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कैम्बवाला में रोक के बावजूद निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त:सुखना कैचमेंट में निर्माण पर आदेशों के बावजूद गतिविधियां,कांसल भी कैचमेंट से जुड़े मामले में शामिल




सुखना लेक के कैचमेंट एरिया में निर्माण पर रोक के बावजूद कैम्बवाला में नई चारदीवारियां और निर्माण सामने आने पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। स्थानीय कमिश्नर नितिन कौशल की रिपोर्ट और पेन ड्राइव में मौजूद वीडियो देखने के बाद कोर्ट ने कहा कि “हम हैरान हैं कि डिवीजन बेंच की ओर से रोक लगाए जाने के बावजूद अधिकारियों ने ऐसे निर्माण कैसे होने दिए।” कोर्ट ने राजस्व अधिकारियों को हलफनामा दाखिल कर यह बताने का निर्देश दिया है कि नई चारदीवारियां किन लोगों ने बनाईं। यह मामला सुखना लेक कैचमेंट से जुड़े पुराने केस CWP-18253-2009 और उससे संबंधित रिव्यू याचिकाओं में चल रहा है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने स्थानीय कमिश्नर की रिपोर्ट पर सुनवाई की। कोर्ट ने साफ किया कि संबंधित क्षेत्र में पहले दिए गए आदेशों के मुताबिक स्टेटस-को बनाए रखना होगा और किसी भी अनधिकृत निर्माण की अनुमति नहीं दी जा सकती। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी। वीडियो में बड़ी संख्या में निर्माण और नई चारदीवारियां मिलीं स्थानीय कमिश्नर ने कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट के साथ एक पेन ड्राइव भी पेश की। कोर्ट ने वीडियो देखा तो कैम्बवाला क्षेत्र में बड़ी संख्या में निर्माण और कई जगहों पर नई चारदीवारियां दिखाई दीं। रिपोर्ट में संबंधित खसरा नंबरों पर हुए निर्माण का भी उल्लेख किया गया। इसी पर कोर्ट ने प्रशासन से सवाल किया कि जब इस इलाके में निर्माण को लेकर स्पष्ट न्यायिक रोक और निर्देश मौजूद हैं तो फिर नई गतिविधियां कैसे चलती रहीं। अब राजस्व विभाग को यह पता लगाना होगा कि इन चारदीवारियों का निर्माण किसने कराया और इसके लिए जिम्मेदार कौन है। 2012 में ही लगा दी गई थी आगे के निर्माण पर रोक सुखना लेक और उसके कैचमेंट को बचाने का मामला करीब डेढ़ दशक से हाईकोर्ट में चल रहा है। 14 मई 2012 को हाईकोर्ट ने कैचमेंट एरिया में आगे के निर्माण पर रोक लगाई थी। इसके बाद 22 मई 2012 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी निर्माण को लेकर स्थिति स्पष्ट की गई थी। हाईकोर्ट ने 23 मई 2012 को दोबारा कहा था कि 21 मई 2012 के बाद कैचमेंट में निर्माण की अनुमति नहीं है। इस पूरी कानूनी प्रक्रिया का आधार सुखना लेक कैचमेंट की पहचान के लिए 21 सितंबर 2004 की सर्वे ऑफ इंडिया मैप भी रही है। बाद की सुनवाइयों में इसी मैप के आधार पर कैचमेंट क्षेत्र की सीमाओं और वहां हुए निर्माण पर विचार किया गया। 2020 के फैसले में नए निर्माण पर पूरी तरह रोक 2 मार्च 2020 को हाईकोर्ट ने सुखना लेक कैचमेंट को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कैचमेंट में नए निर्माण पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश दिए थे। साथ ही कैचमेंट क्षेत्र में मौजूद कई निर्माणों को अनधिकृत मानते हुए उनसे जुड़े मामलों में कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। फैसले में सुखना लेक को कानूनी/ज्यूरिस्टिक पर्सन का दर्जा देने, इसे वेटलैंड घोषित करने और इसके पर्यावरणीय संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने सुखना लेक के आसपास के पूरे इकोसिस्टम और कैचमेंट को एक साथ देखने पर जोर दिया था। कांसल और सकेतरी का भी जुड़ा है मामला सुखना लेक कैचमेंट की सुरक्षा का मामला सिर्फ कैम्बवाला तक सीमित नहीं है। कांसल और सकेत्री भी इस पूरे पर्यावरणीय और कानूनी विवाद से जुड़े रहे हैं। पुराने हाईकोर्ट निर्देशों में कांसल, कैम्बवाला और सकेत्री से सुखना लेक की ओर जाने वाले सीवेज को रोकने के निर्देश भी दिए गए थे। यही वजह है कि कैचमेंट में निर्माण का मामला सामने आने पर कोर्ट के लिए सिर्फ एक जगह का निर्माण महत्वपूर्ण नहीं है। अदालत के आदेशों का उद्देश्य पूरे कैचमेंट क्षेत्र में झील के जलप्रवाह, पर्यावरण और प्राकृतिक क्षेत्र को सुरक्षित रखना है। कैचमेंट में निर्माण से झील पर सीधा असर सुखना लेक में पानी का बड़ा हिस्सा उसके कैचमेंट क्षेत्र से आता है। कैचमेंट में जमीन का स्वरूप बदलने, निर्माण होने, प्राकृतिक जलप्रवाह बाधित होने और सीवेज पहुंचने से झील के इकोसिस्टम पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से अदालत ने पहले भी कैचमेंट को केवल खाली जमीन के रूप में नहीं, बल्कि सुखना लेक के पूरे पर्यावरणीय तंत्र का हिस्सा माना है। अब प्रशासन को बताने होंगे चारदीवारी बनाने वालों के नाम मौजूदा सुनवाई में हाईकोर्ट ने सबसे महत्वपूर्ण निर्देश राजस्व विभाग को दिया है। विभाग को हलफनामा दाखिल कर नई चारदीवारियां खड़ी करने वाले लोगों के नाम और संबंधित जानकारी कोर्ट के सामने रखनी होगी। कोर्ट ने स्थानीय कमिश्नर की रिपोर्ट पर आपत्तियां दाखिल करने की अनुमति भी दी है। साथ ही प्रशासन को पुराने आदेशों के मुताबिक मौके पर स्थिति बनाए रखने और किसी भी अनधिकृत निर्माण को आगे बढ़ने से रोकने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होगी।



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