितंबर को दिल्ली पुलिस ने बयान जारी करके कहा कि संजय के सिर के स्कल, यानी खोपड़ी में फ्रैक्चर का दावा गलत है। पुलिस ने कहा, ‘एक आरोपी के कड़े से संजय के सिर में चोट आई। RML हॉस्पिटल की मेडिकल जांच से सामने आया कि चोट सामान्य थी। चोट कड़े से लगी है, न कि किसी धारदार हथियार से। खोपड़ी में फ्रैक्चर का दावा गलत है। सूरज और स्वतंत्र के खिलाफ FIR दर्ज करके पूछताछ की गई। उन्हें नोटिस जारी किए गए। कानून के मुताबिक कार्रवाई हुई है। जल्दी ही कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होगी।’ पुलिस ने ये भी कहा कि मामले में किसी बाहरी व्यक्ति के दखल या असर का आरोप गलत है। इधर दबाव में स्वतंत्र के तेवर नरम पड़ गए। उसने उल्टा आरोप लगाए, ‘ मैंने हमला नहीं, सेल्फ-डिफेंस किया। मेरी हत्या हो सकती थी। मेरा वीडियो बनाया जा रहा था। मैंने कैमरा नीचे किया, तो 10-15 लोगों ने मुझे नीचे गिरा दिया और मारने लगे। मेरे पास वीडियो सबूत है। मैंने खुद को बचाने के लिए हाथ चलाया, तो गलती से मेरा कड़ा उसके सिर पर लग गया। दिल्ली पुलिस जांच कर रही है। मैं पूरा सहयोग कर रहा हूं। मुझे साजिश के तहत फंसाया जा रहा है। जान से मारने की धमकी मिल रही है।’ एक वीडियो में निशु के पिता संजय कुमार चुनौती देने के लहजे में कह रहे हैं, ‘जब चाहे अकेले मिल लो, अगर 2 मिनट और पुलिस न आई होती, तो उनकी दशा देखने वाली थी।’ इधर स्वतंत्र की गिरफ्तारी की मांग को लेकर CJP और कई विपक्षी नेताओं ने धरना दिया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने स्वतंत्र को गिरफ्तार कर लिया और 2 अहम बातें कहीं- जांच के दौरान पॉडकास्ट में स्वतंत्र के बयान को ध्यान में रखा जाएगा। FIR में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ी जाएंगी। सवाल-4: इस मामले में आगे क्या हो सकता है? जवाब: सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं, ‘सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के मुताबिक SC/ST एक्ट लगाने पर पुलिस को कोर्ट में ये साबित करना होगा कि अपराध इसलिए हुआ, क्योंकि पीड़ित SC या ST समुदाय से है। अगर आरोपी को पहले से पीड़ित की जाति के बारे में जानकारी नहीं थी, तो ये मामला कोर्ट में नहीं टिकेगा।’ ‘जान से मारने की कोशिश की धाराएं बढ़ाई गईं, तो भी पुलिस को ये सफाई देनी पड़ेगी कि जब हथियार का इस्तेमाल नहीं हुआ और मेडिकल जांच में जानलेवा चोट की पुष्टि नहीं हुई, तो फिर दबाव के चलते मामला क्यों दर्ज हुआ’ जिन लोगों के राजनीतिक प्रभाव की बात कही जा रही है, कोर्ट पुलिस को उसकी जांच करने को कह सकता है।’ फिलहाल जिन धाराओं में मामला दर्ज है, वो जमानती धाराएं हैं। इनमें अधिकतम एक साल की सजा हो सकती है। ———- ये खबर भी पढ़िए… कॉकरोच जनता पार्टी चलाएंगे ये 12 लोग, सभी 35 साल से कम, जानिए इनकी कहानी; CJP असल में किसे डेंट मारेगी कॉकरोच जनता पार्टी फिलहाल राजनीति में नहीं आएगी। सरकार के लिए प्रेशर ग्रुप की तरह काम करेगी। 12 कोर सदस्यों में वकील, CA, इंजीनियर, पत्रकार शामिल हैं और सबकी उम्र 35 साल से कम। अगले महीने से ये पूरे देश में घूमकर सदस्यता अभियान चलाएंगे। पूरी खबर पढ़िए…



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