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दुनिया के सबसे ज्यादा कमाने वाले नेता की सैलरी बढ़ी:सिंगापुर के प्रधानमंत्री को हर साल ₹27 करोड़ मिलेंगे; यह PM मोदी से 135 गुना ज्यादा




सिंगापुर सरकार ने प्रधानमंत्री, मंत्रियों और दूसरे बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों की सैलरी बढ़ाने का फैसला किया है। दुनिया के सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले राजनीतिक नेता और सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग की सालाना कमाई में करीब ₹11 करोड़ का इजाफा होगा। वोंग की मौजूदा सालाना सैलरी करीब 22 लाख सिंगापुर डॉलर (लगभग ₹16 करोड़) है। बढ़ोतरी के बाद उनका सालाना पे पैकेज करीब 36 लाख सिंगापुर डॉलर (लगभग ₹27 करोड़) हो जाएगा। यानी उनकी कमाई में 60% से ज्यादा की बढ़ोतरी होगी। यह भारत के प्रधानमंत्री मोदी की सालाना सैलरी से 135 गुना ज्यादा है। अमेरिकी राष्ट्रपति 3 करोड़ और ब्रिटेन के PM 2 करोड़ कमाते हैं प्रधानमंत्री वोंग ने कहा है कि वह सैलरी में हुई इस बढ़ोतरी की रकम अगले 5 साल तक चैरिटी में दान करेंगे। सबसे ज्यादा कमाने वाले दुनिया के नेताओं में उनके बाद हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली हैं, जिन्हें सालाना करीब 7.19 लाख डॉलर (₹6.79 करोड़) मिलते हैं। स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ पार्मेलिन की सालाना कमाई करीब 6.06 लाख डॉलर (₹5.72 करोड़) है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सालाना 4 लाख डॉलर (₹3.77 करोड़), जबकि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम को करीब 2.30 लाख डॉलर (₹2.17 करोड़) मिलते हैं। मंत्रियों की सैलरी भी बढ़ेगी फिलहाल सिंगापुर के मंत्रियों का बेस पे पैकेज करीब 11 लाख सिंगापुर डॉलर (₹8.20 करोड़) है। नए वेतन सिस्टम के तहत यह बढ़कर करीब 12 लाख (₹8.95 करोड़) सिंगापुर डॉलर हो जाएगा। वोंग के मुताबिक, मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने तक ज्यादातर मंत्रियों की कमाई करीब 13.5 लाख सिंगापुर डॉलर (₹10 करोड़) तक पहुंच सकती है। उनकी सैलरी का कुछ हिस्सा उनके प्रदर्शन के आधार पर बढ़ेगा। मंत्रियों की कमाई का एक हिस्सा देश के बेरोजगारी, लोगों की आय और GDP ग्रोथ जैसे लक्ष्यों को हासिल करने से जुड़ा है। सरकार का तर्क- ज्यादा सैलरी से भ्रष्टाचार कम होगा सिंगापुर सरकार लंबे समय से मंत्रियों को ज्यादा सैलरी देने का बचाव करती रही है। सरकार का कहना है कि ऊंची सैलरी से मंत्रियों के रिश्वत लेने या भ्रष्टाचार करने का लालच कम होता है। सिंगापुर दुनिया के कम भ्रष्ट देशों में शामिल है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में भी वह लगातार ऊंची रैंकिंग पर रहता है। सरकार इसे अपनी वेतन व्यवस्था के सही होने के सबूत के तौर पर पेश करती है। खबर लगातार अपडेट हो रही है…



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