विशाल मौर्य | उन्नाव3 मिनट पहले
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उन्नाव में अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद की पारिवारिक विरासत से जुड़े बदरका गांव को अब स्वतंत्रता संग्राम सर्किट से जोड़ा जा रहा है। गांव में करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से बहुद्देशीय परिसर तैयार किया जा रहा है। परियोजना का 75 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा हो चुका है और इसे नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परिसर तैयार होने के बाद यहां सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रमों के साथ नई पीढ़ी को चंद्रशेखर आजाद की शौर्यगाथा से जोड़ने के कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे।
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा गांव में हुआ था। उनके पिता सीताराम तिवारी मूल रूप से उन्नाव के बदरका गांव के रहने वाले थे। रोजगार के कारण परिवार भाबरा चला गया था, लेकिन परिवार की जड़ें बदरका से जुड़ी रहीं। इसी वजह से बदरका को चंद्रशेखर आजाद की पारिवारिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण स्थान के तौर पर देखा जाता है।
कम उम्र में ही आजाद के मन में देश के लिए कुछ करने और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लड़ने का जज्बा पैदा हो गया था। जलियांवाला बाग हत्याकांड का भी उन पर गहरा असर पड़ा। इसके बाद वह स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए और देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
450 लोगों की क्षमता वाला हॉल बनेगा मुख्य आकर्षण
बहुद्देशीय परिसर में 450 लोगों की क्षमता वाला बड़ा हॉल बनाया जा रहा है। इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकेंगे। परिसर में महिला और पुरुषों के लिए अलग-अलग ग्रीन रूम और टॉयलेट ब्लॉक की व्यवस्था होगी। इससे बड़े आयोजनों के दौरान लोगों को सुविधाएं मिल सकेंगी।

5 करोड़ रुपए की लागत से बहुद्देशीय परिसर तैयार किया जा रहा है।
लाइब्रेरी से रिकॉर्ड रूम तक कई सुविधाएं होंगी
परिसर में कार्यालय, स्टाफ रूम, रिकॉर्ड रूम, पेंट्री, लाइब्रेरी और स्टोर रूम भी बनाए जा रहे हैं। इसके साथ सीसी रोड और इंटरलॉकिंग का काम होगा। बारिश के पानी को बचाने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, 3 एचपी की बोरिंग और मुख्य गेट भी परियोजना का हिस्सा हैं।
भूतल और पहली मंजिल पर काम जारी
निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। करीब 50 प्रतिशत स्लैब का काम पूरा हो चुका है, जबकि मुख्य हॉल के स्लैब का निर्माण अभी जारी है। भूतल और पहली मंजिल पर भी अलग-अलग हिस्सों में काम चल रहा है। परियोजना का 75 प्रतिशत से ज्यादा काम पूरा होने का दावा किया गया है। लक्ष्य है कि नवंबर तक परिसर बनकर तैयार हो जाए, जिसके बाद बदरका को आजाद की विरासत और स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ने वाले प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके।

