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भास्कर न्यूज | झलप बीती 5 सितंबर को झलप-बागबाहरा मार्ग पर स्थित छिलपावन चौक के पास जर्जर सड़क और 450 से अधिक जानलेवा गड्ढों के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासनिक आश्वासन के बाद शांत तो हो गया था, लेकिन ज़मीनी हकीकत आज भी नहीं बदली है। चक्काजाम समाप्त कराने पहुंचे अधिकारियों ने तुरंत मरम्मत कराने का वादा किया था, लेकिन इसके बाद हरकत में आए विभाग ने केवल सतही खानापूर्ति कर अपनी जिम्मेदारी से इतिश्री कर ली है। आंदोलन के तत्काल बाद रात के वक्त जैसे-तैसे सड़क में फंसे ट्रकों को निकालकर औपचारिकता पूरी की गई। गड्ढों में कुछ गिट्टी डालकर सड़क को केवल चलने लायक दिखाने की कोशिश हुई, लेकिन पेट्रोल पंप के पास बने जानलेवा गड्ढे को भरने की जहमत किसी ने नहीं उठाई। विभाग ने वहां महज एक ट्रिप बजरी डंप कर पल्ला झाड़ लिया है। बजरी को गड्ढे में बिछाने और समतल करने के लिए आखिर किसका इंतजार किया जा रहा है, यह बड़ा सवाल है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अधिकारियों का रवैया भी सवालों के घेरे में है। विभाग की ओर से महज दो डंपर गिट्टी और एक डंपर बजरी डालकर इतिश्री कर ली गई। इतने बड़े विभाग का फंड की कमी का रोना रोना जिले के प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आलम यह है कि सड़क मरम्मत कार्य में जिस जेसीबी मशीन का उपयोग किया गया, उसके मालिक तक को अब तक भुगतान नहीं किया गया है। बिना डामरीकरण के मरम्मत से बढ़ा दुर्घटनाओं का खतरा बिना वैज्ञानिक तरीके और बिना डामरीकरण के केवल मिट्टी-गिट्टी डालने से सड़क की स्थिति और भी खतरनाक हो गई है। पेट्रोल पंप के पास और ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्य मार्ग पर बने गहरे गड्ढे लगातार हादसों को न्योता दे रहे हैं। इस बदहाल रास्ते से रोजाना गुजरने वाले यात्रियों, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की जान जोखिम में बनी हुई है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यदि जल्द ही सड़क का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे एक बार फिर उग्र आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
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गड्डों में डाली गई गिट्टी पेट्रोल पंप के पास बिखरी पड़ी है बजरी
