- Hindi News
- Opinion
- Warsaw AI Regulation Protest | Digital Affairs Minister Humanoid Robots
16 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

एन. रघुरामन, मैनेजमेंट गुरु
यह एक अजीब विरोध-प्रदर्शन था। वारसा में पोलैंड की डिजिटल अफेयर्स मिनिस्ट्री के दफ्तर के सामने सोमवार को 30 प्रदर्शनकारी जमा हुए, जिन्होंने न सिर्फ पोलैंड बल्कि पूरी दुनिया को चौंका दिया। इन प्रदर्शनकारियों ने पोलैंड के डिजिटल अफेयर्स मंत्री क्रिस्तोफ गॉव्कोवस्की को दफ्तर से बाहर आकर बात करने पर मजबूर कर दिया।
वे एआई के नियमन की मांग कर रहे थे। याद रखिए, प्रदर्शनकारियों की संख्या सिर्फ 30 थी। यह छोटी-सी संख्या हमें क्यों चौंकाती है? क्योंकि वे इंसान नहीं, बल्कि रोबोट थे। गॉव्कोवस्की भी सहमत हुए। उन्होंने कहा कि ‘ह्यूमनॉइड्स में लगाए गए ऐसे अनियंत्रित एआई मॉडल, जो रोबोटाइजेशन के साथ लगातार विकसित भी होते रहेंगे, एक बड़ी समस्या हैं।’
इससे मुझे पिछले महीने एक जूनियर वकील के साथ हुई मुलाकात याद आ गई। वह बहुत रिलैक्स लग रहे थे। हाथ में बगैर कोई कागज लिए ऑडिटोरियम में म्यूजिक का लुत्फ उठा रहे थे। मैंने कहा कि ‘आप तो हार्वी जैसे लग रहे हैं, जो हिट लीगल ड्रामा सीरीज ‘सूट्स’ में स्टाइलिश वकील का रोल निभाने वाला मुख्य किरदार है।’ वे मुस्कराए और बोले कि ‘थैंक्स टु एआई, जिसने मेरे जैसे वकीलों का लुक बदल दिया। अब हमें शायद ही कभी ढेरों उबाऊ दस्तावेज लेकर चलने या रातभर घर पर उन्हें खंगालने की जरूरत पड़ती है।’
फिर हम बातचीत करने लगे कि एआई टूल काम को आसान कैसे बना रहे हैं। हम दोनों सहमत थे कि एआई नौकरियों पर भारी पड़ने के बजाय कर्मचारियों की इफिशियंसी बढ़ा रहा है। आगे क्या करना है, यह तय करने के लिए किसी कॉन्ट्रैक्ट के 100 क्लॉज पढ़ने के बजाय एआई उन्हें चंद सेकंड में स्कैन कर जवाब दे सकता है।
इससे वकील को क्रिटिकल थिंकिंग का अधिक समय मिलता है। लेकिन उसने एक नुकसान पर भी ध्यान दिलाया। उसने ऐसे मामले बताए जब अदालतों ने लॉ फर्मों की ओर से सबमिट दस्तावेजों में भ्रामक जानकारी पकड़ी और उन्हें शर्मिंदगी उठानी पड़ी।
और उनकी बात सही भी थी। एआई की व्यापक संभावनाओं के जरिए प्रोफेशनल लाइफ में बदलाव को रोजमर्रा की हकीकत बना पाना सिर्फ कर्मचारियों और उनके बॉस लोगों की ही चुनौती नहीं है। यह हर जगह पर एम्प्लॉयर्स के लिए भी चुनौती है।
जनरेटिव एआई की मदद से जूनियर्स पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन तेजी से बना सकते हैं। लेकिन उनके बॉस को प्रेजेंटेशन के तथ्यों की जांच में ज्यादा समय लग सकता है। दफ्तरों की ऐसी कहानियां भी हैं, जहां कर्मचारी गलत जानकारी देने वाले एआई बॉट से फ्रस्टेट हो गए और आपा खोने के कारण उन पर ‘मेंटल रेक’ का ठप्पा तक लगा दिया गया।
इसलिए असली चुनौती यह नहीं है कि हमें एआई का इस्तेमाल करना चाहिए या नहीं, बल्कि यह है कि हमें अपना कितना काम उसे देना चाहिए। पहला नियम सरल है कि अपनी जिम्मेदारी किसी मशीन को न सौंपें। एआई प्रेजेंटेशन बना सकता है, लेकिन कर्मचारी को हर अहम आंकड़े की जांच करनी चाहिए।
यह किसी कॉन्ट्रैक्ट को समराइज कर सकता है, लेकिन वकील को महत्वपूर्ण क्लॉज खुद पढ़ने चाहिए। यह रिपोर्ट बना सकता है, लेकिन दस्तखत करने वाले को सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि सारे तथ्य सही हैं। यह जवाब सुझा सकता है, लेकिन इंसान को फिर भी पूछना चाहिए कि ‘क्या यह समझ में आता है? क्या मिसिंग है? क्या गलत हो सकता है?’ इसलिए एक अच्छे एआई यूजर को फॉरवर्ड करने से पहले फैक्ट चैक करने, अप्रूवल से पहले पढ़ने और एक्सेप्ट करने से पहले सोचने की आदत विकसित करनी चाहिए।
किसी को एआई का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह उपलब्ध है। अगर किसी टास्क में व्यक्तिगत निर्णय, क्रिएटिविटी, संवेदनशीलता, निगोसिएशन अथवा किसी सहकर्मी या ग्राहक को समझने की जरूरत है तो इंसानों वाला काम इंसान को करने देना चाहिए। एआई से मैकेनिकल काम का बोझ कम करना चाहिए, सोचने का नहीं।
फ्यूचर वर्कप्लेस शायद एआई इस्तेमाल करने वालों और नहीं करने वालों में विभाजित नहीं होगा। यह उन लोगों के बीच बंटेगा, जो एआई का समझदारी से इस्तेमाल करते हैं और जो सोचने का काम ही एआई को दे देते हैं। वारसा के रोबोट शायद यही मांग कर रहे थे कि इंसान ‘वर्कप्लेस की रक्षा करें।’ लेकिन इंसानों को शायद जॉब से भी ज्यादा मूल्यवान किसी अन्य चीज की रक्षा करने की जरूरत है- सोचने, सवाल करने और जिम्मेदारी लेने की अपनी क्षमता की।
फंडा यह है कि भविष्य में मशीन के साथ मिलकर काम करने वालों की कीमत बढ़ेगी, ना कि खुद मशीन बन जाने वालों की।

