सोनीपत की सरकारी यूनिवर्सिटी DCRUST मुरथल में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर पर लड़कियों ने छेड़खानी और क्लासरूम में लड़कियों को अकेला देखकर गंदे तरीके से टच करने का आरोप लगाया है।
सोनीपत की सरकारी यूनिवर्सिटी DCRUST मुरथल में केमिकल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर पर लड़कियों ने छेड़खानी और क्लासरूम में लड़कियों को अकेला देखकर गंदे तरीके से टच करने का आरोप लगाया है। छात्राओं ने प्रशासन पर भी जांच के नाम पर लीपापोती करने के गंभीर आरोप लगा
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अब सीएम नायब सैनी से अपनी सुरक्षा के लिए मांग की और कहा कि सरकार दखल देकर निष्पक्ष जांच करवाएं और प्रोफेसर के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
दैनिक भास्कर से कैमरे पर बातचीत में स्टूडेंट्स ने प्रोफेसर पर अश्लील कमेंट करने, गलत तरीके से टच करने, कपड़ों पर टिप्पणी करने और पढ़ाई के दौरान आपत्तिजनक बातें करने के आरोप लगाए। स्टूडेंट्स का कहना है कि जांच के लिए कमेटी बनाई गई, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया। अब स्टूडेंट्स ने 11 सितंबर यानि आज से दोबारा शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट शुरू करने की बात कही है। वहीं यूनिवर्सिटी के वीसी से बातकर वर्जन लेने की कोशिश की गई तो उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई और वहीं आरोपित प्रोफेसर ने भी मामले में कोई जवाब नहीं दिया।

यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते स्टूडेंट्स
सबसे पहले पढ़िए वाइस चांसलर को क्या शिकायत दी…
19-21 अगस्त की शिकायतों पर निर्णय नहीं होने का आरोप: B.Tech केमिकल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट ने VC को दी शिकायत में कहा कि संबंधित फैकल्टी मेंबर के खिलाफ 19, 20 और 21 अगस्त को विभाग व विश्वविद्यालय प्रशासन को लिखित शिकायतें दी थीं, लेकिन अब तक स्पष्ट निर्णय नहीं हुआ।
देरी से शैक्षणिक माहौल प्रभावित: स्टूडेंट ने कहा कि मामले में लगातार देरी के कारण उनका शैक्षणिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। उन्हें मानसिक दबाव में पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे कक्षाओं में सहभागिता और भविष्य प्रभावित हो रहा है।
स्टूडेंट पर दबाव बनाने का आरोप:शिकायत में आरोप लगाया कि प्रोफेसर पर विद्यार्थियों पर तथ्यहीन व झूठे आरोप लगाकर दबाव बनाने और मानसिक रूप से परेशान करने का प्रयास कर रहे हैं। इससे स्टूडेंट में भय और असुरक्षा का माहौल है। स्टूडेंट ने मामले की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच, जांच पूरी होने तक किसी भी कथित दबाव या प्रतिशोधात्मक कार्रवाई पर रोक और बिना भय अपनी बात रखने का अवसर देने की मांग की।

आज से फिर हड़ताल: स्टूडेंट ने कहा कि प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की तो 11 सितंबर से शांतिपूर्ण विरोध/हड़ताल करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी बाहरी दबाव में नहीं, बल्कि सुरक्षा, गरिमा और शैक्षणिक अधिकारों के लिए होगा।

एक स्टूडेंट मीडिया में अपना दर्द जाहिर करते हुए
स्टूडेंट्स ने कैमरे पर आकर क्या आरोप लगाए…. गंदी नजरों से देखने और अश्लील कमेंट करने का आरोप:एक छात्रा ने कैमरे पर आरोप लगाया कि प्रोफेसर लड़कियों को गंदी नजरों से देखते हैं और उन पर गंदे कमेंट करते हैं। छात्राओं का कहना है कि प्रोफेसर लड़कियों से यह तक पूछते हैं कि प्रपोज कैसे किया जाता है। एक स्टूडेंट ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने उनसे पूछा कि रसियन लड़की अच्छी होती है या कोई दूसरी। छात्राओं के अनुसार, इस तरह की बातें पढ़ाई के बजाय क्लास का माहौल असहज बनाती हैं।
“गालों की तरह नोटबुक लेकर आओ” कहने का आरोप:स्टूडेंट ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर लड़कियों से कहते हैं कि “गालों की तरह नोटबुक लेकर आओ।” छात्राओं का यह भी आरोप है कि प्रोफेसर लड़कियों को गलत तरीके से टच करते हैं। एक स्टूडेंट ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रोफेसर ने उससे ऐसी आपत्तिजनक बात कही, जिसमें उन्होंने कहा कि वह उनके कहे अनुसार चले तो जिंदगी में पूरी खुश रहेगी। स्टूडेंट के मुताबिक, उस समय वह क्लास में अकेली थी।
डर के कारण छात्रा ने फ्रेंड को बताई बात: स्टूडेंट्स का कहना है कि इस तरह के व्यवहार से लड़कियां डर गई हैं। उनका आरोप है कि संबंधित छात्रा ने क्लास में हुई घटना के बारे में अपनी फ्रेंड को बताया। छात्राओं ने कहा कि प्रोफेसर के क्लास में आने पर वे खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं और कई बार डर के कारण कांपने तक लगती हैं।
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप: स्टूडेंट्स ने कहा कि मामले को लेकर कई बार प्रोटेस्ट किया गया। रजिस्ट्रार को शिकायत दी गई और अकादमिक स्तर पर भी लिखित जानकारी दी गई। उनका कहना है कि इंटरनल जांच कमेटी बनाई गई थी, लेकिन दो दिन की छुट्टी के बाद कमेटी को ही हटा दिया गया। छात्राओं का आरोप है कि जांच के नाम पर कभी कमेटी बनाई जाती है और कभी हटा दी जाती है।

