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सोनीपत के गोहाना के भगत फूल सिंह महिला मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल में एक्स-रे फिल्मों के बंडल चोरी कर बाहर ले जाने का मामला सामने आया है। 2 सितंबर को अस्पताल के पीछे की तरफ कार में एक्स-रे फिल्मों के बंडल रख रहे तीन लोगों को सुरक्षा कर्मियों ने पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि तीन बंडल तैयार किए गए थे, जिनमें से एक बंडल कार में रखा जा चुका था। इसी दौरान सुरक्षा कर्मियों की नजर पड़ने पर तीनों को पकड़ लिया गया और कार में रखा फिल्म का बंडल उतरवा लिया गया। घटना से जुड़ा सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें बारी-बारी से तीन अलग-अलग बंडल बनाकर एक्स-रे फिल्मों को बाहर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। सुरक्षा अधिकारियों ने मामले की जानकारी मेडिकल कॉलेज के एमएस को दी। इसके बाद मामले में अतिरिक्त निदेशक से जांच कराई गई, जिसमें रेडियोग्राफर रणबीर दलाल की भूमिका संदिग्ध मिलने पर उसे निलंबित कर दिया गया। हालांकि, अब तक मेडिकल कॉलेज की ओर से चोरी के मामले में पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। अलग-अलग तस्वीरों में देखिए चोरी का कारनामा…
भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष बलराम कौशिक ने फेसबुक पर लाइव आकर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर सवाल उठाए और पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। मिली जानकारी के अनुसार, लंबे समय से इसी तरह एक्स-रे फिल्मों के गायब होने की आशंका जताई जा रही है। 2 सितंबर को अस्पताल के पीछे की तरफ एक कार खड़ी थी। तीन व्यक्ति एक्स-रे फिल्मों के बंडल कार में रख रहे थे। इसी दौरान मेडिकल कॉलेज के सुरक्षा कर्मियों की नजर उन पर पड़ गई। सुरक्षा कर्मियों ने तीनों को पकड़ लिया और कार में रखा एक्स-रे फिल्मों का बंडल उतरवा लिया। बताया जा रहा है कि एक्स-रे फिल्मों के तीन बंडल तैयार किए गए थे, जिनमें से एक बंडल कार में रखा जा चुका था। 3 प्वाइंट में पढ़िए सीसीटीवी में क्या दिखाई दे रहा… 1. 30 मिनट में चार बार फिल्मों के कट्टे और बैग कमरे में ले जाते दिखे
करीब 30 मिनट की सीसीटीवी फुटेज में तीन व्यक्ति शुरुआत में कभी कमरे के अंदर तो कभी बाहर जाते दिखाई दे रहे हैं। इस दौरान वे बार-बार इधर-उधर देखते नजर आते हैं। साइड से एक व्यक्ति फिल्म से भरा कट्टा घसीटकर कमरे के अंदर ले जाता दिखाई देता है। इसके बाद दो व्यक्ति बाहर जाते हैं, जिनमें से एक दोबारा बैग उठाकर कमरे में लेकर आता है। तीसरी बार कागज की पेटी में रखी फिल्मों को घसीटकर अंदर लाया जाता है। चौथी बार लाल रंग के कट्टे में फिल्में कमरे में ले जाते हुए दिखाई देती हैं।
2. कमरे में पहले फिल्में इकट्ठी कीं, फिर तीन बंडल तैयार किए
सीसीटीवी के अनुसार, कमरे में एक्स-रे फिल्मों को एक जगह इकट्ठा किया गया। इसके बाद फिल्मों के तीन अलग-अलग बंडल तैयार किए गए। फुटेज में अलग-अलग समय पर इन बंडलों को कमरे से बाहर ले जाते हुए भी देखा जा सकता है। एक व्यक्ति चेक शर्ट में कमरे से बाहर निकलता हुआ दिखाई देता है, जबकि अन्य लोग भी अलग-अलग समय पर बंडल निकालने में शामिल नजर आते हैं।
3. चार लोगों की भूमिका दिखी, एक व्यक्ति गैलरी में रख रहा था नजर
पूरे घटनाक्रम में चार लोगों के शामिल होने की गतिविधियां सीसीटीवी में दिखाई दे रही हैं। बारी-बारी से सभी की भूमिका नजर आती है और वे एक-दूसरे का सहयोग करते दिखते हैं। इनमें से एक व्यक्ति बार-बार गैलरी में चक्कर लगाता दिखाई देता है, मानो वह यह देख रहा हो कि कोई अधिकारी या अन्य व्यक्ति वहां तो नहीं आ रहा। फुटेज में अलग-अलग समय पर तीन बंडल बाहर ले जाने की गतिविधियां भी कैद हुई हैं।
