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रतलाम में जहरीली शराब केस में तीन बरी:कोर्ट बोली- पुलिस की जांच में इतनी खामियां, आरोप साबित नहीं हुए; अफसरों पर कार्रवाई के आदेश




रतलाम में पांच साल पुराने जहरीली और अवैध शराब के मामले में रतलाम कोर्ट ने तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। न्यायालय ने पुलिस की कार्रवाई और विवेचना में कई खामियां मिलने पर सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) रविना चौधरी की कोर्ट ने थाना माणक चौक के मामले में नवनीत चौहान, पवन उर्फ पप्पू राठौर और सोहनलाल उर्फ दादू को मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम की धारा 49-क के आरोप से दोषमुक्त किया। 9 सितंबर 2021 को 5 लीटर शराब पकड़े जाने का दावा अभियोजन के अनुसार 9 सितंबर 2021 को माणक चौक थाने में पदस्थ तत्कालीन कार्यवाहक ASI मुरली मकवाना को मुखबिर से सूचना मिली थी। इसके आधार पर पुलिस ने त्रिवेणी रोड श्मशान के पास नवनीत को पकड़ा था। पुलिस का दावा था कि उसके पास से 5 लीटर अवैध और जहरीली हाथभट्टी कच्ची महुआ शराब मिली। पूछताछ में नवनीत ने यह शराब पवन उर्फ पप्पू और सोहनलाल से खरीदकर बेचने की बात बताई थी। इसके आधार पर तीनों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 49-क के तहत मामला दर्ज किया गया और चालान कोर्ट में पेश किया गया। स्वतंत्र पंच गवाह कोर्ट में हो गए पक्षद्रोही मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता रोहित शर्मा ने अभियोजन की कहानी और साक्ष्यों में मौजूद विरोधाभास कोर्ट के सामने रखे। घटना और मेमोरेंडम से जुड़े सभी स्वतंत्र पंच गवाह न्यायालय में पक्षद्रोही हो गए। उन्होंने पुलिस के सामने मौके पर किसी तरह की जप्ती या कार्रवाई होने से इनकार कर दिया। जप्ती की तारीख घटना से एक महीने पहले की न्यायालय में पेश किए गए माल में आर्टिकल-3 की सैंपल बोतल पर जप्ती की तारीख 2 अगस्त 2021 दर्ज मिली, जबकि पुलिस ने घटना की तारीख 9 सितंबर 2021 बताई थी। यानी जप्ती की तारीख कथित घटना से करीब एक महीने पहले की थी। कोर्ट के अनुसार दोनों विवेचक इस अंतर का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। जप्ती पत्रक पर नमूना सील भी अंकित नहीं थी। कोर्ट में पेश किए गए माल पर लगी सील और दस्तावेजों के बीच भी उचित मिलान नहीं पाया गया। इसके अलावा पुलिस अधिकारियों के मौके पर जाने और थाने वापस आने संबंधी रोजनामचा रिकॉर्ड भी न्यायालय में वैध रूप से प्रस्तुत नहीं किया गया। कोर्ट ने कहा- लापरवाही की जवाबदेही तय होना जरूरी 27 पेज के फैसले में कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के स्टेट ऑफ गुजरात विरुद्ध किशनभाई मामले में दिए गए न्यायदृष्टांत का भी उल्लेख किया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुलिस या विवेचना एजेंसियों की लापरवाही के कारण यदि निर्दोष लोगों को अनावश्यक रूप से जेल और न्यायिक प्रक्रिया की परेशानी झेलनी पड़े, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होना जरूरी है। दोनों विवेचकों पर कार्रवाई के लिए कलेक्टर-डीआईजी को पत्र न्यायालय ने मध्यप्रदेश नियम तथा आदेश (आपराधिक) के नियम 241 के तहत तत्कालीन विवेचक ASI मुरली मकवाना और SI सचिन डावर की विवेचना में सामने आई लापरवाही पर संज्ञान लिया। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार विभागीय कार्रवाई के लिए निर्णय की प्रति सहित पत्र जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) रतलाम और रतलाम रेंज के डीआईजी को भेजने का आदेश दिया है।



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