स्टूडेंट्स का आरोप है कि प्रोफेसर खुद कॉन्फिडेंस के साथ कहते हैं कि उनके खिलाफ कितनी भी शिकायत कर दी जाए, उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा।
“शिकायत करने से कुछ नहीं बिगड़ेगा” कहने का आरोप:स्टूडेंट्स का आरोप है कि प्रोफेसर खुद कॉन्फिडेंस के साथ कहते हैं कि उनके खिलाफ कितनी भी शिकायत कर दी जाए, उनका कुछ नहीं बिगड़ेगा। छात्राओं का कहना है कि प्रोफेसर के खिलाफ अभी तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, जबकि लड़कियां लगातार मानसिक परेशानी और हरासमेंट झेल रही हैं।
30 से ज्यादा छात्राओं से इसी तरह की बातचीत का दावा:एक छात्रा ने दावा किया कि 30 से ज्यादा लड़कियों के साथ इसी प्रकार के सेक्सुअल हैरेसमेंट और गंदे कमेंट्स को लेकर बातचीत हो चुकी है। उसका कहना है कि क्लास में करीब 68 स्टूडेंट हैं। छात्राओं की मांग है कि संबंधित प्रोफेसर को कैंपस में नहीं रखा जाना चाहिए, क्योंकि उनके रहते जूनियर और सीनियर दोनों स्टूडेंट खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करते।
नकल के झूठे आरोप लगाने का भी दावा:स्टूडेंट्स ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर लड़कियों पर एग्जाम में नकल करने जैसे झूठे आरोप लगा रहे हैं, जबकि उनके मुताबिक संबंधित स्टूडेंट्स के कोई टेस्ट भी नहीं हुए हैं। छात्राओं का कहना है कि इस तरह मेल पर मेल करके सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन को गुमराह करने तथा लड़कियों को गलत साबित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कैंपस के बाहर सुरक्षा को लेकर चिंता:लड़कियों ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि अगर वे कैंपस के बाहर प्रोफेसर को कहीं दिखाई दे गईं और उनके साथ कोई घटना हो गई तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। छात्राओं ने कहा कि भले ही कैंपस में सुरक्षा की बात कही जाए, लेकिन कैंपस के बाहर उनकी सुरक्षा को लेकर डर बना हुआ है।
हरियाणा सरकार से दखल की मांग: स्टूडेंट्स ने हरियाणा सरकार से मामले में दखल देने की मांग की है। उनका कहना है कि यह उनकी सेफ्टी का मामला है, इसलिए जांच में देरी नहीं होनी चाहिए। छात्राओं का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन उनसे मिलना और उनकी मांग सुनना तक नहीं चाहता। पुलिस को भी शिकायत दी गई है, लेकिन फिलहाल छात्राएं चाहती हैं कि यूनिवर्सिटी स्तर पर मामले की गंभीरता से जांच कर कार्रवाई की जाए।

एक अन्य स्टूडेंट ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर लड़कियों के कपड़ों पर कमेंट करते हैं और गंदे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं।
दूसरी छात्रा को टच करने का लगाया आरोप
एक अन्य स्टूडेंट ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर लड़कियों के कपड़ों पर कमेंट करते हैं और गंदे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। छात्रा ने आरोप लगाया कि प्रोफेसर ने उसके कपड़ों पर कमेंट करने के साथ उसे टच भी किया था। उसका कहना है कि वह अभी सेकंड ईयर में पढ़ रही है और इस तरह के आरोप प्रोफेसर पर करीब ढाई साल से लगते रहे हैं।
कार्रवाई की मांग
स्टूडेंट्स ने बताया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन को कार्रवाई के लिए 9 सितंबर तक का समय दिया गया था। उनका कहना है कि तय समय तक कार्रवाई नहीं होने पर अब वे 11 सितंबर से दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठेंगी। छात्रा ने कहा कि शिकायत किए करीब 25 दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
एक ही मांग- प्रोफेसर को टर्मिनेट किया जाए
एक छात्रा ने कहा कि उनकी मुख्य मांग है कि प्रोफेसर को सेक्सुअल हैरेसमेंट के मामले में टर्मिनेट किया जाए और उनके खिलाफ कार्रवाई हो। छात्राओं का कहना है कि उन्हें दोबारा यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लिए नहीं बुलाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले भी कुछ सीनियर्स की ओर से इसी प्रकार के आरोप लगाए गए थे।
