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गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल से जोड़ा जाएगा, जल्द शुरू होगा निर्माण झारखंड में गर्भवती महिलाओं, नवजातों और बच्चों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए स्वास्थ्य विभाग बड़ी तैयारी कर रहा है। राज्य के सभी 81 विधानसभा क्षेत्रों में 50-50 बेड के मातृ एवं शिशु अस्पताल बनाए जाएंगे। इन अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं की प्रसव से पहले जांच, प्रसव, प्रसव के बाद की देखभाल, स्त्री रोगों के इलाज के साथ नवजात और बच्चों के उपचार की सुविधा होगी। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से यह योजना तैयार की गई है। इसे जल्द लागू करने की दिशा में काम किया जाएगा और निर्माण कार्य शुरू होगा। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है महिलाओं-बच्चों के लिए 4050 बेड होंगे.. योजना के तहत प्रत्येक अस्पताल में 50 बेड होंगे। इस तरह राज्य में कुल 81 मदर एंड चाइल्ड केयर अस्पताल शुरू होने के बाद एक साथ लगभग 4050 बेड की क्षमता विकसित होगी। इन अस्पतालों का फोकस मुख्य रूप से महिलाओं और बच्चों की चिकित्सा जरूरतों पर रहेगा। स्त्री रोग से संबंधित समस्याओं के इलाज और बच्चों के सामान्य व गंभीर रोगों के उपचार की व्यवस्था भी यहां की जाएगी। सीएचसी की परेशानियों का कम होगा बोझ…वर्तमान में राज्य के कई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव और महिलाओं व बच्चों के इलाज की सुविधाएं सीमित हैं। कई जगह विशेषज्ञ डॉक्टरों, पर्याप्त बेड और आवश्यक चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण मरीजों को जिला अस्पताल या बड़े मेडिकल संस्थानों में रेफर करना पड़ता है। नई योजना लागू होने के बाद विधानसभा स्तर पर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए समर्पित अस्पताल उपलब्ध होंगे। इससे सीएचसी पर बढ़ने वाला दबाव कम होगा। जिला अस्पतालों से सीधे जुड़ेंगे अस्पताल…इन अस्पतालों को संबंधित जिला अस्पतालों से जोड़ा जाएगा। यदि किसी गर्भवती महिला, नवजात या बच्चे की स्थिति गंभीर होने पर जिला अस्पताल से तत्काल सहायता और आगे के उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है। गर्भवती महिलाओं को क्या मिलेगा फायदा…इस योजना का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को मिलेगा। उन्हें प्रसव या गर्भावस्था से जुड़ी समस्याओं के इलाज के लिए जिला मुख्यालय तक बार-बार जाने की जरूरत कम होगी। बच्चों के इलाज में भी होगी राहत योजना का दूसरा लाभ बच्चों और नवजातों को मिलेगा। शुरुआती स्तर पर बीमारी की पहचान और इलाज होने से गंभीर स्थिति को रोकने में मदद मिल सकती है। माता-पिता को कई आवश्यक उपचार के लिए बड़े अस्पतालों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। विशेषकर दूरदराज के इलाकों में रहने वाले परिवारों को इससे समय और खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है।
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सभी विधानसभा क्षेत्र में बनेंगे 50 बेड के अस्पताल:प्रसव से लेकर स्त्री रोग और नवजात शिशुओं के इलाज तक एक ही जगह मिलेंगी सुविधाएं
