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श्योपुर में शुक्रवार को जन्माष्टमी का उत्सव मनाया गया। शहर में करीब 20 जगह मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं हुईं, जिनमें युवाओं ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। हजारेश्वर मंदिर में सुबह से श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। शाम 4 बजे के बाद यहां भीड़ बढ़ती गई और रात 12 बजे कृष्ण जन्म के बाद जयकारे गूंज उठे। हजारेश्वर मंदिर में देर रात तक भीड़ जन्माष्टमी पर हजारेश्वर मंदिर में विशेष आयोजन किए गए। श्रद्धालु माखन-मिश्री, फूलों की माला और पूजा सामग्री लेकर दर्शन के लिए पहुंचे। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के साथ मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने ‘भये प्रकट कृपाला दीनदयाला’ स्तुति गाई। इसके बाद भगवान की आरती की गई और प्रसाद बांटा गया। शहर में 20 जगह हुई मटकी फोड़ जिला मुख्यालय पर करीब 20 जगह मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं हुईं। युवाओं ने टीम बनाकर मटकी फोड़ने की कोशिश की। प्रतियोगिताओं को देखने के लिए भी लोग जुटे रहे। जीतने वाली टीमों और खिलाड़ियों को पुरस्कार दिए गए। मंदिरों और घरों में सजी झांकियां शहर के दूसरे मंदिरों में भी भगवान श्रीकृष्ण की झांकियां सजाई गईं। कई परिवारों ने घरों में बाल गोपाल की झांकी बनाकर पूजा की। रात 12 बजे जन्म के समय मंदिरों में घंटे-घड़ियाल और शंख बजाए गए। नामधारी संगत ने दिया एकता का संदेश नामधारी साध-संगत ने हिंदू समाज के साथ मिलकर जन्माष्टमी मनाई। कार्यक्रम में हिंदू-सिख एकता, आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश दिया गया। जगतार सिंह जौहल ने कहा कि नामधारी परंपरा में जन्माष्टमी और रामनवमी जैसे पर्व मनाने की परंपरा रही है। उन्होंने दोनों समाजों के बीच आपसी संबंधों को मजबूत करने की बात कही।
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श्योपुर में जन्माष्टमी पर 20 जगह मटकी फोड़:हजारेश्वर मंदिर में देर रात कृष्ण जन्म पर गूंजे जयकारे; घरों में सजी झांकियां
