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टाइगर रिजर्व के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन जारी:संघर्ष समिति ने कृषि मंत्री के भाई से की मुलाकात, समस्या दूर करवाने की लगाई गुहार




धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व के विरोध में ग्रामीणों का आंदोलन शनिवार को 25वें दिन भी जारी रहा। सरमथुरा उपखंड क्षेत्र में चल रहे धरने को ग्रामीणों के साथ आसपास के क्षेत्रों से पहुंच रहे लोगों का भी समर्थन मिल रहा है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे वन्यजीवों को बचाने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन स्थानीय लोगों के घर, जमीन, रोजगार और भविष्य की कीमत पर विस्थापन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसी क्रम में धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल कृषि कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के आवास पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने टाइगर रिजर्व को लेकर ग्रामीणों की मांगों और चिंताओं की जानकारी देने के साथ सरकार से उनकी समस्याएं उठाने का अनुरोध किया। मंत्री किरोड़लाल मीणा की तबीयत खराब होने से नहीं हो सकी मुलाकात
संघर्ष समिति के अनुसार डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की तबीयत खराब होने के कारण उनसे सीधी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल की उनके भाई जगमोहन मीणा से लंबी बातचीत हुई। समिति ने उन्हें 25 दिनों से चल रहे आंदोलन, ग्रामीणों की मांगों और टाइगर रिजर्व को लेकर क्षेत्र में बनी चिंताओं की पूरी जानकारी दी। समिति का कहना है कि बातचीत के दौरान ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना गया और जल्द ही बातचीत का भरोसा दिया गया। इससे आंदोलनकारियों को सरकार के साथ बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद है। ‘स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा भी होनी चाहिए’
आंदोलनकारियों का कहना है कि बाघ और अन्य वन्यजीवों को बचाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा भी होनी चाहिए। समिति की मांग है कि टाइगर रिजर्व की प्रक्रिया आगे बढ़ाने से पहले प्रभावित ग्रामीणों के घर, जमीन, पारंपरिक रोजगार और रोजी-रोटी को लेकर सरकार साफ नीति बनाए। ग्रामीणों के अनुसार सरमथुरा क्षेत्र की पहचान लाल पत्थर और उससे जुड़े पारंपरिक रोजगार से रही है। बड़ी संख्या में परिवार पत्थर के काम पर निर्भर हैं। ऐसे में संरक्षण की प्रक्रिया के साथ स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी सुरक्षित रखने के लिए पक्का समाधान चाहिए। सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद
25 दिनों से जारी आंदोलन के दौरान संघर्ष समिति लगातार जनप्रतिनिधियों और सरकार से संवाद की मांग कर रही है। समिति का कहना है कि ग्रामीण शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें सरकार के सामने रख रहे हैं और किसी भी निर्णय से पहले प्रभावित लोगों की राय सुनी जानी चाहिए। कृषि मंत्री के आवास पर हुई वार्ता और मिले आश्वासन के बाद संघर्ष समिति को उम्मीद है कि सरकार इस मुद्दे पर जल्द सकारात्मक पहल करेगी। फिलहाल आंदोलन जारी है और ग्रामीणों की नजर आगामी बातचीत एवं सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।



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