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उज्जैन के खड़े हनुमान हिल क्यों नहीं रहे:शिला के नीचे ऐसा क्या है? मंदिर टूट गया, क्रेन भी फेल; टस से मस नहीं हुई प्रतिमा




उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर का पूरा ढांचा तोड़ा जा चुका है, लेकिन अंदर खड़ी प्रतिमा हिली तक नहीं । चार बार कोशिश हुई, हाइड्रोलिक क्रेन तक लगाई गई, फिर भी नाकामी हाथ लगी। अब प्रशासन ने कार्रवाई रोक दी है। वहीं भक्त इसे चमत्कार मान रहे हैं और मध्य प्रदेश के अलावा गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से भी लोग दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। आखिर प्रतिमा हट क्यों नहीं रही, जमीन के नीचे है क्या और अब आगे क्या होगा; समझते हैं आज के मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल 1: उज्जैन में चल क्या रहा है, अब तक क्या-क्या हुआ? जवाब: कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ी की जा रही है, इसी रास्ते में ‘खड़े हनुमान’ मंदिर आ रहा है, जिसे विस्थापित करना है। सवाल 2: क्या यह हजार साल पुरानी प्रतिमा है, और इससे फर्क क्या पड़ता है? जवाब: प्रतिमा की उम्र को लेकर दो बिल्कुल अलग दावे हैं… पहला, परंपरागत दावा, 150 से 170 साल मंदिर की सेवा एक ही पुजारी परिवार की पांच पीढ़ियां करती आई हैं। दस्तावेजों में इसका इतिहास 1857 के दौर से जुड़ा मिलता है, हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में यह 150 तो कुछ में 200 साल तक बताया गया है। दूसरा, बिल्कुल नया दावा, करीब 1000 साल विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी के मुताबिक प्रतिमा मालवा बेसाल्ट की है और यह परमार वंश-राजा भोज के दौर की हो सकती है। हालांकि सिंदूर की मोटी परत के कारण इसकी मूल आकृति साफ नहीं दिखती, इसलिए सिर्फ देखकर उम्र तय नहीं की जा सकती। रिटायर्ड आर्कियोलॉजिस्ट बीके लोखंडे कहते हैं कि- अगर प्रतिमा सामान्य धार्मिक प्रतिमा निकली तो उसे दूसरी जगह ले जाने पर फैसला हो सकता है। लेकिन पुरातात्विक महत्व साबित हुआ तो संरक्षण और उसे संभालने का तरीका अलग होगा। यानी 150 या 1000 साल का सवाल सिर्फ उम्र का नहीं है। अगर प्रतिमा सच में प्राचीन निकली, तो उसे हटाने का तरीका भी बदल जाएगा। सवाल 3: प्रतिमा के नीचे ऐसा क्या है, जो उसे हिलने नहीं दे रहा? जवाब: विशेषज्ञों के मुताबिक- संभावना यह है कि प्रतिमा और उसके नीचे की चट्टान आपस में जुड़ी हुई हों। सवाल 4: क्या प्रतिमा को बिना नुकसान पहुंचाए दूसरी जगह ले जाया जा सकता है? जवाब: विशेषज्ञ एक बात पर एकमत हैं, प्रतिमा को काटना या तोड़ना किसी भी सूरत में विकल्प नहीं है। सवाल 5: सड़क चौड़ी करने की जरूरत ही क्यों पड़ी, अब आगे क्या होगा? जवाब: सड़क चौड़ी करने की वजह है 2028 का सिंहस्थ मेला। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर का ये एपिसोड भी पढ़िए… क्या बालाघाट प्रशासन कुछ छिपा रहा है?:ढाई महीने में 30+ आदिवासी बच्चों की मौत जून के आखिरी हफ्ते से मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक के बाद एक बैगा और गोंड आदिवासी बच्चे मर रहे हैं। सरकार ने पहले कहा, सिर्फ 8 मौतें। गांव वाले, स्थानीय नेता और विपक्ष कहते रहे, आंकड़ा कहीं ज्यादा है। ढाई महीने बाद अब यह आंकड़ा 30 पार कर चुका है, और सैकड़ों बच्चे अब भी बीमार हैं…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।



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