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पंजाब में नशे के मुद्दे पर सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार और विपक्ष के बीच घमासान तेज हो गया है। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से अपने गांव में नशा बिकने और बेटे के नशे की लत में फंसने को लेकर सवाल पूछने वाले बुजुर्ग गुलजार सिंह द्वारा कथित सरकारी दबाव के कारण आत्महत्या करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस घटना के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने नरोट जमाल सिंह मंडल में सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए पंजाब सरकार का पुतला फूंका। सर्कल अध्यक्ष विशाल सिंह रिंकू के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने भगवंत मान सरकार और वित्त मंत्री हरपाल चीमा के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है। गुलजार सिंह का कसूर केवल इतना था कि उन्होंने वित्त मंत्री हरपाल चीमा के सामने अपने बच्चे के नशे की दलदल में फंसने का दर्द बयां किया और गांव में सरेआम बिक रहे नशे पर जवाब मांगा। लेकिन सरकार और प्रशासन ने उन पर ऐसा मानसिक दबाव और प्रताड़ना बनाई कि उन्हें मजबूरन जहर पीकर अपनी जान देनी पड़ी। ‘रंगला पंजाब’ की जगह ‘चिट्टा’ बनी पहचान प्रदर्शन में शामिल वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार ‘युध नशियां विरुद्ध’ (नशे के खिलाफ युद्ध) का महज ढोंग कर रही है। हकीकत यह है कि आज पंजाब के हर गली-मोहल्ले में सरेआम नशा बिक रहा है। मदद की गुहार लगाने वालों को प्रताड़ना: जब पीड़ित परिवार अपने बच्चों को नशे से बचाने के लिए मंत्रियों से गुहार लगाते हैं, तो उन्हें इंसाफ देने के बजाय प्रताड़ित किया जाता है। पंजाब की छवि धूमिल: जिस पंजाब की पहचान कभी दूध-लस्सी, पहलवानों और शूरवीरों के नाम से होती थी, आज इस सरकार के राज में उसकी पहचान ‘चिट्टे’ (हेरोइन) से बन गई है। इससे राज्य का पर्यटन और युवाओं का भविष्य पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। इंसाफ न मिलने पर पूरे देश और पंजाब में होगा उग्र आंदोलन भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मृतक गुलजार सिंह के परिवार को तुरंत इंसाफ न मिला और दोषी नेताओं व अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई न की गई, तो भारतीय जनता पार्टी पूरे पंजाब और देश भर में ‘आप’ सरकार के खिलाफ तीखा आंदोलन छेड़ेगी।
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पठानकोट में BJP ने वित्त मंत्री का पुतला फूंका:संगरूर में बुजुर्ग की आत्महत्या पर किया प्रदर्शन; कहा-'रंगला पंजाब' की जगह 'चिट्टा' बनी पहचान
