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बिलासपुर में निर्माणाधीन आवासीय प्रोजेक्ट की विकास अनुज्ञा रद्द:60 फ्लैट की मंजूरी, नक्शे में 90 दिखाए; रास्ते, EWS-LIG, पार्किंग और खुले क्षेत्र में मिली गड़बड़ी




छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के अज्ञेयनगर स्थित निर्माणाधीन बहुमंजिला आवासीय प्रोजेक्ट में कई अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के बाद टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (TNC) ने प्रोजेक्ट की विकास अनुज्ञा रद्द कर दी है। TNC आयुक्त अवनीश शरण ने चार सदस्यीय जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बिलासपुर ज्वाइंट डायरेक्टर TNC कार्यालय से जारी विकास अनुज्ञा को छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 के नियम 25 के तहत रद्द किया है। बिल्डर को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया था, लेकिन समिति ने उसके जवाब को संतोषजनक नहीं माना। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर विकास अनुज्ञा रद्द करने की कार्रवाई की गई। 60 फ्लैट की मंजूरी, नक्शे में 90 तक पहुंची संख्या अनंत रियलिटी के संचालक नमन गोयल 0.62 एकड़ जमीन पर यह प्रोजेक्ट बना रहे थे। जमीन खसरा नंबर 15/1, 157/26 और 158/30 में दर्ज है। शिकायत थी कि मास्टर प्लान के विपरीत आवासीय मार्ग की जमीन को प्रोजेक्ट में शामिल किया गया। गलत नक्शा पेश कर स्वीकृति लेने की भी शिकायत की गई थी। जांच में शिकायत के कई बिंदु सही पाए गए। स्वीकृत विकास अनुज्ञा में 15 ब्लॉकों में 4 फ्लोर और हर फ्लोर पर एक फ्लैट के हिसाब से कुल 60 फ्लैट प्रस्तावित थे। जांच में सामने आया कि नक्शे के कुछ हिस्सों में 6 फ्लोर दिखाए गए थे। इससे फ्लैटों की संख्या 90 तक पहुंच गई। इसका असर EWS और LIG फ्लैटों की गणना पर भी पड़ा। EWS-LIG के लिए जमीन भी बिल्डर के नाम नहीं थी प्रोजेक्ट में EWS और LIG फ्लैटों के लिए जमीन सुरक्षित रखने का प्रावधान था। बिल्डर ने तिफरा के खसरा नंबर 407/7 में निर्माण का शपथ पत्र दिया था। जांच में सामने आया कि यह जमीन बिल्डर के नाम दर्ज नहीं थी। इसके अलावा मौके पर निर्धारित 10 प्रतिशत खुला क्षेत्र भी नहीं मिला। परियोजना में समुचित पार्किंग की व्यवस्था भी नहीं पाई गई। दस्तावेज में 20 फीट रास्ता, नक्शे में 40 फीट जांच में पहुंच मार्ग की चौड़ाई को लेकर भी विरोधाभास मिला। विक्रय पत्रों में रास्ते की चौड़ाई 20 फीट दर्ज थी, जबकि विकास अनुज्ञा में इसे 40 फीट बताया गया था। समिति के मुताबिक, जिस भूखंड को रास्ते के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, वह पहले से स्वीकृत अभिन्यास का हिस्सा था। इसके उपयोग के लिए नियमानुसार संशोधन नहीं कराया गया था। मौके पर पहुंची चार सदस्यीय जांच कमेटी शिकायत मिलने के बाद TNC आयुक्त ने संयुक्त संचालक विनीत नायर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति बनाई। इसमें उप संचालक रोहित गुप्ता, प्रतीक दीक्षित और आलोक त्रिपाठी शामिल थे। समिति ने मौके का निरीक्षण किया और संबंधित दस्तावेजों की जांच की। इसके बाद अपनी रिपोर्ट आयुक्त को सौंपी। रिपोर्ट के आधार पर विकास अनुज्ञा रद्द करने का फैसला लिया गया।



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