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बिना पुरानी कमेटी भंग किए नई कमेटी गठन पर पुराने खिलाड़ियों में नाराजगी




भास्कर न्यूज | हजारीबाग झारखंड फुटबॉल संघ की ओर से हजारीबाग में आयोजित बैठक को लेकर जिले के पुराने फुटबॉल खिलाड़ियों, कोच, रेफरी व संघ के पूर्व सदस्यों में नाराजगी है। पूर्व फुटबॉल खिलाड़ी व संघ से जुड़े अन्य सदस्यों ने बैठक में बुलाए गए लोगों और नई कमेटी के गठन को लेकर सवाल उठाए हैं। पुराने सभी खिलाड़ियों ने कहा कि बैठक में ऐसे लोगों को बुलाया गया, जो कभी संघ के सदस्य नहीं रहे। कुछ लोगों को तो पुराने खिलाड़ियों ने कभी फुटबॉल मैचों में भी नहीं देखा। उनका आरोप है कि हजारीबाग की पुरानी कमेटी को भंग किए बिना ही नए सदस्यों को जोड़कर नई कमेटी का गठन कर दिया गया। पुराने सदस्यों का कहना है कि संघ की परंपरा के अनुसार पहले पुरानी कमेटी को भंग किया जाता है। इसके बाद नई कमेटी का गठन होना चाहिए। पुराने खिलाड़ियों ने झारखंड फुटबॉल संघ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि झारखंड गठन के बाद से एक ही व्यक्ति लगातार सचिव पद पर बने हुए हैं, जबकि इस दौरान अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष बदलते रहे। सदस्यों ने संघ में परिवारवाद को बढ़ावा दिए जाने का भी आरोप लगाया। उनका कहना है कि पूर्व कमेटी के कोषाध्यक्ष, संयुक्त सचिव व अन्य सदस्यों के साथ नए लोगों को जोड़कर लगातार लीग मैच आयोजित किए जाते रहे हैं। पिछले वर्ष 28 टीमों के बीच लीग मैच कराया गया था। सदस्यों ने बताया कि कुछ पूर्व सदस्यों ने 72 खिलाड़ियों के पंजीयन के लिए दस्तावेज जमा किए थे, लेकिन अब तक उनका पंजीयन नहीं कराया गया। पूछने पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिला। उनका आरोप है कि ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन से प्रतियोगिताओं की जानकारी पहले मिलने के बावजूद झारखंड के सदस्यों को अंतिम समय में सूचना दी जाती है। इससे खिलाड़ियों और आयोजकों को परेशानी होती है। संतोष ट्रॉफी जैसे महत्वपूर्ण टूर्नामेंट में भी पर्याप्त समय नहीं मिलने की बात कही गई। पुराने खिलाड़ियों ने संघ के कार्यकाल और कार्यप्रणाली की पूरी जांच कराने की मांग की है। सदस्यों ने कहा कि हजारीबाग में गठित नई कमेटी को लेकर उपायुक्त से मिलकर पूरी जानकारी दी जाएगी। आवश्यक कार्रवाई की मांग की जाएगी। छह सितंबर को खेल मंत्री सुदीप्त कुमार सोनू के निधन के बाद आठ सितंबर को हजारीबाग में बैठक आयोजित किए जाने पर भी सदस्यों ने नाराजगी जताई। इसकी निंदा की। मौके पर लाल किशोर प्रसाद, अशोक भट्टाचार्य, नजरुल हसन, भैया मुरारी सिन्हा, सरफराज अहमद, बहादुर राम, महताब आलम, धनेश्वर गोप और सूरज सिंह थापा उपस्थित थे।



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