अब जानिए कैसे पकड़े गए.. मरीजों को फिल्म देने की बजाय मोबाइल पर फोटो देने का आरोप भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष बलराम कौशिक ने फेसबुक पेज पर लाइव आकर मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक्स-रे कराने वाले अधिकतर मरीजों को पहले एक्स-रे फिल्म नहीं दी जाती थी। मरीजों को मोबाइल फोन पर एक्स-रे की फोटो उपलब्ध करवा दी जाती थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मरीजों को एक्स-रे फिल्म नहीं दी जा रही थी तो अस्पताल में रखी जा रही फिल्मों का इस्तेमाल किस तरह हो रहा था। यहीं से निगरानी होनी शुरू हुई। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने निगरानी शुरू की तो मामला पकड़ में आया। फिल्में बाहर ले जाता दिखा शख्स जहां पूरे मामले में 4 लोगों की भूमिका सीसीटीवी में साफ दिखाई दे रही है। जहां एक व्यक्ति एक्स-रे फिल्मों को लेकर बाहर जाता दिखाई दे रहा है। सुरक्षा कर्मियों द्वारा तीन लोगों को पकड़े जाने के बाद मामले की जानकारी मेडिकल कॉलेज के एमएस को दी गई। सुरक्षा अधिकारियों ने घटना को लेकर रिपोर्ट भी अधिकारियों के समक्ष रखी। एफआईआर की बजाय जांच के बाद रेडियोग्राफर सस्पेंड मामला सामने आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने अतिरिक्त निदेशक से जांच कराई। जांच में रेडियोग्राफर रणबीर दलाल की भूमिका संदिग्ध मिली। इसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया। हालांकि, एक्स-रे फिल्म चोरी के मामले में अभी तक पुलिस को शिकायत नहीं दी गई है और न ही एफआईआर दर्ज कराई गई है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच जारी होने की बात कही जा रही है।
रद्दी के भाव बिकती हैं फिल्में मिली जानकारी के मुताबिक खानपुर स्थित मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन सैकड़ों एक्स-रे होते हैं। वहीं, एक्स-रे फिल्में रद्दी के भाव करीब 150 रुपए किलो तक बिकने की बात सामने आई है। औसतन हर महीने 2 हजार से 3 हजार एक्स-रे होने का दावा किया जा रहा है। दावा है कि एक्स-रे फिल्मों को रद्दी में बेचकर हर महीने करीब 30 से 40 हजार रुपए की रकम हासिल की जा सकती है। हालांकि, यह अभी जांच का विषय है कि कितनी फिल्में वास्तव में बाहर गईं और उनसे कितनी रकम मिली। लंबे समय से फिल्में गायब होने की आशंका, जांच में खुलेगा राज मामला केवल 2 सितंबर को पकड़े गए बंडल तक सीमित है या इससे पहले भी एक्स-रे फिल्में इसी तरह बाहर जाती रही हैं, यह जांच का विषय है। मिली जानकारी के मुताबिक लंबे समय से एक्स-रे फिल्मों के चोरी होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जांच में यह भी सामने आना बाकी है कि हर महीने एक्स-रे फिल्मों का इस्तेमाल और निस्तारण किस प्रक्रिया के तहत किया जाता था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे। निदेशक बोले- भूमिका संदिग्ध मिलने पर किया निलंबित मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. जगदीश चंद्र दुरेजा ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद अतिरिक्त निदेशक से जांच कराई गई। जांच में रेडियोग्राफर रणबीर दलाल की भूमिका संदिग्ध मिली, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया। मामले की जांच अभी जारी है। हालांकि मामले में 4 अन्य के खिलाफ अभी कोई कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई।
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