चंदौली/औरैया|रितेश मिश्रा2 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे में यूपी के दो छात्रों की मौत हो गई। चंदौली के अभिषेक खरवार (21) और औरैया के पवन सिंह (20) दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रहे थे। 10 दिन पहले दोनों रक्षाबंधन के लिए घर आए थे। बहनों से राखी बंधवाई थी दशहरे पर फिर घर आने का वादा कर लौट गए थे। लेकिन, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। घर ताबूत में बंद उनका शव आया।
मंगलवार सुबह परिजन अभिषेक का पार्थिव शरीर लेकर चंदौली से वाराणसी पहुंचे। पिता ने मणिकर्णिका घाट पर मुखाग्नि देकर बेटे का अंतिम संस्कार किया। बेटे की मौत के बाद से मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। होश में आते ही बेटे को ढूंढने लगती हैं। हालांकि, परिवार ने बेटे की आंखें दान कर दी हैं, ताकि किसी और जिंदगी रोशन हो सके।
इधर, औरैया में सोमवार को पवन का अंतिम संस्कार किया गया। जैसे ही उसका शव घर पहुंचा, बहनें उससे लिपटकर रोने लगीं। मां बार-बार बेटे का चेहरा सहलाती रही और पिता एकदम शांत होकर दरवाजे पर बैठे रहे। घर से जब अर्थी उठी तो बहनें पीछे-पीछे भागने लगीं। मां बार-बार कहती रहीं कि अफसर बनने भेजा था। लाश वापस आई है।
बता दें कि दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक 5 मंजिला बिल्डिंग भरभराकर गिर गई थी। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी और 6 लोग घायल हुए थे। बिल्डिंग 40-50 साल पुरानी थी और इसमें हॉस्टल चल रहा था। हादसे के वक्त इसके बेसमेंट में खुदाई का काम चल रहा था।
पवन के घर की तस्वीरें देखिए-

पवन की लाश देखकर मां का बुरा हाल गया। बहने उन्हें समझाती रहीं। वो बार-बार बेटे का चेहरा देखने के लिए तड़पती रहीं।

पवन का शव देखते ही बहनें फूट-फूटकर रो पड़ीं। मां को गले लगाकर खूब रोईं।

परिजन बहनों को ढांढस बंधाते रहे। उनसे कहते रहे कि खुद को संभालो, ताकि समय से उसका अंतिम संस्कार किया जा सके।
अपने अपने घर का इकलौता बेटा था, डेढ़ महीने पहले ही DU में एडमिशन लिया था
- औरैया का पवन रिटायर्ड होम्योपैथी फार्मासिस्ट विशंभर सिंह का इकलौता बेटा था। चार बहनों में बड़ी बहन प्रियांशी भी दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ती है और गर्ल्स हॉस्टल में रहती है। मां मीरा देवी घर संभालती हैं। पवन ने इसी साल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, दिबियापुर से इंटर की पढ़ाई पूरी की। 20 जुलाई को ही दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया था।
- परिजनों के मुताबिक, पवन की अपनी मां से रोज सुबह-शाम वीडियो कॉल पर बात होती थी। पवन रक्षाबंधन पर घर आया था। जनमाष्टमी मनाकर शनिवार को वापस गया। दिल्ली पहुंचने के बाद भी उसने मां से बात की। रविवार सुबह भी बातचीत हुई, लेकिन शाम को फोन नहीं आया। बेटे की रोज आवाज सुनने वाली मां बेचैन हो गई।
- इसी बीच परिवार को हॉस्टल की इमारत गिरने की खबर मिली। दिल्ली में रह रही बहन प्रियांशी सूचना मिलते ही हॉस्टल पहुंची। काफी देर तक भाई को तलाशती रही। देर रात परिवार को पवन की मौत की जानकारी मिली। सोमवार सुबह पिता दिल्ली गए। पोस्टमॉर्टम के बाद देर शाम बेटे का शव लेकर घर लौटे।

