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चंडीगढ़ में 4 डिसमिस पुलिसकर्मियों को CAT से राहत:SSP के आदेश रद्द, करप्शन मामले में बिना जांच हटाया; आपराधिक केस जारी रहेंगे




करप्शन के मामलों में डिसमिस किए गए चंडीगढ़ के 4 पुलिसकर्मियों को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) से राहत मिली है। CAT ने चारों को सेवा से बर्खास्त करने के SSP के आदेश को रद्द कर दिया है। CAT ने पाया कि विभाग ने पुलिसकर्मियों को बिना जांच के सेवा से बर्खास्त कर दिया था। ट्रिब्यूनल ने कहा कि विभाग यह साबित नहीं कर पाया कि उस समय ऐसी परिस्थितियां थीं, जिनमें विभागीय जांच कराना संभव नहीं था। राहत पाने वाले पुलिसकर्मियों में सब इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह, कृष्ण कुमार, एएसआई हरमीत सिंह और अख्तर हुसैन शामिल हैं। इन चारों को अलग-अलग समय पर CBI ने रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग ने इन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था, जिसके खिलाफ चारों ने CAT का रुख किया था। 2023-2024 में CBI ने किया था गिरफ्तार अख्तर हुसैन और कृष्ण कुमार को CBI ने वर्ष 2023 में रिश्वत मांगने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके बाद वर्ष 2024 में एक अलग मामले में एएसआई हरमीत सिंह और सब इंस्पेक्टर बलविंदर सिंह को भी CBI ने गिरफ्तार किया था। चारों पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। बर्खास्तगी के आदेश के खिलाफ चारों ने CAT की चंडीगढ़ बेंच में याचिका दायर कर चुनौती दी थी। पुलिसकर्मियों की ओर से वकील रोहित सेठ ने CAT में दलील दी कि चारों को बिना विभागीय जांच के सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। CAT ने कहा कि विभाग ने पुलिसकर्मियों पर लगे आरोपों की गंभीरता का तो जिक्र किया, लेकिन यह बताने के लिए कोई ठोस आधार पेश नहीं किया कि विभागीय जांच कराने में वास्तव में क्या परेशानी थी। आपराधिक मामलों पर फैसले का नहीं होगा असर CAT ने अपने आदेश में साफ किया है कि चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ CBI कोर्ट में चल रहे आपराधिक मामलों पर इस फैसले का कोई असर नहीं होगा। यानी रिश्वत मांगने के आरोपों से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई और उनका फैसला अपनी प्रक्रिया के अनुसार होगा। 3 महीने में लेना होगा फैसला CAT ने कहा कि चारों पुलिसकर्मियों की रीइंस्टेटमेंट, सर्विस कंटीन्यूटी और अन्य लाभों को लेकर सक्षम अथॉरिटी फैसला करेगी। बर्खास्तगी और आगे की कार्रवाई के बीच की अवधि को सेवा में किस प्रकार माना जाएगा, इस पर भी निर्णय लिया जाएगा। सक्षम अथॉरिटी को इन सभी मुद्दों पर 3 महीने के भीतर फैसला करना होगा।



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