विलाप करते हुए अर्पित के परिजन।
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हादसे से करीब डेढ़ घंटे पहले अर्पित की मां से हुई यह बातचीत अब परिवार के लिए उसकी सबसे आखिरी याद बन गई है। इससे पहले अर्पित ने मां को बताया था कि वह दोस्तों के साथ बेसमेंट में खाना खाने जा रहा है। खाना खाने के बाद उसने फिर मां को फोन किया और थकान बताते हुए आराम करने की बात कही। इसके बाद उसका फोन बंद हो गया।
शनिवार शाम करीब 4 बजे देवास से दिल्ली के लिए ट्रेन से निकला अर्पित जाज रविवार सुबह करीब 7 बजे रेलवे स्टेशन पहुंचा। करीब 8 बजे वह अपने परिसर पहुंच गया था। दिल्ली पहुंचने के बाद उसने दादा को भी फोन किया था। बातचीत में उसने कहा- “दादा, मैं ठीक से पहुंच गया हूं और खाना खाने जा रहा हूं।” घरवालों को क्या पता था कि दिल्ली पहुंचने के बाद की ये सामान्य-सी बातचीत कुछ घंटों बाद उनके जीवन की सबसे दर्दनाक याद बन जाएगी।

माता-पिता ने रुकने को कहा था, बोला- रिजर्वेशन है
अर्पित करीब एक साल से दिल्ली में रह रहा था। माता-पिता चाहते थे कि वह कुछ समय और घर पर रुके। उन्होंने उसे रविवार को जाने से रोकने की कोशिश भी की थी, लेकिन अर्पित ने कहा था- “रिजर्वेशन है, जाना ही पड़ेगा।” इसके बाद वह शनिवार शाम ट्रेन से दिल्ली रवाना हो गया।
अर्पित परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी बड़ी बहन प्रियंशी इंदौर में पढ़ाई कर रही है। बेटे को पढ़ाकर उसके भविष्य के सपने पूरे करने की उम्मीद माता-पिता ने लगा रखी थी। दिल्ली में रहकर वह अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर आगे बढ़ रहा था।
तीन तस्वीरों में देखिए अर्पित की यादें…

बहन के साथ रील बनाते हुए अर्पित और उनके परिजन।

धार्मिक कार्यक्रम में डांस करते हुए अर्पित।

बहन के साथ अर्पित।
फोन बंद हुआ तो परिवार की चिंता बढ़ी
हादसे से करीब डेढ़ घंटे पहले मां से हुई बातचीत के बाद अर्पित से संपर्क नहीं हो सका। उसका मोबाइल बंद हो गया। इसी बीच परिवार को उस इमारत के हादसे की जानकारी मिली, जहां अर्पित रहता था।
अर्पित तीसरी मंजिल पर कमरा नंबर 320 में रहता था। परिवार के लिए सबसे बड़ी बेचैनी यह थी कि बेटे से कुछ देर पहले ही बात हुई थी। फोन पर उसने खाना खाने और फिर आराम करने की बात कही थी। इसके बाद वही फोन बंद हो गया।
अर्पित के रिश्तेदार दीपक के मुताबिक, दिल्ली में रहने वाले उसके दोस्तों ने फोन कर बताया कि जिस इमारत में अर्पित रहता था, वह हादसे का शिकार हो गई है। इसके बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई।

दिल्ली में बिल्डिंग गिर गई थी। इसी हादसे में अर्पित की मौत हो गई।
दिल्ली पहुंचते ही बनाया था परिसर का वीडियो
दिल्ली पहुंचने के बाद अर्पित ने अपने परिसर का वीडियो भी बनाया था। यह वीडियो उसके मोबाइल में था, लेकिन हादसे के बाद उसका मोबाइल भी नहीं मिल रहा है। परिवार के पास अब उसके फोन में दर्ज आखिरी तस्वीरों और वीडियो की यादें ही रह गई हैं।
एक तरफ बेटे के सुरक्षित पहुंचने की जानकारी थी, दूसरी तरफ उसी बेटे से संपर्क टूटने की खबर। परिवार के लिए सबसे मुश्किल यही था कि हादसे से पहले तक अर्पित सामान्य दिन की तरह ही अपनी दिनचर्या में था।
11 अक्टूबर को था अर्पित का जन्मदिन
अर्पित का जन्मदिन भी अब करीब था। 11 अक्टूबर को वह अपना जन्मदिन मनाने वाला था, लेकिन उससे पहले ही हादसे ने परिवार से उसका साथ छीन लिया। परिवार के लिए यह तारीख अब खुशी के बजाय ऐसी याद बन गई है, जिसे वे चाहकर भी भुला नहीं पाएंगे। जिस घर में जन्मदिन की तैयारियों और बेटे के आने की उम्मीद होती, वहां अब उसकी यादें ही रह गई हैं।

कटनी में अक्षय के परिवार ने घर में लगाया ताला
इसी हादसे ने कटनी के एक परिवार के सपनों को भी झकझोर दिया। अक्षय यादव के हादसे की खबर मिलने के बाद परिवार के सभी सदस्य घर में ताला लगाकर दिल्ली रवाना हो गए। पड़ोसी विनय चतुर्वेदी के मुताबिक, हादसे की सूचना मिलते ही पूरा परिवार दिल्ली चला गया।
अक्षय पढ़ाई में शुरू से ही बेहद होनहार था। उसका सपना दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने का था। परीक्षा में सफलता के बाद उसे DU में दाखिला मिला। इसके बाद वह UPSC की तैयारी में जुट गया था। परिवार और मोहल्ले के लोगों को उससे बड़ी उम्मीदें थीं।

अक्षय यादव की भी दिल्ली हादसे में मौत हो गई। घर पर ताला लगा हुआ है।
रक्षाबंधन पर घर आया था, फिर दिल्ली लौट गया
अक्षय रक्षाबंधन पर घर आया था। परिवार के साथ त्योहार मनाया और फिर अपने सपनों की तैयारी के लिए दिल्ली लौट गया। परिवार के लिए वह मुलाकात अब और भी ज्यादा यादगार हो गई है।
पड़ोसी संदीप त्रिपाठी ने बताया कि अक्षय मेहनती और पढ़ाई को लेकर गंभीर था। उसके दिल्ली जाने को परिवार उसके भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम मानता था। पूरे मोहल्ले में उसके साथ हुई घटना से शोक का माहौल है।

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