पवन ने सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, दिबियापुर से इंटर की पढ़ाई पूरी की थी। 20 जुलाई को ही दिल्ली विश्वविद्यालय में बीएससी कंप्यूटर साइंस में दाखिला लिया था।
अभिषेक की मां का रो-रोकर बुरा हाल, बार-बार बेहोश हो रहीं
चंदौली के सदर कोतवाली क्षेत्र के झांसी गांव के रहने वाले संतोष खरवार 30 साल से अधिक समय से सोनभद्र की हिंडाल्को कंपनी में क्रेन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। उनके बड़े बेटे ओम खरवार (26) बीटेक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, जबकि दूसरे बेटे अभिषेक दिल्ली में रहकर प्रोग्रामिंग का कोर्स कर रहा था।
अभिषेक की मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। मां चमन तारा देवी 2 दिनों से बेसुध पड़ी हैं। बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। घर आने वाला हर व्यक्ति उन्हें देखकर भावुक हो जा रहा है। पैतृक गांव से लेकर रेणुकूट की हिंडाल्को कॉलोनी तक सन्नाटा पसरा है।

बेटे की मौत के बाद उसकी मां चमन तारा देवी दो दिनों से बेसुध पड़ी हैं। घर में आने वाला हर व्यक्ति उन्हें देख भावुक हो जा रहा है।

मंगलवार सुबह अभिषेक का पार्थिव शरीर वाराणसी पहुंचा। पिता एंबुलेंस से शव लेकर आए। मणिकर्णिका घाट पर उसका अंतिम संस्कार किया गया।
मामा बोले- टीवी पर घटना की जानकारी मिली
- अभिषेक के मामा पंकज कुमार ने बताया कि हादसे के वक्त परिवार को कुछ पता नहीं था। टीवी पर घटना की जानकारी मिली तो सभी घबरा गए। परिजन दिल्ली पहुंचे तो पता चला कि हादसे में अभिषेक की मौत हो चुकी है। अस्पताल में पोस्टमॉर्टम हुआ। काफी प्रयास के बाद अगले दिन पुलिस से शव सुपुर्द हुआ। आज सुबह वाराणसी में अंतिम संस्कार किया गया।
- अभिषेक की बुआ अंजनी ने बताया कि भतीजे ने पहले ही अंगदान के लिए रजिस्ट्रेशन कराया था। हादसे के बाद दिल्ली में उसकी आंखों और शरीर के अन्य अंगों के दान की प्रक्रिया शुरू की गई। उसकी कार्निया दान कर दी गई। अभिषेक चला गया, लेकिन उसकी आंखें किसी जरूरतमंद की जिंदगी में रोशनी ला सकती हैं। परिवार के लिए यह गर्व और दर्द दोनों का क्षण है।

अभिषेक की बुआ अंजनी का आरोप है कि जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ, वह काफी जर्जर थी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन को इसकी जानकारी भी दी थी।
‘जर्जर इमारत की शिकायत हुई थी, पहले सुन लेते तो बेटा आज जिंदा होता’
अभिषेक की बुआ अंजनी का आरोप है कि जिस बिल्डिंग में हादसा हुआ, वह काफी जर्जर थी। स्थानीय लोगों ने प्रशासन को इसकी जानकारी भी दी थी, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि अगर प्रशासन ने पहले ही इस ओर ध्यान दिया होता तो शायद इतनी बड़ी घटना टल सकती थी। परिवार का होनहार बेटा पढ़ाई के लिए दिल्ली गया था, लेकिन लौटकर उसकी अर्थी आई।

अभिषेक (21) नई दिल्ली के सत्य निकेतन स्थित बिल्डिंग में रहकर प्रोग्रामिंग का कोर्स कर रहा था।
———————-
ये खबर भी पढ़ेंः-
दिल्ली हादसा- परिवार ने बेटे की आंखें दान कीं:पिता बोले- काश बेटे को हॉस्टल से निकाल पाता; एक रात पहले ही वीडियो कॉल पर बात की

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में PG बिल्डिंग गिरने से जान गंवाने वाले 18 साल के अर्पित जय के परिवार ने उनकी आंखें दान कर दीं। उनके पिता ने कहा कि काश बेटे को उस PG से निकाल पाते। एक रात पहले ही उससे वीडियो कॉल पर बात की थी।
इसी तरह दिल्ली के बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने वालों में DU के PGDAV कॉलेज के सेकेंड ईयर के छात्र अक्षत सिंह यादव भी थे। मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी मौत की खबर मिलने के बाद परिवार सोमवार सुबह नई दिल्ली के AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचा। पढ़ें पूरी खबर…

