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हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिले किन्नौर में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रही बारिश के कारण स्थानीय नदी-नालों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे सामान्य जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जिले के कई हिस्सों से भूस्खलन और बाढ़ जैसे हालात पैदा होने की खबरें आ रही हैं। लगातार बारिश के चलते सांगला घाटी को जोड़ने वाले मुख्य वेली ब्रिज की नींव के पास अचानक भारी भूस्खलन हो गया। इसके कारण पुल का सांगला की तरफ का हिस्सा पूरी तरह ढह गया। हालांकि, जिला प्रशासन की मुस्तैदी के चलते एक बड़ा हादसा होने से टल गया। सांगला के तहसीलदार हरदयाल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि खतरे को पहले ही भांप लिया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग करके वाहनों की आवाजाही को समय रहते रोक दिया गया था। उन्होंने बताया कि वर्तमान में सांगला और छितकुल क्षेत्र के लिए वाहनों को तहसील कार्यालय सांगला के वैकल्पिक मार्ग से डायवर्जन देकर सुरक्षित निकाला जा रहा है। लिप्पा में खड्ड का पानी रुकने से बनी कृत्रिम झील, कई मकान डूबे दूसरी ओर, लिप्पा क्षेत्र के पेजर खड्ड में रात के समय अचानक जलस्तर बढ़ने से लिप्पा बस स्टैंड के पास बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई। वहीं, तेती खड्ड का बहाव अवरुद्ध (ब्लॉक) होने के कारण पानी ने एक बड़ी कृत्रिम झील का रूप ले लिया है। इस झील का पानी इतनी तेजी से फैला कि लिप्पा बस स्टैंड के पास बने कई मकानों की पहली मंजिल पूरी तरह जलमग्न हो गई है। इसके अलावा, इलाके की मुख्य सड़क के भी पानी में बहने का खतरा लगातार बना हुआ है। मौसम साफ होने से राहत कार्य शुरू, प्रशासन अलर्ट पर दो दिनों की भारी तबाही के बाद आज सुबह से मौसम साफ हुआ है, जिससे धूप खिलने के बाद राहत और बचाव कार्यों में तेजी आई है। जिला प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है और सभी संबंधित विभागों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने स्थानीय निवासियों और क्षेत्र में आए पर्यटकों से अपील की है कि वे खराब मौसम के मद्देनजर नदियों, नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों के पास जाने से बचें और सुरक्षा नियमों का पालन करें।
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किन्नौर में भारी बारिश, वेली ब्रिज ढहा, घर डूबे:सांगला घाटी का संपर्क टूटा, लिप्पा में कई मकानों की पहली मंजिल जलमग्न, बड़ा हादसा बचा
