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पंजाब में बिजली डिमांड 15 हजार MW पार:इंडस्ट्रियल एरिया में 10 घंटे कट, किसानों के ट्यूबवेल बंद; बिजली मंत्री बोले-2 दिन में हो जाएगा हल




पंजाब में बिजली संकट गहराता जा रहा है। लुधियाना, जालंधर, मंडी गोबिंदगढ़ जैसे इंडस्ट्रियल एरिया में 10 से 11 घंटे तक कट लग रहे हैं। किसानों को ट्यूबवेल के लिए भी बिजली नहीं मिल रही। हालांकि घरेलू बिजली सप्लाई में अभी बड़े कट से राहत है। सूबे में रविवार सुबह बिजली की मांग 15 हजार मेगावाट पार कर गई है। पंजाब राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के रियल-टाइम डेटा के अनुसार सुबह 8 बजे तक बिजली की मांग 15,762 मैगावाट है। केंद्रीय ग्रिड से 11,138 मैगावाट बिजली ली जा रही है और 11,244 मैगावाट शेड्यूल की जा रही है। इस समय सूबे में तय कोटे से 106 मैगावाट कम बिजली मिल रही है। वहीं पंजाब के बिजली और लोक निर्माण मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने दावा किया है कि मौजूदा बिजली संकट को एक-दो दिनों में हल कर लिया जाएगा। बिजली मंत्री का दावा-1,051 मेगावाट कम बिजली मिल रही मंत्री सौंद ने कहा कि पंजाब सरकार इस मामले को लेकर केंद्र सरकार के संपर्क में है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब को केंद्रीय पावर पूल में से उसके निर्धारित हिस्से से कम बिजली मिल रही है। उनके मुताबिक राज्य को इस समय लगभग 1,051 मेगावाट कम बिजली मिल रही है। सौंद ने बताया कि उन्होंने इस मामले के संबंध में केंद्रीय बिजली मंत्री को लिखित में भेजा है। उन्होंने कहा कि यदि राज्य को उसका बनता बिजली का हिस्सा मिल जाता है, तो संकट को काफी हद तक कम किया जा सकता है। मंत्री ने कहा कि पंजाब कृषि प्रधान राज्य होने के कारण किसानों के लिए बिना रुकावट बिजली सप्लाई बेहद जरूरी है। कुल खपत का 70 फीसदी हिस्सा केंद्रीय ग्रिड से आ रहा
पंजाब में बिजली की मांग का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) के ताजा रियल-टाइम डैशबोर्ड आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बिजली की कुल लोड मांग बढ़कर 15,762 मेगावाट के स्तर पर पहुंच गई है। इस भारी मांग को पूरा करने के लिए राज्य अपनी कुल खपत की 70 प्रतिशत से अधिक बिजली केंद्रीय ग्रिड से प्राप्त कर रहा है। मौजूद समय में राज्य का अपना बिजली उत्पादन 4,626 मेगावाट है, जिसके चलते पंजाब केंद्रीय ग्रिड से लगभग 11,138 मेगावाट बिजली की निकासी कर रहा है। 2,119 मेगावाट बिजली प्राइवेट थर्मलों से मिल रही
उत्पादन के आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य के कुल उत्पादन में सबसे बड़ा हिस्सा प्राइवेट थर्मलों का है, जिनसे 2,119 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसमें तलवंडी साबो थर्मल प्लांट से 1,129 मेगावाट और राजपुरा प्लांट से 990 मेगावाट का उत्पादन शामिल है। वहीं, राज्य के अपने थर्मल पावर स्टेशनों से कुल 1,774 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिसमें लेहरा मोहब्बत (799 MW), गोइंदवाल साहिब (516 MW) और रोपड़ थर्मल प्लांट (459 MW) योगदान दे रहे हैं।



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